H1N1 Virus: वायरस बदला जरूर, लेकिन खतरनाक नहीं; ICMR की 73 लैब कर रहीं निगरानी

H1N1 Virus: वायरस बदला जरूर, लेकिन खतरनाक नहीं; ICMR की 73 लैब कर रहीं निगरानी

नई दिल्ली। देश में बढ़ते एच1एन1 संक्रमण के बीच स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव एवं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा वायरस में बदलाव जरूर हुए हैं, लेकिन ये असामान्य या ज्यादा खतरनाक नहीं हैं। भारत में फैल रहा इन्फ्लुएंजा ए (एच1एन1) वायरस मौसमी पैटर्न के अनुरूप है और अब तक किसी नए या असामान्य खतरनाक स्ट्रेन की पहचान नहीं हुई है। ऐसे में लोगों को संक्रमण को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।

डॉ. राजीव बहल ने मंगलवार को बताया कि केंद्र सरकार और आईसीएमआर देश में एच1एन1 की स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। वायरस में होने वाले बदलावों का पता लगाने के लिए देशभर में 73 डीएचआर-आईसीएमआर वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैबोरेटरी (वीआरडीएल) का नेटवर्क काम कर रहा है। इन प्रयोगशालाओं के माध्यम से वायरस की जीनोमिक और महामारी संबंधी निगरानी की जा रही है।

आईसीएमआर की जांच में सामने आया है कि वर्तमान में फैल रहे एच1एन1 वायरस वैज्ञानिक रूप से ए/मिसौरी/11/2025 (एच1एन1)पीडीएम09-जैसे वायरस हैं। ये क्लेड 6बी.1ए.5ए2ए और सबक्लेड डी.3.1.1 से संबंधित हैं। यह वायरस वंशावली वर्ष 2025 से ही भारत में प्रसारित हो रही है। अब तक की निगरानी में ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे किसी नए या असामान्य एच1एन1 स्ट्रेन के उभरने की पुष्टि होती हो।

डॉ. बहल के मुताबिक वायरस में जो मामूली आनुवंशिक बदलाव दिखाई दे रहे हैं, उन्हें वैज्ञानिक भाषा में एंटीजेनिक ड्रिफ्ट कहा जाता है। मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरस में समय के साथ इस तरह के छोटे बदलाव होना सामान्य प्रक्रिया है। इसलिए केवल वायरस में बदलाव मिलने का अर्थ यह नहीं है कि वह पहले से ज्यादा गंभीर या खतरनाक हो गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार स्वस्थ लोगों में एच1एन1 संक्रमण आमतौर पर हल्का रहता है और अधिकांश मरीज उचित आराम तथा देखभाल से ठीक हो जाते हैं। बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द और कमजोरी इसके सामान्य लक्षण हो सकते हैं।

हालांकि छोटे बच्चों, बुजुर्गों, पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों को संक्रमण से अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। ऐसे लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए लक्षण बढ़ने या स्वास्थ्य की स्थिति बिगड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीवायरल या एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन नहीं करने की भी सलाह दी गई है। यदि बुखार या अन्य लक्षण लगातार बने रहें, सांस लेने में परेशानी हो अथवा स्वास्थ्य तेजी से बिगड़े तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आईसीएमआर का कहना है कि देशभर के निगरानी नेटवर्क के माध्यम से वायरस के प्रसार और उसमें होने वाले बदलावों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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