Nitrosamine Standards: दवाओं की गुणवत्ता पर बड़ा कदम, IPC ने पहली बार लॉन्च किए 7 रेफरेंस स्टैंडर्ड
नई दिल्ली। देश में दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) ने महत्वपूर्ण पहल की है। आयोग ने पहली बार सात नाइट्रोसामाइन इम्प्यूरिटीज के रेफरेंस स्टैंडर्ड लॉन्च किए हैं। इन मानकों की मदद से दवाओं में मौजूद संभावित खतरनाक रासायनिक अशुद्धियों की अधिक सटीक पहचान करने के साथ उनकी मात्रा का आकलन किया जा सकेगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत कार्यरत भारतीय फार्माकोपिया आयोग ने कोलकाता स्थित सेंट्रल ड्रग्स लैबोरेटरी के साथ आयोजित पहली इंटरैक्टिव बैठक के दौरान यह पहल की। इसका उद्देश्य देश में दवाओं की गुणवत्ता जांच प्रणाली को अधिक मजबूत बनाना और नाइट्रोसामाइन जैसी अशुद्धियों की निगरानी को बेहतर करना है।
नाइट्रोसामाइन ऐसी रासायनिक अशुद्धियां हैं, जो दवाओं के निर्माण, भंडारण या पैकेजिंग की प्रक्रिया के दौरान अनजाने में पैदा हो सकती हैं। इन अशुद्धियों को लेकर दुनियाभर में दवा नियामक एजेंसियां सतर्क रही हैं, क्योंकि कुछ नाइट्रोसामाइन को जीन को नुकसान पहुंचाने वाला और कैंसरकारी माना जाता है।
रेफरेंस स्टैंडर्ड उपलब्ध होने से प्रयोगशालाओं को दवाओं के नमूनों में इन अशुद्धियों की पहचान और उनकी मात्रा निर्धारित करने के लिए एक प्रमाणित आधार मिलेगा। इससे जांच परिणामों की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इस पहल का फायदा दवा निर्माताओं और गुणवत्ता जांच प्रयोगशालाओं के साथ नियामक संस्थाओं को भी मिलेगा। कंपनियां दवाओं में नाइट्रोसामाइन की मौजूदगी की बेहतर तरीके से जांच कर सकेंगी और निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप गुणवत्ता सुनिश्चित करने में उन्हें मदद मिलेगी।
आईपीसी की इस पहल से देश में दवाओं की गुणवत्ता जांच, नियामकीय अनुपालन और सुरक्षित दवाओं की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही संभावित खतरनाक अशुद्धियों की समय रहते पहचान कर मरीजों तक बेहतर गुणवत्ता वाली दवाएं पहुंचाना आसान हो सकेगा।


