Child Health Risk Alert: जोखिम वाले नवजातों की होगी डिजिटल ट्रैकिंग, समय पर फॉलो-अप पर सरकार का जोर
नई दिल्ली। नवजात और छोटे बच्चों में बीमारी, कुपोषण और विकास संबंधी समस्याओं के जोखिम की समय रहते पहचान करने के लिए केंद्र सरकार ने ‘समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम’ (एसएसबीएसके) के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया है। इसके तहत जोखिम वाले नवजात और बच्चों की अलग से पहचान कर उनकी गहन निगरानी की जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर समय पर उपचार और रेफरल सुनिश्चित किया जा सके।
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने नवजात और बाल स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चे के जन्म के शुरुआती सात दिन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसके साथ ही जीवन के पहले तीन साल बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण अवधि माने जाते हैं। इस दौरान स्वास्थ्य संबंधी किसी समस्या की समय पर पहचान होने से बच्चे को आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराई जा सकती है।
समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ऐसे नवजातों और छोटे बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित किया जाएगा, जिनमें स्वास्थ्य, पोषण या विकास संबंधी जोखिम दिखाई देते हैं। इन बच्चों के लिए सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक निगरानी और अतिरिक्त फॉलो-अप की व्यवस्था की जाएगी।

इस पूरी प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक की भी मदद ली जाएगी। ‘शैशव ऐप’ के माध्यम से बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी, स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा किए जाने वाले घर-घर दौरे और जरूरत पड़ने पर किए गए रेफरल को डिजिटल रूप से ट्रैक किया जाएगा। इससे स्वास्थ्य विभाग को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि जोखिम वाले बच्चे को निर्धारित समय पर आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं मिली हैं या नहीं।
कार्यक्रम में समय पर रेफरल व्यवस्था को भी महत्वपूर्ण बनाया गया है। यदि किसी बच्चे में ऐसी स्वास्थ्य समस्या की पहचान होती है, जिसके लिए उच्च स्तर की चिकित्सा सुविधा की जरूरत है, तो उसे समय रहते संबंधित स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल भेजा जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इस व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्वास्थ्य, पोषण या विकास संबंधी समस्या से जूझ रहा कोई भी बच्चा फॉलो-अप व्यवस्था से बाहर न हो। डिजिटल ट्रैकिंग से जोखिम वाले बच्चों की लगातार निगरानी करने और स्वास्थ्य सेवाओं के विभिन्न स्तरों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।


