Wetland Conservation: डीएम मेधा रूपम की सख्ती, वेटलैण्ड संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण पर दिए कड़े निर्देश
नोएडा। गौतमबुद्धनगर में पर्यावरण संरक्षण, वेटलैण्ड की सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला वृक्षारोपण समिति, जिला गंगा समिति, जिला पर्यावरण समिति और वेटलैण्ड समिति की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी मेधा रूपम ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए संबंधित विभागों को पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सभी कार्य निर्धारित समय सीमा में और गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए।
बैठक में वृक्षारोपण वर्ष 2026-27 की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। प्रभागीय वन अधिकारी रजनीकांत मित्तल ने पौधों की जियो टैगिंग, ग्रीन चौपाल, लगाए गए पौधों की जीवितता और तालाबों के संरक्षण से संबंधित अब तक की प्रगति की जानकारी जिलाधिकारी के सामने रखी।
जिलाधिकारी मेधा रूपम ने अधिकारियों को जिले में लगाए गए पौधों की शत-प्रतिशत जियो टैगिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल पौधरोपण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधे जीवित रहें, इसकी निगरानी भी जरूरी है। इसके लिए पौधों का नियमित सत्यापन करने और उनकी देखभाल सुनिश्चित करने को कहा गया।
वेटलैण्ड संरक्षण की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने जिले में मौजूद महत्वपूर्ण वेटलैण्ड को अधिसूचित कराने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर जल्द राज्य वेटलैण्ड प्राधिकरण, लखनऊ भेजने को कहा गया है।
यमुना नदी के पांच किलोमीटर के तटीय क्षेत्र में स्थित 11 वेटलैण्ड का मौके पर जाकर सत्यापन कराने के निर्देश भी दिए गए। संबंधित अधिकारियों को इन सभी वेटलैण्ड की वर्तमान स्थिति का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने और प्रशासन को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
बैठक में जिले के तालाबों के संरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। जिलाधिकारी ने सभी तालाबों का सूचीकरण कराने और उनकी सीमाएं स्पष्ट रूप से निर्धारित करने के निर्देश दिए। तालाबों की जमीन पर मौजूद अवैध कब्जे और अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रभावी कार्रवाई करने को कहा गया।
तालाबों से जुड़े लंबित मामलों की भी समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का प्रयास है कि तालाबों की वास्तविक भूमि सुरक्षित रहे और उनका इस्तेमाल जल संरक्षण तथा पर्यावरण सुधार के लिए किया जा सके।
प्रदूषण नियंत्रण को लेकर जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। बिना ढके निर्माण सामग्री लेकर चलने वाले वाहनों और ओवरलोडिंग पर प्रभावी रोक लगाने को कहा गया। इसके साथ ही सड़कों और खुले स्थानों पर कूड़ा जलाने तथा खेतों में पराली जलाने जैसी गतिविधियों पर भी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
जिला गंगा समिति की समीक्षा के दौरान नदियों की स्वच्छता और उनमें गिरने वाले प्रदूषित पानी के उपचार पर विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने गंगा और उसकी सहायक नदियों में गिरने वाले अनटैप्ड ड्रेनों के उपचार के लिए एनजीटी के मानकों के अनुरूप फाइटोरेमेडिएशन तकनीक अपनाने के निर्देश दिए।
यमुना और हिंडन नदी के किनारों की सफाई, घाटों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण से जुड़े कार्यों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों से इन कार्यों की मौजूदा स्थिति और प्रगति की रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। विभिन्न विभागों को आपसी समन्वय के साथ पौधरोपण, वेटलैण्ड संरक्षण, तालाबों की सुरक्षा, नदी स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कार्यों को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाना होगा।
समीक्षा बैठक में जिला विकास अधिकारी एवं परियोजना निदेशक डीआरडीए नेहा सिंह, उप कृषि निदेशक राजीव कुमार, उपायुक्त उद्योग पंकज निर्वाण, एआरटीओ प्रवर्तन डॉ. उदित नारायण पाण्डेय समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।


