Cyber Fraud: शेयर बाजार में मोटे मुनाफे का झांसा देकर महिला से 53 लाख की ठगी, फर्जी ऐप पर दिखाते रहे प्रॉफिट
नोएडा। शेयर बाजार और आईपीओ में निवेश के जरिए मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर साइबर अपराधियों ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट की एक महिला से करीब 53 लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने पहले महिला को व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क कर निवेश का भरोसा दिलाया और फिर एक ग्रुप में जोड़कर कथित मुनाफे के स्क्रीनशॉट दिखाए। महिला का विश्वास जीतने के बाद अलग-अलग बैंक खातों में धीरे-धीरे लाखों रुपये ट्रांसफर कराए गए। जब पीड़िता ने निवेश की रकम और कथित मुनाफा निकालने की कोशिश की तो उससे 15 प्रतिशत सर्विस चार्ज मांगा गया। शक होने पर जांच-पड़ताल करने के बाद महिला को ठगी का पता चला।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-दो निवासी बरखा सूद ने साइबर थाना पुलिस को शिकायत दी है। वह एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करती हैं। शिकायत के मुताबिक 19 अप्रैल को व्हाट्सऐप के माध्यम से मीरा अय्यर नाम की एक महिला ने उनसे संपर्क किया। उसने खुद को एवेंडस कैपिटल की वरिष्ठ प्रतिनिधि बताते हुए आईपीओ और शेयर बाजार में निवेश से अच्छा मुनाफा दिलाने का दावा किया।
शुरुआती बातचीत के बाद पीड़िता को एक व्हाट्सऐप ग्रुप में शामिल कराया गया। इस ग्रुप में मौजूद अन्य सदस्य कथित तौर पर शेयर बाजार और आईपीओ में निवेश से हुए मुनाफे की जानकारी साझा करते थे। निवेश पर बड़ी कमाई दिखाने वाले स्क्रीनशॉट और भुगतान से संबंधित संदेश भी ग्रुप में लगातार शेयर किए जाते थे। इससे पीड़िता को विश्वास होने लगा कि निवेश की पूरी प्रक्रिया वास्तविक है।
इसके बाद आरोपियों ने महिला को कुछ मोबाइल ऐप के लिंक भेजे। ये ऐप सामान्य तरीके से गूगल प्ले स्टोर पर खोजने पर उपलब्ध नहीं थे। उन्हें एपीके फाइल के माध्यम से डाउनलोड कराया गया। शिकायत के अनुसार महिला ने कॉम डॉट गैस्थर्मो डॉट थर्मोडायनेमिक्स, कॉम डॉट बुककैल्क डॉट शेल्विंग और कॉम डॉट नेट्कैल्क डॉट सबनेट-3 नाम से उपलब्ध कराए गए ऐप डाउनलोड किए।
शुरुआत में महिला ने छोटी रकम निवेश की। कुछ समय तक ऐप में निवेश पर मुनाफा दिखाया जाता रहा। इससे उनका भरोसा और मजबूत हो गया। करीब एक सप्ताह बाद आरोपियों ने बताया कि आईपीओ अलॉटमेंट में हिस्सा लेने के लिए उन्हें अतिरिक्त रकम जमा करनी होगी।
इसके बाद महिला ने और पैसों की व्यवस्था कर आरोपियों द्वारा बताए गए विभिन्न बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करना शुरू कर दिया। इस तरह धीरे-धीरे उनसे करीब 53 लाख रुपये जमा करा लिए गए। दूसरी तरफ ऐप में उनके निवेश पर लगातार बड़ा मुनाफा दिखाया जाता रहा, जिससे उन्हें लगता रहा कि उनका पैसा सुरक्षित है और निवेश से अच्छी कमाई हो रही है।
इसके बाद कथित प्रतिनिधि मीरा अय्यर ने महिला को सलाह दी कि वह निवेश की पूरी रकम और उस पर दिखाए जा रहे मुनाफे को एक साथ निकाल लें। महिला ने जब ऐप के माध्यम से रकम निकालने की प्रक्रिया शुरू की तो आरोपियों ने नई शर्त रख दी।
आरोपियों ने कहा कि निवेश और मुनाफे की पूरी रकम जारी करने से पहले कुल राशि का 15 प्रतिशत सर्विस चार्ज जमा करना होगा। इतनी बड़ी अतिरिक्त रकम मांगे जाने पर महिला को शक हुआ। इसके बाद उन्होंने व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़े मीरा अय्यर, रानू वोहरा और अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। जांच-पड़ताल के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं।
पीड़िता की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस उन बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है, जिनमें महिला से रकम ट्रांसफर कराई गई। इसके अलावा यूपीआई आईडी, डिजिटल वॉलेट और ठगी में इस्तेमाल हुए अन्य वित्तीय माध्यमों की भी जांच की जा रही है।
जांच के दायरे में आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, व्हाट्सऐप और सिग्नल अकाउंट भी हैं। पुलिस फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म से जुड़ी वेबसाइट, डोमेन, आईपी एड्रेस और एपीके के जरिए डाउनलोड कराए गए मोबाइल ऐप की तकनीकी जांच कर रही है। इन डिजिटल सुरागों के आधार पर ठगी में शामिल लोगों की पहचान और रकम के लेनदेन की कड़ी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।


