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AIIMS Delhi: सेना के हेलीकॉप्टर से पहुंचीं दो किडनियां, 56 वर्षीय महिला को मिली नई जिंदगी

AIIMS Delhi: सेना के हेलीकॉप्टर से पहुंचीं दो किडनियां, 56 वर्षीय महिला को मिली नई जिंदगी

नई दिल्ली, 9 अगस्त। सेना के हेलीकॉप्टर से समय पर दिल्ली पहुंचाई गईं 70 वर्षीय ब्रेन डेड महिला की दोनों किडनियों का एम्स में 56 वर्षीय महिला के शरीर में सफल प्रत्यारोपण किया गया। गंभीर किडनी रोग से जूझ रही महिला के लिए यह ट्रांसप्लांट बेहद महत्वपूर्ण रहा। खास बात यह रही कि दोनों किडनियों ने प्रत्यारोपण के तुरंत बाद काम करना शुरू कर दिया और करीब 10 दिन बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

70 वर्षीय महिला डोनर चंडीगढ़ कमांड अस्पताल में ब्रेन डेड घोषित की गई थीं। उनकी दोनों किडनियों को सेना के हेलीकॉप्टर की मदद से समय पर एम्स दिल्ली पहुंचाया गया। इसके बाद एम्स के डॉक्टरों ने 56 वर्षीय महिला में दोनों किडनियों का प्रत्यारोपण किया।

डॉक्टरों के अनुसार, दोनों किडनियों को करीब 12 घंटे के कोल्ड इस्कीमिया टाइम के बाद मरीज में प्रत्यारोपित किया गया। इतने लंबे समय तक अंगों को सुरक्षित रखने के बावजूद ट्रांसप्लांट के तुरंत बाद दोनों किडनियों ने काम करना शुरू कर दिया। मरीज की हालत स्थिर रही और दोनों किडनियां सामान्य रूप से काम करती रहीं।

दोनों किडनियों को मरीज के शरीर के दाहिने हिस्से में प्रत्यारोपित किया गया। इस जटिल ट्रांसप्लांट प्रक्रिया को एम्स के सर्जरी, नेफ्रोलॉजी, एनेस्थीसिया, ट्रांसप्लांट इम्यूनोलॉजी और ओआरबीओ की टीमों ने मिलकर पूरा किया। आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल ने भी इस प्रक्रिया में सहयोग किया।

सर्जिकल टीम का नेतृत्व प्रो. असुरि कृष्णा ने किया। नेफ्रोलॉजी टीम में प्रो. दीपांकर भौमिक, प्रो. संदीप महाजन और डॉ. सचिन शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व प्रो. विमी रेवाड़ी ने किया।

प्रो. असुरि कृष्णा के अनुसार, अधिक उम्र वाले डोनर से मिले अंगों के इस्तेमाल में कुछ चुनौतियां होती हैं। ऐसे मामलों में दोनों किडनियों को एक ही मरीज में प्रत्यारोपित करने से दोनों अंगों की संयुक्त क्षमता का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। इस मामले की सफलता से उम्रदराज डोनर के अंगों के उपयोग की संभावनाएं बढ़ सकती हैं और गंभीर किडनी रोगियों के लिए ट्रांसप्लांट के नए अवसर खुल सकते हैं।

उन्होंने बताया कि एम्स में उम्रदराज डोनर से मिली दोनों किडनियों को एक ही मरीज में प्रत्यारोपित करने का यह दूसरा मामला है।

मार्जिनल डोनर और कोल्ड इस्कीमिया टाइम क्या है

ऐसे अंगदाता जिनकी उम्र अधिक हो या जिनकी किडनी सामान्य डोनर की तुलना में कुछ कमजोर मानी जाती हो, उन्हें मार्जिनल डोनर कहा जाता है। वहीं, डोनर के शरीर से किडनी निकालने के बाद उसे ठंडे तापमान में सुरक्षित रखने से लेकर मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित किए जाने तक की अवधि को कोल्ड इस्कीमिया टाइम कहा जाता है।

 

 

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