Thackeray Brothers: गणेशोत्सव पर राज ठाकरे के ‘शिवतीर्थ’ पहुंचे उद्धव, रश्मि और आदित्य; फिर बढ़ी सियासी चर्चा
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे परिवार की बढ़ती नजदीकियां एक बार फिर सुर्खियों में हैं। गणेश चतुर्थी के मौके पर शिवसेना (UBT) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे अपने चचेरे भाई तथा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे के दादर स्थित आवास ‘शिवतीर्थ’ पहुंचे। उनके साथ पत्नी रश्मि ठाकरे और बेटे आदित्य ठाकरे भी थे। परिवार ने वहां गणपति बप्पा के दर्शन किए और पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया।
धार्मिक और पारिवारिक अवसर पर हुई यह मुलाकात महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के कारण राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गई। पिछले कुछ समय में उद्धव और राज ठाकरे कई अवसरों पर एक-दूसरे के करीब दिखाई दिए हैं, इसलिए शिवतीर्थ पर हुई ताजा मुलाकात को भी उसी सिलसिले में देखा जा रहा है।
उद्धव ठाकरे जब परिवार के साथ शिवतीर्थ पहुंचे तो राज ठाकरे और उनके परिजनों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद दोनों परिवारों ने भगवान गणेश के दर्शन किए और आरती में भाग लिया।
मुलाकात की तस्वीरों और वीडियो में उद्धव और राज एक साथ पूजा करते दिखाई दिए। दोनों नेताओं का पारंपरिक परिधान में साथ नजर आना भी समर्थकों और राजनीतिक हलकों में चर्चा का कारण बना।
आदित्य ठाकरे भी अपने माता-पिता के साथ इस कार्यक्रम में मौजूद रहे। इस दौरान उनकी राज ठाकरे से बातचीत हुई। रश्मि ठाकरे ने भी गणेशोत्सव की पूजा में हिस्सा लिया।
जानकारी के मुताबिक राज ठाकरे ने उद्धव के छोटे बेटे तेजस ठाकरे के बारे में भी हालचाल पूछा। मुलाकात का माहौल मुख्य रूप से पारिवारिक और धार्मिक रहा, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में दोनों भाइयों की स्थिति को देखते हुए इसके राजनीतिक अर्थ भी निकाले जा रहे हैं।
उद्धव और राज ठाकरे के बीच लंबे समय तक राजनीतिक दूरी रही है। हाल के वर्षों और विशेषकर पिछले कुछ समय में मराठी भाषा, क्षेत्रीय पहचान और महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच संवाद बढ़ता दिखाई दिया है।
दोनों नेता साझा मंचों पर भी नजर आए हैं। इसके बाद पारिवारिक आयोजनों में बढ़ती मुलाकातों ने समर्थकों के बीच इस सवाल को और मजबूत किया है कि क्या भविष्य में दोनों की राजनीतिक दिशा किसी बड़े साझा समीकरण की ओर बढ़ सकती है।
गणेशोत्सव महाराष्ट्र का प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व है। इस दौरान राजनीतिक नेताओं और परिवारों के बीच एक-दूसरे के घर गणपति दर्शन के लिए जाना आम है, लेकिन ठाकरे परिवार की राजनीतिक विरासत के कारण ऐसी मुलाकातों पर विशेष नजर रहती है।
राज ठाकरे के शिवतीर्थ आवास पर भी गणपति की स्थापना की गई थी। इसी मौके पर उद्धव ठाकरे अपने परिवार के साथ वहां पहुंचे। यह पहली बार नहीं है जब दोनों परिवार गणेशोत्सव के दौरान साथ दिखे हों, लेकिन इस बार राजनीतिक हालात के कारण मुलाकात का महत्व अधिक माना जा रहा है।
ठाकरे परिवार का महाराष्ट्र की राजनीति से गहरा संबंध रहा है। शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के दौर में उद्धव और राज दोनों पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिकाओं में थे। बाद में दोनों के बीच राजनीतिक मतभेद बढ़े और राज ठाकरे ने शिवसेना से अलग होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना बनाई।
इसके बाद कई वर्षों तक दोनों की राजनीतिक राहें अलग रहीं। समय के साथ महाराष्ट्र की राजनीति में भी बड़े बदलाव हुए। शिवसेना के विभाजन के बाद उद्धव ठाकरे का गुट शिवसेना (UBT) के रूप में सामने आया, जबकि राज ठाकरे MNS का नेतृत्व करते रहे।
हाल के समय में मराठी अस्मिता और महाराष्ट्र से जुड़े कुछ मुद्दों पर दोनों भाइयों के रुख में समानता दिखाई दी है। सार्वजनिक कार्यक्रमों में साथ आने और पारिवारिक संवाद बढ़ने से वर्षों पुरानी दूरी कम होती नजर आई है।
गणेश चतुर्थी की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब महाराष्ट्र में दिशा सालियान मामले को लेकर भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं और ठाकरे परिवार का नाम राजनीतिक बयानबाजी में लिया जा रहा है। ऐसे माहौल में उद्धव का पत्नी और बेटे के साथ राज ठाकरे के घर पहुंचना स्वाभाविक रूप से चर्चा में आया।
हालांकि इस मुलाकात के बाद किसी नए राजनीतिक गठबंधन, चुनावी समझौते या साझा रणनीति की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उद्धव ठाकरे परिवार के साथ गणपति दर्शन के लिए शिवतीर्थ गए थे।
कार्यक्रम के दौरान दोनों परिवार सहज माहौल में दिखाई दिए। उद्धव और राज ने साथ आरती की और परिवार के दूसरे सदस्यों ने भी पूजा में भाग लिया।
कभी एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे दोनों ठाकरे भाइयों का लगातार एक मंच या पारिवारिक अवसर पर दिखाई देना महाराष्ट्र की राजनीति में प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके समर्थक भी भविष्य के संभावित समीकरणों पर नजर बनाए हुए हैं।
फिलहाल गणेशोत्सव की यह मुलाकात धार्मिक और पारिवारिक कार्यक्रम के रूप में हुई, लेकिन महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक तस्वीर में उद्धव और राज ठाकरे की बढ़ती निकटता पर चर्चा आगे भी जारी रहने की संभावना है।


