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Ankita Bhandari Case: पहले ‘शुद्धिकरण’ और अब हत्या का मामला, उत्तराखंड में कांग्रेस ने तेज किया अभियान; BJP सरकार पर बढ़ाया दबाव

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Ankita Bhandari Case: पहले ‘शुद्धिकरण’ और अब हत्या का मामला, उत्तराखंड में कांग्रेस ने तेज किया अभियान; BJP सरकार पर बढ़ाया दबाव

उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। साल 2022 में ऋषिकेश के वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या के करीब चार साल बाद यह मामला नए सिरे से सुर्खियों में है। भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद अंकिता के माता-पिता ने इस फैसले का विरोध किया है। दूसरी तरफ, कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर भाजपा और केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। पार्टी का पक्ष है कि मामले में बार-बार चर्चा में आने वाले कथित ‘VIP’ की पहचान सार्वजनिक होनी चाहिए और जांच की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

14 अक्टूबर को दिल्ली के इंडिया गेट पर अंकिता के माता-पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और सोनी देवी ने धरना दिया था। इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी भी उनके समर्थन में पहुंचे। परिवार ने मांग की कि जब तक केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच पूरी नहीं हो जाती और मामले में चर्चा में रहे कथित VIP की पहचान स्पष्ट नहीं होती, तब तक दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति पर रोक लगाई जाए। परिवार को आशंका है कि संवैधानिक पद पर नियुक्ति के बाद जांच असर पड़ सकती है। बहरहाल, दुष्यंत गौतम के विरुद्ध इन आरोपों संबंधी न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है और भाजपा की ओर से कहा गया है कि उनके विरुद्ध मामले में कोई सबूत नहीं है।

15 अक्टूबर की सुबह दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट पर प्रदर्शन कर रहे अंकिता के माता-पिता और कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में ले लिया था। इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस नेताओं ने पुलिस और सरकार पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने भी राष्ट्रपति को पत्र लिखकर दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर तत्काल रोक लगाने की अपील की। कांग्रेस का पक्ष है कि अंकिता के परिवार को न्याय दिलाने और मामले से जुड़े अनुत्तरित सवालों के जवाब हासिल करने के लिए आंदोलन जारी रहेगा। परिवार ने भी अपनी मांगों पर कायम रहने की बात कही है।

दिल्ली में हुए प्रदर्शन के बाद उत्तराखंड कांग्रेस ने देहरादून में भी विरोध तेज कर दिया। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को पार्टी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड और दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के विरोध में बाइक रैली निकाली। इसमें कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, हरक सिंह रावत और प्रीतम सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। पार्टी नेताओं ने कथित VIP की पहचान, जांच की पारदर्शिता और अंकिता के परिवार को न्याय दिलाने की अपील उठाई। कांग्रेस का आरोप है कि मामले के अहम सवालों के जवाब अब तक सामने नहीं आए हैं।

कुमारी शैलजा और अन्य कांग्रेस नेताओं ने केंद्र तथा राज्य सरकार की भूमिका पर प्रश्न उठाते हुए कहा है कि जांच की दिशा और उसकी प्रगति के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। कांग्रेस ने दुष्यंत गौतम की नियुक्ति को भी इसी विवाद से जोड़कर उठाया है। पार्टी का तर्क है कि अंकिता के माता-पिता जिन सवालों को उठा रहे हैं, उनका जवाब मिलना जरूरी है। दूसरी ओर, भाजपा ने दुष्यंत गौतम का बचाव करते हुए कहा है कि उनके विरुद्ध कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। इस तरह मामला अब जांच और न्याय की अपील के साथ-साथ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय भी बन गया है।

उत्तराखंड में कांग्रेस की रणनीति केवल अंकिता भंडारी मामले तक सीमित नहीं दिखाई दे रही है। इससे पूर्व हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से जुड़े ‘शुद्धिकरण’ विवाद के संबंध में भी पार्टी ने भाजपा पर निशाना साधा था। कांग्रेस इन दोनों मुद्दों को सामाजिक न्याय, दलित सम्मान और महिला सुरक्षा जैसे सवालों से जोड़कर उठा रही है। पार्टी का प्रयास है कि इन मुद्दों पर सरकार से प्रतिक्रिया मांगी जाए और लोगों के बीच अपनी राजनीतिक मुहिम को मजबूत किया जाए। वर्ष 2027 में होने वाले उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के निरंतर प्रदर्शनों को भाजपा सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की अपील के बीच सबसे अहम सवाल कथित VIP की पहचान और CBI जांच की प्रगति के संबंध में बना हुआ है। अंकिता के माता-पिता निरंतर इस प्रकरण में स्पष्टता की अपील कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने इसे राज्यव्यापी राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। आगामी दिनों में जांच से जुड़ी जानकारी और सरकार की प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय करने में अहम होगी। वर्तमान में, मामले में लगाए जा रहे आरोपों और राजनीतिक दावों को जांच के निष्कर्षों से अलग रखकर देखना जरूरी है।

 

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संवाददाता

Priyanka Singh

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