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Punjab Child Adoption,: पंजाब सरकार की बड़ी उपलब्धि: पिछले तीन वर्षों में 134 बच्चों को मिला कानूनी रूप से सुरक्षित और स्नेहपूर्ण पारिवारिक वातावरण

Punjab Child Adoption,: पंजाब सरकार की बड़ी उपलब्धि: पिछले तीन वर्षों में 134 बच्चों को मिला कानूनी रूप से सुरक्षित और स्नेहपूर्ण पारिवारिक वातावरण

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने बाल संरक्षण और कानूनी दत्तक ग्रहण (एडॉप्शन) व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पिछले तीन वर्षों के दौरान राज्य में कुल 134 बच्चों को कानूनी रूप से सुरक्षित और स्नेहपूर्ण पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराया गया है। इनमें अनाथ, परित्यक्त, सरेंडर किए गए बच्चों के साथ-साथ विशेष आवश्यकता वाले बच्चों और रिश्तेदारों एवं सौतेले माता-पिता के माध्यम से गोद लिए गए बच्चे भी शामिल हैं। इसके साथ ही पंजाब देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां प्रत्येक जिले में स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी (एसएए) स्थापित की गई है।

चंडीगढ़ में आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान पंजाब की सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने यह जानकारी दी। राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी (स्टेट एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी-एसएआरए) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य ‘एडॉप्शन रेगुलेशंस, 2022’ के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना और दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह एवं बाल हितैषी बनाना था।

डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि पंजाब सरकार इस बात के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि राज्य का कोई भी बच्चा परिवार के प्यार, सुरक्षा और देखभाल से वंचित न रहे। सरकार ऐसी व्यवस्था विकसित कर रही है, जिसमें प्रत्येक बच्चे के अधिकारों की रक्षा हो और उसे सुरक्षित एवं स्थायी पारिवारिक वातावरण मिल सके। उन्होंने कहा कि दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि पंजाब ने इस क्षेत्र में देशभर के लिए एक मिसाल कायम की है। राज्य के सभी जिलों में स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसियां स्थापित की जा चुकी हैं। वर्तमान में पंजाब में कुल 26 स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसियां कार्यरत हैं, जिनमें 16 सरकारी और 10 गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीओ) द्वारा संचालित की जा रही हैं। इससे दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को जिला स्तर तक मजबूत आधार मिला है और जरूरतमंद बच्चों को समय पर परिवार उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में 87 अनाथ, परित्यक्त और सरेंडर किए गए बच्चों को कानूनी रूप से गोद दिलाया गया। इनमें 66 बच्चों को भारत के भीतर ही परिवार मिले, जिनमें 18 लड़के और 48 लड़कियां शामिल हैं। वहीं 21 बच्चों को विदेशों में रहने वाले परिवारों द्वारा गोद लिया गया, जिनमें 5 लड़के और 16 लड़कियां शामिल हैं। इसके अलावा विशेष आवश्यकता (स्पेशल नीड्स) वाले 10 बच्चों को भी स्थायी और स्नेहपूर्ण पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराया गया।

डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि केवल अनाथ और परित्यक्त बच्चों तक ही यह पहल सीमित नहीं रही। इसी अवधि में रिश्तेदारों तथा सौतेले माता-पिता (स्टेप-पेरेंट्स) के माध्यम से भी 47 बच्चों का कानूनी दत्तक ग्रहण कराया गया। इस प्रकार कुल मिलाकर 134 बच्चों को स्थायी परिवार, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार की उस सोच को दर्शाती है, जिसमें प्रत्येक बच्चे को परिवार का अधिकार दिलाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मंत्री ने कहा कि बच्चों के समयबद्ध पुनर्वास और दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए जिला मजिस्ट्रेट, उपायुक्त, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बाल कल्याण समितियां (सीडब्ल्यूसी), जिला बाल संरक्षण इकाइयां (डीसीपीयू) और स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रही है ताकि सभी संबंधित अधिकारी और हितधारक नवीनतम नियमों और प्रक्रियाओं से पूरी तरह परिचित रहें।

राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में पंजाब के सभी जिलों से उपायुक्तों के प्रतिनिधि, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और सिविल सर्जनों के प्रतिनिधि, बाल कल्याण समितियों के सदस्य, जिला बाल संरक्षण इकाइयों के अधिकारी, स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसियों के प्रतिनिधि तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों, उनके समाधान और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विस्तृत चर्चा की गई।

कार्यक्रम में सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) के प्रतिनिधि सयम बिन खालिद ने एडॉप्शन रेगुलेशंस, 2022 के प्रमुख प्रावधानों, CARINGS पोर्टल के उपयोग, दस्तावेजीकरण, समयबद्ध प्रक्रिया और विभिन्न हितधारकों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से जानकारी दी। वहीं पीजीआई के बाल रोग विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. भवनीत भारती ने बच्चों की स्वास्थ्य जांच, मेडिकल मूल्यांकन, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान तथा उनके मेडिकल रिकॉर्ड के महत्व पर विशेषज्ञ जानकारी साझा की।

पंजाब सरकार का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, संवेदनशील तथा प्रभावी बनाएंगे। सरकार भविष्य में भी ऐसी पहलों को जारी रखेगी ताकि प्रत्येक जरूरतमंद बच्चे को सुरक्षित, कानूनी और स्नेहपूर्ण पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके तथा बाल संरक्षण प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।

 

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