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Hospital Fire Safety Guidelines 2026: ICU-NICU तक सख्त प्रोटोकॉल, देशभर में ‘फायर सेफ्टी वीक’ की शुरुआत

Hospital Fire Safety Guidelines 2026: ICU-NICU तक सख्त प्रोटोकॉल, देशभर में ‘फायर सेफ्टी वीक’ की शुरुआत

देश के अस्पतालों में आग की घटनाओं को रोकने और मरीजों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने व्यापक कदम उठाए हैं। Ministry of Health and Family Welfare ने ‘फायर सेफ्टी वीक’ की शुरुआत करते हुए ‘नेशनल गाइडलाइंस ऑन फायर एंड लाइफ सेफ्टी इन हेल्थ केयर फैसिलिटीज (2026)’ जारी की हैं। इन गाइडलाइंस का उद्देश्य अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक वैज्ञानिक, जवाबदेह और मरीज-केंद्रित बनाना है।

स्वास्थ्य सचिव Punya Salila Srivastava ने कहा कि ‘सेफ स्कूल, सेफ हॉस्पिटल और फायर सेफ्टी अवेयर सोसाइटी’ का लक्ष्य तभी हासिल होगा, जब सभी संस्थान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे। नई गाइडलाइंस में अस्पतालों के हाई-रिस्क क्षेत्रों जैसे आईसीयू, एनआईसीयू, पीआईसीयू और ऑपरेशन थिएटर के लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल तय किए गए हैं।

इन प्रोटोकॉल के तहत फायर डिटेक्शन सिस्टम, अलार्म, फायर सप्रेशन सिस्टम, मेडिकल गैस सेफ्टी, इलेक्ट्रिकल सेफ्टी और इमरजेंसी रिस्पांस मैकेनिज्म को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके अलावा हर अस्पताल में फायर सेफ्टी कमेटी, फायर सेफ्टी ऑफिसर और स्पष्ट जिम्मेदारियों का निर्धारण अनिवार्य किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

मरीजों की सुरक्षित निकासी को ध्यान में रखते हुए गाइडलाइंस में चरणबद्ध और क्षैतिज इवैक्यूएशन की रणनीति शामिल की गई है, खासकर गंभीर मरीजों के लिए। यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि आपात स्थिति में बिना घबराहट के व्यवस्थित तरीके से मरीजों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके।

National Disaster Management Authority के सदस्य Krishna S. Vatsa ने कहा कि अस्पतालों में फायर सेफ्टी के लिए प्रोएक्टिव और सिस्टम आधारित दृष्टिकोण बेहद जरूरी है। वहीं फायर सर्विसेज के महानिदेशक Sunil Kumar Jha ने नियमित फायर ऑडिट, प्रशिक्षण और निरंतर निगरानी को अनिवार्य बताया।

फायर सेफ्टी वीक के दौरान देशभर में फायर ऑडिट, मॉक ड्रिल, लाइव डेमो, इवैक्यूएशन अभ्यास और वेबिनार आयोजित किए जाएंगे। मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि सरकारी और निजी अस्पतालों में फायर और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट सुनिश्चित कर उसकी रिपोर्ट आईएचआईपी पोर्टल पर अपलोड की जाए।

नई गाइडलाइंस के लागू होने से अस्पतालों में आग की घटनाओं में कमी आने, मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा बढ़ने और आपातकालीन स्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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