Noida hospital fraud: Noida Fake NABH Claim Case अदालत सख्त, अस्पताल पर FIR दर्ज करने के आदेश

Noida hospital fraud: Noida Fake NABH Claim Case अदालत सख्त, अस्पताल पर FIR दर्ज करने के आदेश
Noida के सेक्टर-46 स्थित Vinod Eye Centre पर ‘एनएबीएच’ मान्यता का फर्जी दावा कर मरीजों को गुमराह करने के मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। Gautam Buddha Nagar की अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने इसे संज्ञेय अपराध मानते हुए थाना सेक्टर-39 पुलिस को 14 दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
मामले की शिकायत Piyush Dutt Kaushik ने दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने अस्पताल की संचालक Dr Shweta Goyal पर गंभीर आरोप लगाए। शिकायत के अनुसार, 9 मार्च 2024 को वह आंखों के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे। वहां अस्पताल परिसर और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लगे बड़े विज्ञापन बोर्डों पर ‘एनएबीएच’ (National Accreditation Board for Hospitals & Healthcare Providers) का लोगो और मान्यता प्रदर्शित की गई थी, जिससे प्रभावित होकर उन्होंने उपचार कराया।
बाद में जब इस दावे की सत्यता की जांच की गई, तो पता चला कि अस्पताल को ‘एनएबीएच’ की कोई आधिकारिक मान्यता प्राप्त नहीं है। इस संबंध में Quality Council of India से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी में 16 जनवरी 2025 को स्पष्ट किया गया कि उक्त अस्पताल एनएबीएच से मान्यता प्राप्त नहीं है।
इतना ही नहीं, ‘एनएबीएच’ की ओर से 10 फरवरी 2025 को जारी एक सार्वजनिक नोटिस में भी Dr Shweta Goyal के अस्पताल द्वारा फर्जी तरीके से एनएबीएच का नाम और लोगो इस्तेमाल कर जनता को गुमराह करने की बात कही गई। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया कि अस्पताल की वेबसाइट, विज्ञापन, होर्डिंग, मरीजों की फाइलों और अन्य दस्तावेजों में गलत तरीके से मान्यता का दावा किया जा रहा था।
अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों में जीपीएस आधारित रंगीन फोटो, विज्ञापन बोर्डों की तस्वीरें, मरीज की फाइल, प्रिस्क्रिप्शन और रेफरल लेटर शामिल थे, जिनमें एनएबीएच का लोगो साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। इसके अलावा 2021 से 2024 तक के मेडिकल एस्टेब्लिशमेंट सर्टिफिकेट भी पेश किए गए, जिनमें अस्पताल की मालिक के रूप में डॉक्टर श्वेता गोयल का नाम दर्ज है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य प्रथम दृष्टया यह साबित करते हैं कि एनएबीएच का फर्जी उपयोग किया गया, जो एक दंडनीय अपराध है और इस पर तत्काल कार्रवाई आवश्यक है। गौरतलब है कि शिकायतकर्ता ने इससे पहले 16 मई 2025 को पुलिस आयुक्त को ईमेल के माध्यम से शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर उन्हें अदालत का रुख करना पड़ा।
अब अदालत के आदेश के बाद पुलिस को 14 दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू करनी होगी। इस फैसले को स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और मरीजों के अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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