
PURVI PADOSI : पूर्वी पड़ोसी क्षेत्रों की अस्थिरता और सोशल मीडिया का बढ़ता असर, सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
नई दिल्ली में मंगलवार को असम राइफल्स और यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया (यूएसआई) के संयुक्त तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें पूर्वोत्तर भारत की बदलती सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। ‘पूर्वोत्तर के लिए सुरक्षा चुनौतियां: मूल्यांकन और आगे का रास्ता’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में सेना और असम राइफल्स के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद, सुरक्षा विशेषज्ञ और नीति निर्माता शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्र की मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों का आकलन करना और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी रणनीतियों पर विचार करना था।
असम राइफल्स, जिसे ‘पूर्वोत्तर के प्रहरी’ और ‘पहाड़ी लोगों के मित्र’ के रूप में जाना जाता है, लंबे समय से पूर्वोत्तर क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सेमिनार में वक्ताओं ने कहा कि बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय परिदृश्य के बीच पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है। विशेष रूप से सीमा क्षेत्रों में बढ़ती गतिविधियों, पूर्वी पड़ोसी देशों में अस्थिरता और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को लेकर गंभीर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने पूर्वोत्तर क्षेत्र की बदलती सुरक्षा परिस्थितियों और उभरती चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों के साथ-साथ सूचना और तकनीक से जुड़े नए खतरे भी सामने आ रहे हैं, जिनसे निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को नई रणनीतियों और तकनीकी साधनों का उपयोग करना होगा।
सेमिनार में असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा और यूएसआई के निदेशक (सेवानिवृत्त) वाइस एडमिरल संजय जे सिंह ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समग्र और समन्वित दृष्टिकोण अपनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सेना, अर्धसैनिक बलों, नागरिक प्रशासन और नीति निर्माताओं के बीच बेहतर तालमेल से ही क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
सेमिनार के दौरान सीमा प्रबंधन, पूर्वी पड़ोसी क्षेत्रों की अस्थिरता, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़ी चुनौतियां और सुरक्षा पर सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए गलत सूचनाओं और अफवाहों का तेजी से फैलना सुरक्षा के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है, जिससे निपटने के लिए प्रभावी रणनीतियां बनाना जरूरी है।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक परिस्थितियां, विविध सामाजिक संरचना और कई अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़ा होना इसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील बनाता है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों, नागरिक प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व के संयुक्त प्रयासों से क्षेत्र की स्थिति में काफी सुधार हुआ है, लेकिन बदलते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए निरंतर समीक्षा और मजबूत नीति निर्माण की आवश्यकता बनी हुई है।
वक्ताओं का मानना था कि भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा, विकास और सामाजिक समन्वय को साथ लेकर चलने वाली नीतियां तैयार करना समय की मांग है। सेमिनार में इस बात पर सहमति जताई गई कि बेहतर सीमा प्रबंधन, आधुनिक तकनीक का उपयोग और विभिन्न एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय से ही पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।





