
Delhi: नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में पठन-पाठन, प्रेरक संवाद और साहित्यिक उत्सव की झलक
नई दिल्ली। राजधानी के ठंडे मौसम के बावजूद नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 के सातवें दिन पुस्तक प्रेमियों का उत्साह बरकरार रहा। इस दिन मेले में भीड़ में इजाफा देखा गया और पुस्तकों की खरीदारी में भी काफी रुचि दिखाई दी। दर्शक और पुस्तक प्रेमी अलग-अलग हॉल में उमड़ते दिखे, कहीं किताबों से भरी ट्रॉली खींचते, तो कहीं उत्साहपूर्ण पलों को सेल्फी पॉइंट पर कैमरे में कैद करते नजर आए।
थीम पवेलियन में चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी की उपस्थिति में कमांडर कलेश मोहनन, लेफ्टिनेंट कमांडर अनुपमा थपलियाल और लेफ्टिनेंट जीवितेश सहारन द्वारा लिखित पुस्तक ‘फोर्ज्ड बाय द सी: द इंडियन नेवी स्टोरी’ का लोकार्पण हुआ। बारह अध्यायों में विभाजित यह पुस्तक प्राचीन सभ्यताओं के समुद्री व्यापार से लेकर आधुनिक, तकनीकी रूप से उन्नत भारतीय नौसेना तक की विरासत का विस्तार से दस्तावेजीकरण करती है। इसमें गोवा मुक्ति, 1971 का भारत-पाक युद्ध और 2008 के मुंबई आतंकी हमलों में नौसेना की भूमिका सहित ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख है।
पुस्तक नौसेना की मानवीय सहायता, आपदा राहत अभियानों, समुद्री डकैती विरोधी प्रयासों और निर्दोष नागरिकों के निकासी अभियानों को भी उजागर करती है। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के निदेशक युवराज मलिक ने इसे राष्ट्र-निर्माण का कार्य बताते हुए कहा कि नौसेना के बलिदान और पेशेवर अनुशासन का दस्तावेजीकरण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। एनबीटी इसे देशभर में विभिन्न भारतीय भाषाओं में प्रकाशित करेगा।
मेले में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह और पंजाब के पूर्व राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित भी उपस्थित रहे। इतिहासकार पार्थजीत बरुआ ने ‘यूनिफॉर्म ऑन स्क्रीन: सिनेमा में भारतीय सैना का चित्रण’ विषयक ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति में बताया कि सैन्य वर्दी केवल कपड़ा नहीं, बल्कि गौरव और मौन बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि कई नायक आज भी गुमनाम हैं, और फिल्मों में सैन्य जीवन की जटिलता को सरल कर दिया जाता है।
थीम पवेलियन में मेजर (सेवानिवृत्त) मैत्रेयी दांडेकर और मेजर (सेवानिवृत्त) मोहिनी गर्गे कुलकर्णी ने आशीष जाधावर के साथ मिलकर भारतीय सशस्त्र बलों में महिला अधिकारी की बढ़ती नेतृत्व भूमिका पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि सेना में महिला या पुरुष अधिकारी नहीं, केवल अधिकारी होते हैं। आजाद हिंद फौज की झांसी रेजिमेंट महिलाओं की सक्रिय युद्ध भूमिका का सशक्त उदाहरण है।
ऑथर्स कॉर्नर में कविता पाठ और डिजिटल संवाद का आयोजन हुआ। कवि मनोज कृष्णन ने ‘इंग्लिश वर्सेज अनलीश्ड’ सत्र का संचालन किया। राजश्री राठौर, डॉ. शहला अहमद और वंदना भसीन ने अपनी कविताओं के माध्यम से जीवन, ध्यान, एकांत और आधुनिक तकनीक-प्रेरित प्रेम पर संदेश दिए।
अंतरराष्ट्रीय पवेलियन में इजराइल के एयाल निर ने जापान में पारंपरिक मार्शल आर्ट ‘बुडो’ पर प्रस्तुति दी। अबू धाबी स्थित द कम्युनिटीज सेंटर ने वंचित समुदायों में शिक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर समूह चर्चा आयोजित की। ऑस्ट्रिया और यूक्रेन के लेखक अपनी रचनाओं का पाठ प्रस्तुत कर मेले की अंतरराष्ट्रीय झलक पेश की। बाल मंडप में ‘शौर्य गाथा’ और ‘सितार सागा’ जैसी प्रस्तुतियों के माध्यम से सांस्कृतिक और रचनात्मक उत्सव मनाया गया।
इस प्रकार, विश्व पुस्तक मेला 2026 केवल पुस्तकों का मेला नहीं, बल्कि साहित्य, संस्कृति, प्रेरक संवाद और शिक्षा का भी उत्सव बनकर उभरा है।
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