Diabetic Retinopathy India: डायबिटिक रेटिनोपैथी से बढ़ रहे अंधता के मामले

Diabetic Retinopathy India: डायबिटिक रेटिनोपैथी से बढ़ रहे अंधता के मामले

भारत में तेजी से बढ़ रही मधुमेह की समस्या अब आंखों की रोशनी को गंभीर रूप से प्रभावित करने लगी है। डायबिटिक रेटिनोपैथी (डीआर) के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है और इसका असर शहरी आबादी के लगभग 18% और ग्रामीण आबादी के 10.4% लोगों की दृष्टि पर पड़ रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारी की समय पर पहचान और व्यवस्थित उपचार होने पर अधिकांश मामलों में अंधत्व से बचाया जा सकता है, लेकिन जागरूकता का अभाव बड़ा खतरा बना हुआ है।

एम्स दिल्ली के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र के सामुदायिक नेत्र चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर प्रवीण वशिष्ठ के अनुसार देश में 10.1 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज मेलिटस से ग्रसित हैं, जबकि 2.15 करोड़ लोग प्री-डायबिटिक अवस्था में हैं। अनुमान है कि वर्ष 2035 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 10.9 करोड़ हो सकती है। मधुमेह की सबसे गंभीर जटिलताओं में से एक डायबिटिक रेटिनोपैथी है, जो रेटिना को नुकसान पहुंचाने वाली सूक्ष्म संवहनी बीमारी है और कामकाजी उम्र के लोगों में दृष्टिहीनता का प्रमुख कारण बनती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मधुमेह से पीड़ित हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार रेटिना की सामान्य जांच अवश्य करानी चाहिए ताकि समस्या का पता समय रहते लगाया जा सके।

विश्व मधुमेह दिवस पर आयोजित राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में स्वास्थ्य मंत्रालय के उप महानिदेशक डॉ. राजेंद्र पी. जोशी, नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. पॉल, डॉ. मनीषा अग्रवाल और रंजना मित्तल सहित कई विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस सम्मेलन के दौरान भारत में डायबिटिक रेटिनोपैथी के प्रबंधन के लिए अद्यतन और व्यापक दिशानिर्देशों की बुकलेट जारी की गई, जिसका उद्देश्य देशभर में दृष्टि हानि की रोकथाम को मजबूत बनाना है।

विजन 2020: इंडिया के अध्यक्ष डॉ. राजेश सैनी ने कहा कि संस्था का मिशन देश में टाले जा सकने वाले अंधेपन को समाप्त कर गुणवत्तापूर्ण नेत्र देखभाल सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करना है। लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘वॉक फॉर रेटिना’ का आयोजन किया गया, जिसे एम्स निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह वॉक आरपी सेंटर से शुरू होकर जेएलएन सभागार पर समाप्त हुई, जिसमें डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। डायबिटिक रेटिनोपैथी के बढ़ते मामलों को देखते हुए विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि मधुमेह रोगियों के लिए नियमित आंख जांच, समय पर उपचार और जीवनशैली में सुधार ही रोशनी बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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