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Haryana: लोकतंत्र की रक्षा के लिए दिया गया हर बलिदान राष्ट्र की अमूल्य धरोहर : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

Haryana: लोकतंत्र की रक्षा के लिए दिया गया हर बलिदान राष्ट्र की अमूल्य धरोहर : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

रिपोर्ट : कोमल रमोला

पंचकूला , 25 जून – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और संविधान की रक्षा के लिए जिन लोकतंत्र सेनानियों ने अपना जीवन संघर्षों में बिताया, उनका त्याग और बलिदान सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि 25 जून, 1975 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐसे काले अध्याय के रूप में दर्ज है, जब सत्ता के संरक्षण में लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने का प्रयास किया गया और पूरे देश पर आपातकाल थोप दिया गया।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी आज पंचकूला में आपातकाल के काले अध्याय के 51 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सविंधान हत्या दिवस कार्यक्रम को संबंधित कर रहे थे । इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों को अंगवस्त्र और सम्मान पत्र भेंट कर सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकाल के 21 महीने भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय हैं। सत्ता के अहंकार में देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास किया गया, विपक्ष के नेताओं को जेलों में डाल दिया गया, प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया और असहमति की प्रत्येक आवाज को दबाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले हजारों लोगों ने यातनाएं सहन कीं, लेकिन अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि 12 जून, 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री का निर्वाचन अवैध घोषित किए जाने के बाद लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करने के बजाय 25 जून की मध्यरात्रि को पूरे देश पर आपातकाल थोप दिया गया। करोड़ों नागरिकों के मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया और संविधान की आत्मा को आघात पहुंचाया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पहले ही लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने 5 जून, 1974 को पटना के गांधी मैदान से ‘सम्पूर्ण क्रांति’ का आह्वान किया था। यह लोकतंत्र की रक्षा और तानाशाही के विरुद्ध जनशक्ति की ऐतिहासिक पुकार थी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए उठी इस आवाज को दबाने के लिए लोकनायक जयप्रकाश नारायण, नानाजी देशमुख, मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, जॉर्ज फर्नांडिस, बीजू पटनायक, चंद्रशेखर, सरदार प्रकाश सिंह बादल सहित अनेक राष्ट्रीय नेताओं को जेलों में बंद कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान एक लाख से अधिक नागरिकों को जेलों में डाला गया, 253 पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया और हरियाणा के 1,564 लोगों को भी सलाखों के पीछे भेजा गया। यह लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सबसे बड़ा हमला था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा की धरती ने भी इस संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दिल्ली से तीन ओर से जुड़े होने के कारण हरियाणा आपातकाल के दमन का बड़ा केंद्र बना। अनेक राष्ट्रीय नेताओं को हरियाणा में नजरबंद रखा गया। वहीं प्रदेश के अनेक राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सैकड़ों स्वयंसेवकों को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि रोहतक में चल रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शिक्षा वर्ग को भी आपातकाल लागू होने के बाद समय से पहले बंद करना पड़ा और संगठन के कार्यालयों को सील कर दिया गया।

श्री सैनी ने कहा कि तमाम दमन और अत्याचारों के बावजूद हरियाणा झुका नहीं। गांव-गांव और खंड-खंड में जन-जागरण अभियान चलाए गए, सत्याग्रह हुए और सैकड़ों लोगों ने निर्भीक होकर गिरफ्तारियां दीं। यह संघर्ष इस बात का प्रमाण है कि हरियाणा की मिट्टी अन्याय और तानाशाही के सामने कभी सिर नहीं झुकाती।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र सेनानी हमारे लिए प्रेरणा के अनंत स्रोत हैं। जिस प्रकार स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को आजादी दिलाई, उसी प्रकार लोकतंत्र सेनानियों ने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया। उन्होंने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण का यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है कि *“आज़ादी एक बार ही नहीं जीती जाती, इसे प्रत्येक दिन जीतना पड़ता है।”*

उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान और कल्याण को सदैव प्राथमिकता दी है। वर्ष 2015 में रोहतक में पहला ‘लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह’ आयोजित किया गया। लोकतंत्र सेनानियों और उनके जीवनसाथियों को सरकारी कर्मचारियों के समान चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की गईं, हरियाणा रोडवेज की बसों में यात्रा संबंधी रियायतें दी गईं तथा उनकी मासिक पेंशन बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह की गई। वर्तमान में प्रदेश के 501 लोकतंत्र सेनानी एवं उनकी विधवाएं इस सम्मान राशि का लाभ प्राप्त कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकाल हमें तीन महत्वपूर्ण सबक सिखाता है। पहला, लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर नागरिक को सदैव सजग रहना होगा। दूसरा, न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका जैसी संस्थाओं की मजबूती लोकतंत्र की आधारशिला है। तीसरा, लोकतंत्र में जनता ही सर्वोच्च होती है और जब जनता अपने अधिकारों के लिए एकजुट होती है तो कोई भी शक्ति उसे दबा नहीं सकती।

उन्होंने कहा कि आज देश आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकतांत्रिक मूल्यों को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। संविधान के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर चलाया गया *‘हमारा संविधान, हमारा स्वाभिमान’* अभियान लोकतंत्र और संविधान के प्रति देश की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत ने विकास, सुशासन और जनभागीदारी के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं तथा देश विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष लोकतंत्र की हत्या के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पूरे वर्ष को ‘स्मृति वर्ष’ के रूप में मनाने का आह्वान किया था। यह केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए नई पीढ़ी को जागरूक करने का अभियान है।

लोकतंत्र की अमूल्य विरासत को सहेजना हम सभी की जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आपातकाल के संघर्ष और लोकतंत्र सेनानियों के बलिदान को याद करना केवल इतिहास को दोहराना नहीं, बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा प्राप्त करना है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे लोकतंत्र, संविधान और राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि भारत विश्व के सबसे सशक्त, जीवंत और प्रेरणादायी लोकतंत्र के रूप में निरंतर आगे बढ़ता रहे।

इस अवसर पर हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा, कालका की विधायक शक्ति रानी शर्मा, राज्य सभा सांसद रेखा शर्मा, मेयर शाम लाल बंसल , विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता, प्रदेश उपाध्यक्ष बनतो कटारिया, पूर्व मंत्री असीम गोयल , पूर्व मंत्री राम बिलास शर्मा, जिला अध्यक्ष अजय मित्तल, मीडिया सचिव प्रवीण अत्रे एवं लोकतंत्र सेनानी उपस्थित रहे।

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