HPV Vaccine Cervical Cancer Prevention: एचपीवी टीकाकरण और नियमित स्क्रीनिंग से सर्विकल कैंसर पर लगेगी रोक

HPV Vaccine Cervical Cancer Prevention: एचपीवी टीकाकरण और नियमित स्क्रीनिंग से सर्विकल कैंसर पर लगेगी रोक
देश में महिलाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सर्विकल कैंसर की रोकथाम को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दो सरल उपाय—एचपीवी टीकाकरण और नियमित स्क्रीनिंग—के जरिए इस गंभीर बीमारी से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। इन उपायों को अपनाकर न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सकती है बल्कि सर्विकल कैंसर के मामलों को भी कम किया जा सकता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि समय पर एचपीवी टीकाकरण और नियमित जांच से इस बीमारी के संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने महिलाओं और अभिभावकों से अपील की कि किशोरियों को समय पर एचपीवी वैक्सीन दिलवाना और महिलाओं की नियमित स्क्रीनिंग कराना बेहद जरूरी है, ताकि सर्विकल कैंसर का समय रहते पता लगाया जा सके और उसका प्रभावी इलाज संभव हो सके।
विशेषज्ञों के अनुसार 14 वर्ष तक की लड़कियों को एचपीवी यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस की वैक्सीन लगवाने की सलाह दी जाती है। यह टीका सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है तथा हाई-रिस्क एचपीवी संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करता है। एचपीवी संक्रमण ही आगे चलकर सर्विकल कैंसर का प्रमुख कारण बनता है। डॉक्टरों का कहना है कि कम उम्र में यह टीका लगवाने से लंबे समय तक शरीर को सुरक्षा मिलती है और भविष्य में इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इसके साथ ही 30 से 65 वर्ष की महिलाओं के लिए नियमित स्क्रीनिंग भी बेहद जरूरी मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉक्टर की सलाह के अनुसार महिलाओं को समय-समय पर जांच करानी चाहिए। इन जांचों में वीआईए टेस्ट, पैप स्मीयर टेस्ट और एचपीवी डीएनए टेस्ट शामिल हैं। इन परीक्षणों की मदद से गर्भाशय ग्रीवा में होने वाले शुरुआती बदलावों का समय रहते पता लगाया जा सकता है।
नियमित स्क्रीनिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे कैंसर के शुरुआती संकेतों की पहचान हो जाती है। अगर बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए तो उसका इलाज अपेक्षाकृत आसान और प्रभावी हो जाता है। इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ महिलाओं को जागरूक रहने और नियमित जांच कराने की सलाह देते हैं।
एचपीवी वैक्सीन को लेकर दुनिया भर में कई तरह की चर्चाएं और भ्रांतियां भी सामने आती रही हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह वैक्सीन आम तौर पर सुरक्षित मानी जाती है। किसी भी अन्य टीके की तरह इसके कुछ हल्के दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द, बुखार, सिरदर्द, थकान या चक्कर आना। ये लक्षण सामान्य रूप से थोड़े समय में अपने आप ठीक हो जाते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया के 140 से अधिक देशों ने अपने राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में एचपीवी वैक्सीन को शामिल किया है। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान, फ्रांस, स्वीडन और नॉर्वे जैसे कई देशों में किशोर लड़कियों के साथ-साथ लड़कों को भी यह टीका लगाया जा रहा है। एशिया में भारत, भूटान, नेपाल और कंबोडिया जैसे देशों में भी इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर टीकाकरण और नियमित स्क्रीनिंग को व्यापक स्तर पर अपनाया जाए तो भविष्य में सर्विकल कैंसर के मामलों में बड़ी कमी लाई जा सकती है। इसके लिए जरूरी है कि महिलाओं और उनके परिवारों में इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए और उन्हें समय पर टीकाकरण तथा जांच के लिए प्रोत्साहित किया जाए।





