World Autism Awareness Day 2026: ऑटिज्म से जुड़े बच्चों को शिक्षा और रोजगार में मिले बराबरी का स्थान, समाज में बढ़ी जागरूकता की जरूरत

World Autism Awareness Day 2026: ऑटिज्म से जुड़े बच्चों को शिक्षा और रोजगार में मिले बराबरी का स्थान, समाज में बढ़ी जागरूकता की जरूरत
नई दिल्ली में 2 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व आत्मकेंद्रित जागरूकता दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और समावेशी समाज की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश लेकर आता है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि हर बच्चे को समझ, स्वीकार्यता और समान अवसर मिलना चाहिए, चाहे उसकी विकासात्मक स्थिति कैसी भी हो।
इस वर्ष की थीम ‘ऑटिज़्म और मानवता- हर जीवन का मूल्य’ इस विचार को और मजबूत करती है कि समाज में हर व्यक्ति का महत्व है और उसे आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए। ऑटिज्म से जुड़े लोगों को केवल बीमारी के दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें ‘अलग तरह से सक्षम’ मानकर उनके विकास की दिशा में काम किया जाना चाहिए।
चिकित्सकीय भाषा में ऑटिज्म को ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) कहा जाता है, जो एक न्यूरो-डेवलपमेंटल स्थिति है और बच्चों के व्यवहार, संवाद क्षमता और सामाजिक सहभागिता को प्रभावित करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि शुरुआती उम्र में इसकी पहचान हो जाए तो उचित थेरेपी और सहयोग के माध्यम से बच्चे काफी हद तक सामान्य जीवन के करीब पहुंच सकते हैं।
एम्स दिल्ली में इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है, जहां बाल रोग और मनोचिकित्सा विभागों द्वारा ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों के लिए विशेष क्लिनिक और मल्टी-डिसिप्लिनरी थेरेपी प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। इनमें स्पीच थेरेपी, बिहेवियरल थेरेपी और पैरेंट काउंसलिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं, साथ ही समय-समय पर जागरूकता अभियान, वर्कशॉप और स्क्रीनिंग कैंप भी आयोजित किए जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और बेहतर निदान के चलते ऑटिज्म के मामलों की पहचान पहले से अधिक हो रही है, लेकिन ग्रामीण और कम जागरूक क्षेत्रों में अभी भी कई बच्चे समय पर पहचान और उपचार से वंचित रह जाते हैं।
एम्स दिल्ली की प्रोफेसर डॉ. शेफाली गुलाटी के अनुसार, ऑटिज्म से जुड़े बच्चों को ‘बीमार’ नहीं बल्कि ‘अलग तरह से सक्षम’ समझने की आवश्यकता है। यदि परिवार, स्कूल और समाज मिलकर सहयोगी दृष्टिकोण अपनाएं, तो ये बच्चे अपनी विशेष क्षमताओं के साथ शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन में बेहतर स्थान हासिल कर सकते हैं।





