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Satya Niketan Building Collapse: सत्य निकेतन में दीवार तोड़ते ही भरभराकर गिरी चार मंजिला इमारत, हादसे में दो मजदूरों की मौत; पुलिस ने चार लोगों को किया गिरफ्तार

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Satya Niketan Building Collapse: सत्य निकेतन में दीवार तोड़ते ही भरभराकर गिरी चार मंजिला इमारत, हादसे में दो मजदूरों की मौत; पुलिस ने चार लोगों को किया गिरफ्तार

नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में चार मंजिला इमारत गिरने के मामले में पुलिस जांच के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। हादसा उस समय हुआ, जब इमारत में रेनोवेशन का काम चल रहा था और मजदूर एक दीवार को तोड़ रहे थे। इसी दौरान अचानक पूरी इमारत भरभराकर गिर गई और वहां काम कर रहे मजदूर मलबे में दब गए। हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। मामले की जांच आगे बढ़ाते हुए दिल्ली पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

यह हादसा दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में स्थित एक चार मंजिला इमारत में हुआ। बिल्डिंग में कुछ समय से रेनोवेशन और निर्माण से संबंधित काम कराया जा रहा था। घटना के समय भी कई मजदूर अंदर मौजूद थे। अचानक इमारत का बड़ा हिस्सा गिरने के बाद आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने घटना की सूचना पुलिस और अन्य आपातकालीन एजेंसियों को दी।

जानकारी मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और बचाव दल मौके पर पहुंचे। इमारत का बड़ा हिस्सा मलबे में तब्दील हो चुका था और मजदूर उसके नीचे फंसे हुए थे। बचाव दल ने मलबा हटाकर अंदर दबे लोगों को निकालने का अभियान शुरू किया। संकरी जगह और भारी मलबे के कारण राहत एवं बचाव कार्य में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

हादसे की शुरुआती जांच में रेनोवेशन के दौरान दीवार तोड़े जाने का मामला सामने आया है। पुलिस की जांच के मुताबिक इमारत के अंदर मजदूर एक दीवार को तोड़ने का काम कर रहे थे। इसी दौरान बिल्डिंग अचानक गिर गई। अब जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह पता लगाना है कि जिस दीवार को हटाया जा रहा था, उसका इमारत के स्ट्रक्चर पर कितना असर था और उसे तोड़ने से पहले आवश्यक तकनीकी सावधानियां बरती गई थीं या नहीं।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि रेनोवेशन का काम किसी योग्य इंजीनियर या अन्य तकनीकी विशेषज्ञ की निगरानी में कराया जा रहा था या नहीं। किसी पुरानी या बहुमंजिला इमारत में दीवार हटाने से पहले उसके स्ट्रक्चरल प्रभाव का आकलन महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में जांच के दौरान रेनोवेशन से संबंधित योजना और मौके पर अपनाई गई प्रक्रिया की भी पड़ताल की जा रही है।

इस हादसे में दो मजदूरों की जान चली गई। मलबे में दबने के कारण उन्हें गंभीर चोटें आई थीं। बचाव अभियान के दौरान मजदूरों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन दो लोगों को बचाया नहीं जा सका। अन्य घायलों को भी इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।

मजदूरों की मौत के बाद पुलिस ने मामले में आपराधिक लापरवाही से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू की। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इमारत के अंदर चल रहे काम के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए थे या नहीं। इसके अलावा निर्माण स्थल पर सुरक्षा उपकरण और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं उपलब्ध थीं या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।

जांच के दौरान पुलिस ने मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों की भूमिका रेनोवेशन और निर्माण कार्य से संबंधित बताई जा रही है। पुलिस यह निर्धारित करने की कोशिश कर रही है कि काम कराने, उसकी निगरानी करने और मजदूरों को निर्देश देने की जिम्मेदारी किन लोगों के पास थी।

इमारत के मालिक और रेनोवेशन का काम कराने वाले लोगों से संबंधित दस्तावेजों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। पुलिस यह पता लगा रही है कि भवन में किस स्तर का बदलाव किया जा रहा था और क्या इसके लिए संबंधित एजेंसियों से जरूरी अनुमति ली गई थी। बिल्डिंग के मूल नक्शे और रेनोवेशन के दौरान किए जा रहे बदलावों की तुलना भी जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है।

हादसे के बाद इमारत की स्थिति और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे हैं। पुलिस और संबंधित विभागों की जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि बिल्डिंग पहले से संरचनात्मक रूप से कमजोर थी या रेनोवेशन के दौरान किए गए बदलावों ने उसकी स्थिरता को प्रभावित किया।

दीवार तोड़े जाने और उसके तुरंत बाद इमारत गिरने के घटनाक्रम को देखते हुए इस पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि हादसे की वास्तविक तकनीकी वजह विशेषज्ञ जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। केवल शुरुआती परिस्थितियों के आधार पर यह निश्चित नहीं किया जा सकता कि इमारत गिरने की एकमात्र वजह दीवार हटाना ही था।

घटनास्थल से मलबा हटाने और लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ आसपास के क्षेत्र को भी एहतियातन सुरक्षित किया गया। किसी अन्य हिस्से के गिरने की आशंका को देखते हुए बचाव कर्मियों ने सावधानी के साथ अभियान चलाया। घटनास्थल की तस्वीरें और अन्य साक्ष्य भी जांच के लिए जुटाए गए हैं।

पुलिस मामले में प्रत्यक्षदर्शियों और वहां काम करने वाले मजदूरों के बयान भी दर्ज कर रही है। इन बयानों से यह समझने की कोशिश की जा रही है कि हादसे से ठीक पहले इमारत के अंदर किस तरह का काम चल रहा था, कौन सी दीवार तोड़ी जा रही थी और क्या बिल्डिंग गिरने से पहले किसी तरह के संकेत दिखाई दिए थे।

इसके साथ ही संबंधित सरकारी और नगर निकाय रिकॉर्ड की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि इमारत की स्वीकृत संरचना क्या थी और रेनोवेशन के दौरान उसमें किए जा रहे बदलाव नियमों के अनुरूप थे या नहीं। अगर किसी प्रकार की अनधिकृत तोड़फोड़ या निर्माण सामने आता है तो जिम्मेदारी तय करने में यह महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

सत्य निकेतन में हुए इस हादसे ने घनी आबादी वाले इलाकों में पुरानी इमारतों के रेनोवेशन के दौरान सुरक्षा मानकों के पालन का मुद्दा भी फिर सामने ला दिया है। बहुमंजिला भवनों में बिना पर्याप्त तकनीकी आकलन के संरचनात्मक बदलाव करना गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इस मामले में भी जांच का फोकस इसी बात पर है कि काम शुरू करने से पहले इमारत की मजबूती और सुरक्षा का उचित आकलन किया गया था या नहीं।

फिलहाल दिल्ली पुलिस चार गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है। साथ ही भवन के मालिक, ठेकेदार, रेनोवेशन से जुड़े लोगों और अन्य जिम्मेदार पक्षों से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है। तकनीकी जांच और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि चार मंजिला इमारत गिरने के पीछे वास्तविक कारण क्या था और हादसे के लिए किस स्तर पर लापरवाही जिम्मेदार थी।

दो मजदूरों की मौत के बाद मामला अब केवल एक भवन दुर्घटना तक सीमित नहीं रह गया है। पुलिस की जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि क्या हादसे को आवश्यक सुरक्षा मानकों और तकनीकी नियमों का पालन करके रोका जा सकता था। जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदारी तय करने और आगे की कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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