Home Blog Page 2

Odisha CM: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ग्रेटर नोएडा की हायर कंपनी पहुंचे, सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम

Odisha CM: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ग्रेटर नोएडा की हायर कंपनी पहुंचे, सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम

नोएडा। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी शनिवार को ग्रेटर नोएडा की आधुनिक टाउनशिप में स्थित हायर कंपनी के परिसर में पहुंचे। यह टाउनशिप दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत विकसित की गई है। मुख्यमंत्री के कंपनी परिसर में पहुंचने को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी कर दी गई थी। उनके दौरे के दौरान कंपनी परिसर और आसपास के इलाकों में पुलिस और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती रही।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सुबह करीब 11 बजे हायर कंपनी परिसर में आयोजित एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। कार्यक्रम को पूरी तरह निजी और गोपनीय रखा गया था। कंपनी परिसर में किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश की अनुमति नहीं थी। कार्यक्रम के संबंध में भी सार्वजनिक स्तर पर पहले से कोई जानकारी साझा नहीं की गई थी।

मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। कंपनी परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ आने-जाने वाले मार्गों पर भी निगरानी रखी गई। मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों के साथ स्थानीय पुलिस की टीमें भी मौजूद रहीं।

मुख्यमंत्री के काफिले के कंपनी परिसर में पहुंचने और वहां से रवाना होने के दौरान यातायात व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया। पुलिस ने निर्धारित मार्ग पर निगरानी बनाए रखी, ताकि काफिले के आवागमन के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। सुरक्षा कारणों से कंपनी परिसर के आसपास भी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं।

दोपहर करीब दो बजे मुख्यमंत्री सड़क मार्ग से जेपी ग्रीन्स के लिए रवाना हुए। उनके काफिले के गुजरने के दौरान सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती रही। निर्धारित रूट पर सुरक्षाकर्मियों ने निगरानी रखी और काफिले की आवाजाही को व्यवस्थित तरीके से पूरा कराया।

जेपी ग्रीन्स पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने कुछ समय आराम किया। इसके बाद शाम करीब छह बजे वह सड़क मार्ग से दिल्ली के लिए रवाना हो गए। उनके पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई और स्थानीय पुलिस प्रशासन की ओर से आवश्यक इंतजाम किए गए।

मुख्यमंत्री का ग्रेटर नोएडा स्थित हायर कंपनी परिसर का यह दौरा निजी कार्यक्रम से जुड़ा था। कार्यक्रम की गोपनीयता बनाए रखने के कारण इसके बारे में सार्वजनिक स्तर पर कोई विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान पुलिस और सुरक्षाकर्मियों ने कंपनी परिसर से लेकर उनके निर्धारित मार्ग और जेपी ग्रीन्स तक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी।

Dowry Harassment: शादी के एक साल बाद पति की कथित सच्चाई सामने आने का दावा, महिला ने पांच लोगों पर दर्ज कराया केस

Dowry Harassment: शादी के एक साल बाद पति की कथित सच्चाई सामने आने का दावा, महिला ने पांच लोगों पर दर्ज कराया केस

नोएडा। सेक्टर-82 स्थित एक सोसाइटी में रहने वाली महिला ने शादी के करीब एक साल बाद अपने पति को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का दावा है कि शादी के बाद पति उससे दूरी बनाकर रखता था और बाद में चिकित्सकीय जांच के दौरान उसे पति की यौन पहचान के बारे में जानकारी मिली। महिला का आरोप है कि इस बात को लेकर विवाद के बाद पति ने उसका गला दबाकर हत्या करने का प्रयास किया। पीड़िता ने पति समेत ससुराल पक्ष के पांच लोगों के खिलाफ फेज-2 थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।

पीड़िता के मुताबिक, उसकी शादी 17 नवंबर 2024 को प्रयागराज में हुई थी। शादी में उसके पिता ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार दहेज दिया था। आरोप है कि शादी के बाद से ही पति और ससुराल के अन्य सदस्यों का व्यवहार उसके प्रति ठीक नहीं रहा। महिला का कहना है कि पति कई महीनों तक अलग-अलग बहाने बनाकर उससे दूरी बनाए रखता था।

इसी दौरान ससुराल पक्ष की ओर से अतिरिक्त दहेज में कार और फ्लैट की मांग किए जाने का भी आरोप है। महिला का कहना है कि मांग पूरी नहीं होने पर उसे प्रताड़ित किया जाने लगा।

थाईलैंड में मारपीट का आरोप

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि शादी के कुछ समय बाद वह पति के साथ हनीमून के लिए थाईलैंड गई थी। आरोप है कि वहां पति ने उसके साथ मारपीट की, जिसके कारण उन्हें यात्रा बीच में ही छोड़कर भारत लौटना पड़ा। इसके बावजूद महिला ने परिवार बचाने की कोशिश की और रिश्ते को बनाए रखा।

महिला के अनुसार करीब एक साल बाद वह पति को चिकित्सक के पास लेकर गई। जांच के बाद उसे पति की यौन पहचान के संबंध में जानकारी मिली। आरोप है कि यह बात सामने आने पर पति डॉक्टर से विवाद करने के बाद वहां से चला गया।

ससुराल पक्ष पर भी गंभीर आरोप

पीड़िता का कहना है कि उसने मामले की जानकारी ननद और ननदोई को भी दी, क्योंकि दोनों ने ही उसका रिश्ता कराया था। महिला के मुताबिक, इसके बावजूद उसकी शिकायत पर कोई उचित कदम नहीं उठाया गया। वह दिसंबर 2025 से अपने मायके में रह रही है।

महिला ने पति, सास, ससुर, ननद और ननदोई के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

 

Bioenergy Expo: बायोएनर्जी एक्सपो में कल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने की संभावना, ग्रामीण रोजगार और किसानों की आय पर रहेगा फोकस

Bioenergy Expo: बायोएनर्जी एक्सपो में कल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने की संभावना, ग्रामीण रोजगार और किसानों की आय पर रहेगा फोकस

नोएडा। इंडिया एक्सपो मार्ट में 11 से 13 अगस्त तक आयोजित होने वाले इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो में बुधवार, 12 अगस्त को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई केंद्रीय मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है। मुख्यमंत्री के संभावित दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री का आधिकारिक कार्यक्रम अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है, लेकिन जिलास्तर पर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो का उद्देश्य उत्तर प्रदेश की कृषि और पशुधन आधारित अर्थव्यवस्था को बायोएनर्जी क्षेत्र से जोड़ना है। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने, किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने तथा जैविक कचरे के बेहतर इस्तेमाल की संभावनाओं पर चर्चा होगी। अधिकारियों के मुताबिक, एक्सपो में इस बात पर विशेष जोर दिया जाएगा कि बायोएनर्जी को गांवों में स्थानीय उद्यम और रोजगार का माध्यम कैसे बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम में 12 अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और उत्तर प्रदेश सरकार के ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री एके शर्मा के शामिल होने की संभावना है। मुख्यमंत्री के आधिकारिक कार्यक्रम का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन संभावित वीआईपी दौरे को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

एक्सपो में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, निवेशकों, तकनीकी कंपनियों और शोधकर्ताओं की भागीदारी होगी। इसमें भारत में बायोएनर्जी क्षेत्र की संभावनाओं, नई तकनीकों, निवेश और ग्रामीण स्तर पर परियोजनाओं के विस्तार को लेकर मंथन किया जाएगा। उत्तर प्रदेश में गांव और क्लस्टर स्तर पर रोजगार सृजन को लेकर विशेष चर्चा होने की संभावना है।

केंद्र सरकार की गोबरधन पहल के तहत पशुओं के गोबर, कृषि अवशेष और अन्य जैविक कचरे से बायोगैस, कंप्रेस्ड बायोगैस और जैविक खाद तैयार करने की संभावनाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर भी जोर रहेगा। विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों के सामने यह मॉडल रखा जाएगा कि गांवों में उपलब्ध जैविक संसाधनों का इस्तेमाल ऊर्जा उत्पादन और आय के स्रोत के रूप में कैसे किया जा सकता है।

अधिकारियों के मुताबिक, गांव और क्लस्टर स्तर पर स्थापित की जाने वाली बायोएनर्जी परियोजनाएं किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बन सकती हैं। इन परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर रोजगार भी पैदा होने की संभावना है। ग्रामीण युवा प्लांट ऑपरेटर, तकनीशियन और विभिन्न सेवाओं से जुड़े कर्मचारी के रूप में काम कर सकते हैं। वहीं, स्वयं सहायता समूह और स्थानीय उद्यमी जैविक कचरे के संग्रह, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन जैसे कार्यों से जुड़ सकते हैं।

इस मॉडल के तहत किसानों और पशुपालकों से निकलने वाले गोबर और कृषि अवशेष जैसे जैविक कचरे को गांव में ही एकत्र कर उसका उपयोग ऊर्जा और जैविक खाद तैयार करने में किया जा सकता है। इससे एक तरफ कचरे के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी तो दूसरी ओर ऊर्जा, खाद और स्थानीय बाजार को जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आय का नया चक्र विकसित किया जा सकता है।

एक्सपो में बायोएनर्जी परियोजनाओं के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता, आधुनिक तकनीक और नीतिगत ढांचे पर भी चर्चा होगी। निवेशकों और तकनीकी कंपनियों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे और मध्यम स्तर की परियोजनाओं को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। इससे ग्रामीण युवाओं और स्थानीय उद्यमियों के लिए नए कारोबारी अवसर विकसित हो सकते हैं।

उत्तर प्रदेश में कृषि और पशुधन का बड़ा आधार होने के कारण बायोएनर्जी के क्षेत्र में राज्य के पास व्यापक संभावनाएं हैं। कृषि अवशेष और पशुधन से निकलने वाले जैविक कचरे का उपयोग यदि व्यवस्थित तरीके से किया जाए तो इससे ऊर्जा उत्पादन के साथ पर्यावरणीय लाभ भी हासिल किए जा सकते हैं। एक्सपो में इसी तरह की संभावनाओं को उद्योग, सरकार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बीच जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।

सरकार की ओर से ग्रामीण उद्यमिता, किसानों की आय और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बायोएनर्जी को एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। एक्सपो के दौरान होने वाली चर्चाओं और संभावित निवेश से उत्तर प्रदेश को ग्रामीण बायोएनर्जी और सर्कुलर इकोनॉमी के क्षेत्र में प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में नई संभावनाएं सामने आ सकती हैं।

Corporate Crime: जापानी कंपनी के दो कर्मचारियों पर गोपनीय जानकारी के दुरुपयोग का आरोप, पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

Corporate Crime: जापानी कंपनी के दो कर्मचारियों पर गोपनीय जानकारी के दुरुपयोग का आरोप, पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

नोएडा। सेक्टर-58 थाना क्षेत्र स्थित एक इंडो-जापानी संयुक्त उपक्रम कंपनी के दो कर्मचारियों पर कंपनी की गोपनीय और तकनीकी जानकारी का कथित तौर पर दुरुपयोग करने, अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने और कंपनी को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा है। कंपनी की अधिकृत प्रतिनिधि की शिकायत के आधार पर पुलिस ने दोनों कर्मचारियों के खिलाफ चोरी, बेईमानी से संपत्ति के दुरुपयोग, आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

सेक्टर-39 के एफ ब्लॉक में रहने वाली डॉ. शोभा धवन ने पुलिस को दी शिकायत में खुद को संबंधित कंपनी की अधिकृत प्रतिनिधि बताया है। उनके अनुसार, कंपनी एक इंडो-जापानी ज्वाइंट वेंचर है और इसका कार्यालय सेक्टर-57 में स्थित है। कंपनी मैकेनिकल और मोशन कंट्रोल केबल तथा उनसे जुड़े पार्ट्स के डिजाइन और निर्माण का काम करती है।

शिकायत के अनुसार, सेक्टर-49 क्षेत्र के बरौला गांव निवासी राजेंद्र चौहान और दिल्ली के ग्रेटर कैलाश निवासी रंजीत महापात्रा कंपनी में कर्मचारी के तौर पर कार्यरत थे। नौकरी शुरू करने से पहले दोनों को नियुक्ति पत्र के माध्यम से कंपनी की गोपनीय जानकारी को सुरक्षित रखने, उसे किसी बाहरी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने और प्रतिस्पर्धी गतिविधियों से दूर रहने जैसी शर्तों से अवगत कराया गया था।

कंपनी की ओर से आरोप लगाया गया है कि दोनों कर्मचारियों ने कम से कम दो साल तक कंपनी के लिए काम करने का अनुबंध किया था। इस दौरान उन्हें कंपनी की तकनीकी और कारोबारी जानकारी तक पहुंच प्राप्त थी। आरोप है कि इसी जानकारी का बाद में कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया।

कंपनी की आंतरिक जांच के दौरान कथित तौर पर सामने आया कि दोनों कर्मचारियों ने अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करते हुए कंपनी की महत्वपूर्ण जानकारी को कॉपी कर अपने साथ ले गए। इसमें तकनीकी जानकारी, उत्पादों के डिजाइन, इंजीनियरिंग ड्रॉइंग, मैन्युफैक्चरिंग से संबंधित जानकारी और उत्पादों के स्पेसिफिकेशन शामिल होने का आरोप लगाया गया है।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कंपनी के ग्राहकों और सप्लायर से संबंधित जानकारी भी कथित तौर पर कॉपी की गई। कंपनी का दावा है कि यह प्रक्रिया एक बार नहीं, बल्कि कई बार की गई और कर्मचारियों ने बिना अनुमति कंपनी की जानकारी अपने कब्जे में ली।

कंपनी प्रतिनिधि के अनुसार, इस जानकारी का कथित दुरुपयोग कर आरोपियों ने व्यक्तिगत लाभ हासिल करने का प्रयास किया और इससे कंपनी को आर्थिक एवं कारोबारी नुकसान हुआ। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि राजेंद्र चौहान ने कंपनी में नौकरी करते हुए ‘वोल्टेरिक्स ऑटोमोटिव’ नाम से एक अलग कारोबार शुरू किया और वर्तमान में खुद को उस कंपनी का सीईओ बताता है।

पुलिस के मुताबिक, शिकायत के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब मामले से जुड़े दस्तावेजों, कंपनी की शिकायत में बताए गए तकनीकी और कारोबारी रिकॉर्ड तथा अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस का कहना है कि मामले में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। फिलहाल मुकदमा दर्ज होने के बाद मामले की जांच जारी है।

Naval Cooperation: नौसेना प्रमुख मॉरीशस दौरे पर, समुद्री सहयोग और रक्षा साझेदारी होगी मजबूत

Naval Cooperation: नौसेना प्रमुख मॉरीशस दौरे पर, समुद्री सहयोग और रक्षा साझेदारी होगी मजबूत

नई दिल्ली, 10 अगस्त: हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन 10 से 13 अगस्त तक चार दिवसीय आधिकारिक दौरे पर मॉरीशस पहुंचे हैं। नौसेना प्रमुख बनने के बाद मॉरीशस की यह उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है। इस दौरान दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, क्षमता निर्माण और सैन्य सहयोग से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की समुद्री गतिविधियां और रणनीतिक मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। भारत के लिए मॉरीशस हिंद महासागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदार है। ऐसे में दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग को और मजबूत करना क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दौरे के दौरान एडमिरल स्वामीनाथन मॉरीशस के वरिष्ठ सरकारी नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में दोनों देशों के बीच मौजूदा रक्षा संबंधों की समीक्षा के साथ भविष्य में सहयोग को और व्यापक बनाने के उपायों पर चर्चा होगी। विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और सैन्य सहयोग को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है।

भारत और मॉरीशस लंबे समय से समुद्री क्षेत्र में एक-दूसरे के महत्वपूर्ण साझेदार रहे हैं। दोनों देशों के बीच संयुक्त विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी ईईजेड की निगरानी, प्रशिक्षण गतिविधियों, बंदरगाह यात्राओं और हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग जारी है। इन गतिविधियों के जरिए समुद्री क्षेत्र की निगरानी और सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलती है।

मॉरीशस भारतीय नौसेना की कई महत्वपूर्ण बहुपक्षीय और क्षेत्रीय पहलों में भी भागीदार है। इनमें इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम यानी आईओएनएस, मिलन, आईओएस सागर और एकम जैसी पहल शामिल हैं। इन मंचों के जरिए हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच समुद्री सहयोग, आपसी समन्वय और क्षमता निर्माण को बढ़ावा दिया जाता है।

भारत की हिंद महासागर नीति में मॉरीशस को विशेष महत्व प्राप्त है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं। समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ता सहयोग इन संबंधों को नई मजबूती दे रहा है। नौसेना प्रमुख का दौरा दोनों देशों के रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ समुद्री क्षेत्र में साझा हितों को मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगा।

दौरे के दौरान क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है। प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग के जरिए मॉरीशस की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में भारत लगातार सहयोग करता रहा है। ऐसे में इस यात्रा से दोनों देशों के बीच रक्षा और समुद्री सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान होने की उम्मीद है।

 

Independence Day: लाल किले से पहली बार गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’, 80वें स्वतंत्रता दिवस पर दिखेगा युवा शक्ति और विकसित भारत का संदेश

Independence Day: लाल किले से पहली बार गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’, 80वें स्वतंत्रता दिवस पर दिखेगा युवा शक्ति और विकसित भारत का संदेश

नई दिल्ली, 10 अगस्त: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इस बार लाल किले में होने वाला स्वतंत्रता दिवस समारोह देश की ऐतिहासिक विरासत और विकसित भारत के भविष्य के संकल्प का अनूठा संगम पेश करेगा। 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से पहली बार ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद देश को संबोधित करेंगे।

इस वर्ष के समारोह में देश की युवा शक्ति, नवाचार, आत्मनिर्भरता और विकसित भारत के लक्ष्य को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। समारोह में लगभग 5,000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। इनमें युवा इनोवेटर, स्टार्टअप से जुड़े लोग, किसान, कारीगर, महिला उद्यमी, वैज्ञानिक, सफाईकर्मी, अस्पतालों के कर्मचारी और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थी शामिल होंगे।

‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में समारोह में विशेष आयोजन किया जाएगा। इस दौरान करीब 2,500 एनसीसी कैडेट और माई भारत स्वयंसेवक ज्ञानपथ पर ‘वंदे मातरम्’ की आकृति बनाएंगे। यह प्रस्तुति देश के युवाओं की भागीदारी और राष्ट्रीय भावना को प्रदर्शित करेगी।

स्वतंत्रता दिवस समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी विशेष महत्व दिया गया है। देशभर से 19 अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड पदक विजेता छात्रों को विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया है। इन विद्यार्थियों की उपलब्धियों को देश की युवा प्रतिभा और ज्ञान आधारित विकास की मिसाल के तौर पर प्रस्तुत किया जाएगा।

समारोह का प्रभाव केवल लाल किले तक सीमित नहीं रहेगा। देशभर में 343 स्थानों पर सैन्य बैंड ‘वंदे मातरम्’ की धुन बजाकर देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का संदेश देंगे। इस आयोजन के जरिए स्वतंत्रता दिवस को देश के अलग-अलग हिस्सों में व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

इस बार का समारोह भारत की स्वतंत्रता की ऐतिहासिक यात्रा के साथ-साथ आने वाले वर्षों के राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी रेखांकित करेगा। युवा प्रतिभाओं, किसानों, महिलाओं, वैज्ञानिकों, कारीगरों और विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले नागरिकों को विशेष अतिथि के रूप में शामिल करना इस बात को दर्शाता है कि राष्ट्र निर्माण में समाज के हर वर्ग की भूमिका महत्वपूर्ण है।

लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण होगा। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने वाले इस गीत के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया जा रहा यह आयोजन ऐतिहासिक महत्व रखता है।

प्रधानमंत्री के संबोधन के साथ देश की उपलब्धियों, वर्तमान प्राथमिकताओं और भविष्य के संकल्पों का संदेश भी सामने आएगा। 80वें स्वतंत्रता दिवस का यह समारोह भारत की विरासत, युवा ऊर्जा और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ते देश की तस्वीर प्रस्तुत करने के लिए तैयार किया जा रहा है।

PM-Yashasvi scheme: पीएम-यशस्वी योजना की निगरानी तेज, छात्रवृत्ति कवरेज सुधारने पर केंद्र का जोर

PM-Yashasvi scheme: पीएम-यशस्वी योजना की निगरानी तेज, छात्रवृत्ति कवरेज सुधारने पर केंद्र का जोर

नई दिल्ली, 10 अगस्त: महाराष्ट्र में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (ईबीसी) और विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू जनजाति (डीएनटी) वर्ग के विद्यार्थियों तक छात्रवृत्ति का लाभ बेहतर तरीके से पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने पीएम-यशस्वी योजना की निगरानी और सुधारात्मक कदम तेज कर दिए हैं। सरकार का फोकस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ पात्र विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने और कवरेज में मौजूद कमियों को दूर करने पर है।

योजना के क्रियान्वयन की प्रगति की नियमित समीक्षा की जा रही है। इसके लिए मासिक वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित करने के साथ क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर भी समीक्षा की जा रही है। इन बैठकों के माध्यम से राज्यों में योजना की स्थिति, विद्यार्थियों के आवेदन, संस्थानों की भूमिका, आवेदन के सत्यापन और छात्रवृत्ति वितरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की निगरानी की जा रही है।

सरकार के अनुसार, महाराष्ट्र को वर्ष 2025-26 से ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी विद्यार्थियों के लिए प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे विद्यार्थियों के आवेदन और छात्रवृत्ति प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मदद मिल रही है।

प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत महाराष्ट्र के लिए वर्ष 2025-26 में 19.40 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। यह राशि वर्ष 2024-25 में जारी किए गए 5.56 करोड़ रुपये की तुलना में काफी अधिक है। सरकार का कहना है कि बढ़ी हुई राशि के जरिए अधिक पात्र विद्यार्थियों को योजना का लाभ उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।

छात्रवृत्ति कवरेज को बढ़ाने के लिए सरकार ने जागरूकता अभियान पर भी जोर दिया है। पात्र विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को योजना की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ शैक्षणिक संस्थानों के साथ समन्वय मजबूत किया जा रहा है, ताकि आवेदन प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी न आए। इसके अलावा आवेदन और उनके प्रमाणीकरण की प्रक्रिया की नियमित निगरानी की जा रही है।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना के लिए पात्र कोई भी विद्यार्थी केवल जानकारी के अभाव, आवेदन प्रक्रिया में कमी या संस्थागत स्तर पर समन्वय की कमी के कारण छात्रवृत्ति के लाभ से वंचित न रहे। निगरानी व्यवस्था को मजबूत किए जाने से योजना के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं की पहचान कर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलेगी।

महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य में बड़ी संख्या में विद्यार्थी छात्रवृत्ति योजनाओं पर निर्भर हैं। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय आवंटन बढ़ाने के साथ-साथ योजना की निगरानी को प्राथमिकता देना छात्रवृत्ति कवरेज बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

Longevity Science: उम्र बढ़े, शरीर रहे जवान, एम्स में लॉन्जिविटी साइंस पर मंथन, हेल्थस्पैन बढ़ाने पर जोर

Longevity Science: उम्र बढ़े, शरीर रहे जवान, एम्स में लॉन्जिविटी साइंस पर मंथन, हेल्थस्पैन बढ़ाने पर जोर

नई दिल्ली, 10 अगस्त: इंसान की उम्र बढ़ना प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन शरीर किस गति से बूढ़ा होता है और बढ़ती उम्र में व्यक्ति कितने लंबे समय तक स्वस्थ, सक्रिय और आत्मनिर्भर रह सकता है, इस पर अब चिकित्सा विज्ञान गंभीरता से काम कर रहा है। लॉन्जिविटी साइंस का उद्देश्य केवल इंसान की आयु बढ़ाना नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन के वर्षों यानी ‘हेल्थस्पैन’ को बढ़ाना है।

इसी विषय पर सोमवार को एम्स दिल्ली में ‘इंटीग्रेटिव वर्कशॉप ऑन द साइंस एंड आर्ट ऑफ लॉन्जिविटी’ का आयोजन किया गया। इसमें विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने स्वस्थ उम्र बढ़ने की प्रक्रिया, शरीर में उम्र से जुड़े बदलावों, जीवनशैली, जैविक उम्र और नई चिकित्सा तकनीकों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

विशेषज्ञों ने जोर दिया कि लंबी जिंदगी का वास्तविक महत्व तभी है, जब व्यक्ति अधिक उम्र में भी शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहे और रोजमर्रा के कामों के लिए दूसरों पर निर्भर न हो। मेडिकल साइंस में इसी अवधारणा को ‘हेल्थस्पैन’ कहा जाता है। यानी व्यक्ति कितने साल जीवित रहता है, इसके साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि वह कितने वर्षों तक स्वस्थ और सक्रिय रहता है।

एम्स के नेशनल सेंटर फॉर एजिंग और बायोफिजिक्स विभाग के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में उम्र बढ़ने की जैविक प्रक्रिया से लेकर जीवनशैली और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों तक पर चर्चा की गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि उम्र बढ़ने के दौरान शरीर में कई स्तरों पर बदलाव होते हैं, जिनका असर व्यक्ति की सेहत और कार्यक्षमता पर पड़ सकता है।

कार्यशाला में ‘जॉम्बी सेल’ यानी सेनेसेंट कोशिकाओं पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों के अनुसार उम्र बढ़ने के साथ शरीर में ऐसी कोशिकाएं जमा हो सकती हैं, जो सामान्य तरीके से काम नहीं करतीं और शरीर में सूजन बढ़ाने वाली प्रक्रियाओं में भूमिका निभा सकती हैं। इन कोशिकाओं को निशाना बनाने वाली सिनोलिटिक दवाओं पर अभी शोध और क्लिनिकल ट्रायल चल रहे हैं। हालांकि, इनके व्यापक चिकित्सीय इस्तेमाल को लेकर अभी और वैज्ञानिक प्रमाणों की आवश्यकता है।

जैविक उम्र का आकलन भी लॉन्जिविटी साइंस का महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभर रहा है। एपिजेनेटिक क्लॉक जैसी तकनीकों के माध्यम से यह समझने की कोशिश की जा रही है कि किसी व्यक्ति का शरीर उसकी वास्तविक उम्र की तुलना में कितनी तेजी से बूढ़ा हो रहा है। इससे भविष्य में उम्र से जुड़ी बीमारियों के जोखिम और स्वस्थ उम्र बढ़ने की रणनीतियों को समझने में मदद मिल सकती है।

विशेषज्ञों ने स्वस्थ उम्र बढ़ने के लिए रोजमर्रा की जीवनशैली को सबसे महत्वपूर्ण आधारों में से एक बताया। डॉ. अविनाश चक्रवर्ती, डॉ. एबी डे, डॉ. प्रमोद के मेहता और डॉ. ज्योतिर्मोय बनर्जी ने नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित रखने को स्वस्थ उम्र बढ़ने की बुनियाद बताया।

विशेषज्ञों के अनुसार सप्ताह में करीब 150 मिनट मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि और कम से कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है। इसके साथ संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन को लंबे समय तक स्वस्थ रहने के लिए महत्वपूर्ण माना गया।

कार्यशाला में ‘एंटी-एजिंग’ के नाम पर बाजार में उपलब्ध विभिन्न उपचारों और तकनीकों को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई। विशेषज्ञों ने कहा कि स्टेम सेल, पेप्टाइड्स और कई नई दवाओं पर शोध जारी है, लेकिन हर उपचार या तकनीक वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है। कई विकल्प अभी शोध और क्लिनिकल परीक्षण के चरण में हैं।

विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी कि केवल ‘एंटी-एजिंग’ के दावों के आधार पर किसी उपचार या दवा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। किसी भी तरह के चिकित्सा उपचार को अपनाने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

डॉ. शर्मिष्ठा डे ने कहा कि बुढ़ापे को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन स्वस्थ बुढ़ापे की तैयारी आज से शुरू की जा सकती है। लॉन्जिविटी साइंस का मूल उद्देश्य भी यही है कि बढ़ती उम्र के साथ व्यक्ति की गुणवत्ता वाली जिंदगी लंबे समय तक बनी रहे और वह अधिक वर्षों तक स्वस्थ, सक्रिय तथा आत्मनिर्भर रह सके।

Liver Disease: लिवर की बीमारी की जांच में AI का बढ़ेगा दखल, डिजिटल पैथोलॉजी से निदान में आएगी तेजी

Liver Disease: लिवर की बीमारी की जांच में AI का बढ़ेगा दखल, डिजिटल पैथोलॉजी से निदान में आएगी तेजी

नई दिल्ली, 10 अगस्त: लिवर, पित्त की नली और अग्न्याशय से जुड़ी बीमारियों की जांच और निदान को अधिक सटीक और तेज बनाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल पैथोलॉजी की भूमिका आने वाले समय में और बढ़ सकती है। इसी संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बायलरी साइंसेज (आईएलबीएस) में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान विस्तार से चर्चा की।

आईएलबीएस में 7 से 9 अगस्त तक हेपेटो-पैंक्रिएटो-बिलियरी (एचपीबी) पैथोलॉजी पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें देश और विदेश से पहुंचे विशेषज्ञों ने लिवर, बाइलरी ट्रैक्ट और पैंक्रियाज से जुड़ी बीमारियों की आधुनिक जांच तकनीकों पर विचार-विमर्श किया। कार्यशाला में डिजिटल पैथोलॉजी, होल-स्लाइड इमेजिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्लीनिकल इस्तेमाल को प्रमुखता से शामिल किया गया।

विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल पैथोलॉजी के जरिए पैथोलॉजी स्लाइड को डिजिटल रूप में स्कैन कर उनका विस्तृत विश्लेषण किया जा सकता है। इससे विशेषज्ञों को जटिल मामलों में जांच के दौरान अधिक जानकारी उपलब्ध हो सकती है। वहीं, एआई आधारित तकनीक बड़ी मात्रा में मेडिकल इमेज और पैटर्न का विश्लेषण करने में मदद कर सकती है।

कार्यशाला में डिजिटल स्कैनर वर्कफ्लो और एआई की बुनियादी जानकारी से लेकर हेपेटिक और कोलेस्टेटिक पैथोलॉजी, बाइलरी-पैंक्रियाटिक ट्यूमर, एचपीबी साइटोलॉजी, लिवर ट्यूमर और ट्रांसप्लांट पैथोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए।

कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण 15वीं डॉ. वी. रामालिंगस्वामी ऑरेशन रहा। यह व्याख्यान सिंगापुर के नेशनल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल की डॉ. ग्वेनेथ सून ने दिया। उन्होंने एमएएसएलडी और एमएएसएच की ग्रेडिंग तथा स्टेजिंग में एआई आधारित डिजिटल पैथोलॉजी की संभावित भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि आधुनिक डिजिटल तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। इमेज जे/फिजी और गूगल कोलाब जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से होल-स्लाइड इमेजिंग और एआई टूल्स के इस्तेमाल की जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य विशेषज्ञों और प्रतिभागियों को भविष्य में पैथोलॉजी के क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली तकनीकों के लिए तैयार करना था।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल पैथोलॉजी और एआई के बेहतर इस्तेमाल से बीमारी की पहचान और निदान की सटीकता में सुधार किया जा सकता है। इसके साथ ही मेडिकल रिसर्च को भी नई गति मिल सकती है। तकनीक के विस्तार से जटिल मामलों में विशेषज्ञों के बीच सहयोग और डिजिटल स्तर पर जांच की प्रक्रिया को भी मजबूत किया जा सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि एआई चिकित्सा विशेषज्ञों का विकल्प नहीं बल्कि उनकी सहायता करने वाली तकनीक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके प्रभावी इस्तेमाल के लिए उच्च गुणवत्ता वाले डेटा, प्रशिक्षित विशेषज्ञों और मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी। आने वाले समय में एआई और डिजिटल पैथोलॉजी का क्लीनिकल इस्तेमाल बढ़ने के साथ लिवर और एचपीबी रोगों की जांच में इसके प्रभाव को और बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।

 

Haryana Welfare Scheme: मुख्यमंत्री ने 50 लाख से अधिक लाभार्थियों के खातों में डाली 1,595 करोड़ रुपये से अधिक की राशि

Haryana Welfare Scheme: मुख्यमंत्री ने 50 लाख से अधिक लाभार्थियों के खातों में डाली 1,595 करोड़ रुपये से अधिक की राशि

दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना की 10वीं किस्त के रूप में 9.98 लाख बहन-बेटियों को 209.62 करोड़ रुपये जारी

सामाजिक सुरक्षा पेंशन, दयालु योजना, हर घर-हर गृहिणी और हरित खाद योजना के तहत भी सीधे खातों में पहुंची सहायता राशि

रिपोर्ट : कोमल रमोला

चंडीगढ़ , 10 अगस्त – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को प्रदेश के लाखों परिवारों को बड़ी सौगात देते हुए विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत 50,04,873 पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 1,595 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि सीधे हस्तांतरित की। सरकार ने यह राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजकर पारदर्शी और सुशासन आधारित व्यवस्था को और मजबूत किया है।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विशेष रूप से दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना की 10वीं किस्त जारी की। इस किस्त के तहत 9,98,000 बहन-बेटियों के खातों में 209 करोड़ 62 लाख रुपये की राशि डाली गई। इसके साथ ही अब तक इस योजना के तहत 10 किस्तों में 2,042 करोड़ 31 लाख रुपये की राशि लाभार्थियों को दी जा चुकी है।

लाडो लक्ष्मी योजना की आय सीमा बढ़कर 1.80 लाख रुपये होगी

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार ने गत 25 सितंबर को पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी के 109वें जन्मदिवस के अवसर पर ‘दीन दयाल लाडो लक्ष्मी’ ऐप का शुभारंभ किया था और इसके लिए पहले ही साल के बजट में 5,000 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया था। उन्होंने कहा कि इस वर्ष पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी के जन्मदिवस पर इस योजना के लिए निर्धारित आय सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 लाख 80 हजार रुपये किया जाएगा। उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष के बजट में लाडो लक्ष्मी योजना के लिए 6,500 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इससे अधिक पात्र महिलाओं को योजना का लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।

मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि सितंबर माह से 1.80 लाख रुपये सालाना आय वाले परिवारों की बहन-बेटियां भी दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना के लिए अपना पंजीकरण करवाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस योजना का लाभ ले रही किसी भी माता-बहन-बेटी को मिल रहे किसी अन्य योजना के लाभ को रोका नहीं जाएगा। इसके लिए विपक्ष के बहकावे में आने की जरूरत नहीं है।

34.93 लाख लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन की 1,124.94 करोड़ रुपये की राशि

मुख्यमंत्री ने 15 सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत 34,93,978 लाभार्थियों के खातों में 1,124 करोड़ 94 लाख रुपये की राशि भी सीधे हस्तांतरित की। इसमें वृद्धावस्था सम्मान भत्ता, दिव्यांग भत्ता तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में बदलाव करते हुए सरकार ने ‘प्रो-एक्टिव मॉडल’ अपनाया है। इसके तहत परिवार पहचान पत्र के डेटाबेस के आधार पर पात्रता स्वतः निर्धारित होती है और पात्र नागरिकों को बिना दफ्तरों के चक्कर लगाए तथा बिना आवेदन किए घर बैठे ही भत्ते का लाभ मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से किया जा रहा यह भुगतान सरकार की पारदर्शिता और सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि सरकारी सहायता समयबद्ध तरीके से सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचे।

दयालु’ योजना के तहत 6,224 परिवारों को 234.77 करोड़ रुपये की सहायता

मुख्यमंत्री ने ‘दयालु’ योजना के तहत आज 6,224 परिवारों को 234 करोड़ 77 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। आज जारी राशि को मिलाकर अब तक 83,536 परिवारों को 3,152 करोड़ 48 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 11 सितंबर से ‘दयालु योजना-2’ लागू की गई है। इसका उद्देश्य कुत्ते के काटने तथा गाय, सांड़, बैल, गधे, कुत्ते, नीलगाय, भैंस आदि पशुओं के हमलों से होने वाली आकस्मिक मृत्यु, दिव्यांगता अथवा चोट लगने की स्थिति में प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाना है।

4.93 लाख बहनों के खातों में ‘हर घर-हर गृहिणी’ योजना की सब्सिडी

मुख्यमंत्री ने हर घर-हर गृहिणी योजना के तहत 4,93,434 बहनों के बैंक खातों में जून माह की 19.17 करोड़ रुपये की सब्सिडी भी हस्तांतरित की। उन्होंने बताया कि चुनाव के समय किया गया वादा निभाते हुए पात्र महिलाओं को हर महीने 500 रुपये में गैस सिलेंडर उपलब्ध करवाया जा रहा है। आज जारी राशि को मिलाकर अब तक 15,06,364 पात्र बहनों के बैंक खातों में कुल 340 करोड़ 14 लाख रुपये की राशि डाली जा चुकी है।

13,237 किसानों को हरित खाद अपनाने के लिए 7 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

मुख्यमंत्री ने किसानों को पर्यावरण अनुकूल खेती के लिए प्रोत्साहित करते हुए 13,237 किसानों के खातों में 7 करोड़ रुपये की राशि हस्तांतरित की। यह राशि खरीफ 2026-27 में 70 हजार एकड़ क्षेत्र में ढैंचा एवं मूंग को हरित खाद के रूप में अपनाने के लिए जारी की गई है।

उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य प्रदेश में फसल विविधीकरण और जल संरक्षण को बढ़ावा देना है। हरित खाद से मृदा स्वास्थ्य में सुधार, मिट्टी में नाइट्रोजन और जैविक पदार्थ की मात्रा में वृद्धि तथा जल धारण क्षमता में बढ़ोतरी होगी। साथ ही किसानों की रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी। पात्र किसानों को हरित खाद की खेती अपनाने के लिए 1,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। किसानों का पंजीकरण मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल के माध्यम से किया जाता है और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार फसल का सत्यापन किया जाता है।

70 हजार एकड़ में हरित खाद फसलों का सत्यापन

श्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि खरीफ 2026 के दौरान 5,844 किसानों द्वारा 36 हजार 670 एकड़ क्षेत्र में ढैंचा की खेती का सत्यापन हुआ है। इसी प्रकार 7,393 किसानों द्वारा 33 हजार 330 एकड़ क्षेत्र में मूंग एवं अन्य हरित खाद फसलों की खेती का सत्यापन किया गया है। इस प्रकार खरीफ 2026 के दौरान कुल 13 हजार 237 किसानों द्वारा 70 हजार एकड़ क्षेत्र में हरित खाद फसलों का सत्यापन किया जा चुका है।