Bioenergy Expo: बायोएनर्जी एक्सपो में कल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने की संभावना, ग्रामीण रोजगार और किसानों की आय पर रहेगा फोकस

Bioenergy Expo: बायोएनर्जी एक्सपो में कल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने की संभावना, ग्रामीण रोजगार और किसानों की आय पर रहेगा फोकस

नोएडा। इंडिया एक्सपो मार्ट में 11 से 13 अगस्त तक आयोजित होने वाले इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो में बुधवार, 12 अगस्त को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई केंद्रीय मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है। मुख्यमंत्री के संभावित दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री का आधिकारिक कार्यक्रम अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है, लेकिन जिलास्तर पर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो का उद्देश्य उत्तर प्रदेश की कृषि और पशुधन आधारित अर्थव्यवस्था को बायोएनर्जी क्षेत्र से जोड़ना है। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने, किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने तथा जैविक कचरे के बेहतर इस्तेमाल की संभावनाओं पर चर्चा होगी। अधिकारियों के मुताबिक, एक्सपो में इस बात पर विशेष जोर दिया जाएगा कि बायोएनर्जी को गांवों में स्थानीय उद्यम और रोजगार का माध्यम कैसे बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम में 12 अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और उत्तर प्रदेश सरकार के ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री एके शर्मा के शामिल होने की संभावना है। मुख्यमंत्री के आधिकारिक कार्यक्रम का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन संभावित वीआईपी दौरे को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

एक्सपो में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, निवेशकों, तकनीकी कंपनियों और शोधकर्ताओं की भागीदारी होगी। इसमें भारत में बायोएनर्जी क्षेत्र की संभावनाओं, नई तकनीकों, निवेश और ग्रामीण स्तर पर परियोजनाओं के विस्तार को लेकर मंथन किया जाएगा। उत्तर प्रदेश में गांव और क्लस्टर स्तर पर रोजगार सृजन को लेकर विशेष चर्चा होने की संभावना है।

केंद्र सरकार की गोबरधन पहल के तहत पशुओं के गोबर, कृषि अवशेष और अन्य जैविक कचरे से बायोगैस, कंप्रेस्ड बायोगैस और जैविक खाद तैयार करने की संभावनाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर भी जोर रहेगा। विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों के सामने यह मॉडल रखा जाएगा कि गांवों में उपलब्ध जैविक संसाधनों का इस्तेमाल ऊर्जा उत्पादन और आय के स्रोत के रूप में कैसे किया जा सकता है।

अधिकारियों के मुताबिक, गांव और क्लस्टर स्तर पर स्थापित की जाने वाली बायोएनर्जी परियोजनाएं किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बन सकती हैं। इन परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर रोजगार भी पैदा होने की संभावना है। ग्रामीण युवा प्लांट ऑपरेटर, तकनीशियन और विभिन्न सेवाओं से जुड़े कर्मचारी के रूप में काम कर सकते हैं। वहीं, स्वयं सहायता समूह और स्थानीय उद्यमी जैविक कचरे के संग्रह, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन जैसे कार्यों से जुड़ सकते हैं।

इस मॉडल के तहत किसानों और पशुपालकों से निकलने वाले गोबर और कृषि अवशेष जैसे जैविक कचरे को गांव में ही एकत्र कर उसका उपयोग ऊर्जा और जैविक खाद तैयार करने में किया जा सकता है। इससे एक तरफ कचरे के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी तो दूसरी ओर ऊर्जा, खाद और स्थानीय बाजार को जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आय का नया चक्र विकसित किया जा सकता है।

एक्सपो में बायोएनर्जी परियोजनाओं के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता, आधुनिक तकनीक और नीतिगत ढांचे पर भी चर्चा होगी। निवेशकों और तकनीकी कंपनियों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे और मध्यम स्तर की परियोजनाओं को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। इससे ग्रामीण युवाओं और स्थानीय उद्यमियों के लिए नए कारोबारी अवसर विकसित हो सकते हैं।

उत्तर प्रदेश में कृषि और पशुधन का बड़ा आधार होने के कारण बायोएनर्जी के क्षेत्र में राज्य के पास व्यापक संभावनाएं हैं। कृषि अवशेष और पशुधन से निकलने वाले जैविक कचरे का उपयोग यदि व्यवस्थित तरीके से किया जाए तो इससे ऊर्जा उत्पादन के साथ पर्यावरणीय लाभ भी हासिल किए जा सकते हैं। एक्सपो में इसी तरह की संभावनाओं को उद्योग, सरकार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बीच जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।

सरकार की ओर से ग्रामीण उद्यमिता, किसानों की आय और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बायोएनर्जी को एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। एक्सपो के दौरान होने वाली चर्चाओं और संभावित निवेश से उत्तर प्रदेश को ग्रामीण बायोएनर्जी और सर्कुलर इकोनॉमी के क्षेत्र में प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में नई संभावनाएं सामने आ सकती हैं।

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