Noida Crime: नाइजीरियन ड्रग तस्कर के वीजा की जांच में जुटी आईबी, दूतावास से मांगी जानकारी

Noida Crime: नाइजीरियन ड्रग तस्कर के वीजा की जांच में जुटी आईबी, दूतावास से मांगी जानकारी
नोएडा। ग्रेटर नोएडा की बीटा-2 कोतवाली पुलिस द्वारा करीब 15 लाख रुपये की सिंथेटिक ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किए गए नाइजीरियन नागरिक चिडुबेम स्टेनली के मामले की जांच अब और गहरी हो गई है। आरोपी के वीजा और भारत में वैध रूप से रहने की स्थिति की जांच अब खुफिया एजेंसी (आईबी) ने अपने हाथ में ले ली है। प्रारंभिक जांच में आरोपी लगातार वीजा और पासपोर्ट को लेकर विरोधाभासी जानकारी देता रहा, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों को उस पर संदेह हुआ।
पुलिस के अनुसार, चिडुबेम स्टेनली दिल्ली में रहकर एनसीआर के विभिन्न इलाकों में सिंथेटिक ड्रग्स की सप्लाई करता था। वह ग्रेटर नोएडा के बीटा-2 क्षेत्र में ड्रग्स की खेप पहुंचाने आया था, जहां पुलिस ने उसे दो अन्य आरोपियों के साथ गिरफ्तार कर लिया। तीनों के कब्जे से करीब 15 लाख रुपये कीमत की सिंथेटिक ड्रग्स बरामद की गई थी।
पूछताछ के दौरान जब पुलिस ने आरोपी से उसका पासपोर्ट और वीजा मांगा तो वह हर बार अलग-अलग बयान देता रहा। कभी उसने दावा किया कि उसका वीजा चोरी हो गया है, तो कभी कहा कि उसके दस्तावेज कहीं गुम हो गए हैं। लगातार बदलते बयानों के कारण पुलिस को आशंका हुई कि आरोपी जांच को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए खुफिया एजेंसी आईबी को जांच में शामिल किया गया। आईबी अधिकारियों ने भी आरोपी से विस्तृत पूछताछ की, लेकिन वह अपने वीजा से संबंधित कोई ठोस जानकारी नहीं दे सका। जांच एजेंसियों को आशंका है कि उसका वीजा समाप्त हो चुका है और वह अवैध रूप से भारत में रहकर मादक पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क का संचालन कर रहा था।
वीजा की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए आईबी ने नाइजीरिया के दूतावास से भी आधिकारिक जानकारी मांगी है। इसके साथ ही आरोपी के भारत में प्रवेश, वीजा अवधि और अन्य दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा रहा है।
दूसरी ओर बीटा-2 पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन की फोरेंसिक और डिजिटल जांच भी कर रही है। साइबर सेल की मदद से कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), व्हाट्सएप चैट, सोशल मीडिया गतिविधियों और डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने का प्रयास किया जा रहा है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे ड्रग्स नेटवर्क का खुलासा हो सकेगा।
पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों को सिंथेटिक ड्रग्स की सप्लाई कहां से होती थी, किन-किन लोगों तक इसकी आपूर्ति की जाती थी और एनसीआर सहित अन्य राज्यों में इस गिरोह का नेटवर्क कितना फैला हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।





