दिल्ली

HPV Test India: भारत को मिली बड़ी सफलता, स्वदेशी HPV टेस्ट से सस्ती और आसान होगी सर्वाइकल कैंसर की जांच

HPV Test India: भारत को मिली बड़ी सफलता, स्वदेशी HPV टेस्ट से सस्ती और आसान होगी सर्वाइकल कैंसर की जांच

नई दिल्ली, 10 जून। सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम और समय पर पहचान के क्षेत्र में भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। देश में विकसित स्वदेशी पॉइंट-ऑफ-केयर (पीओसी) एचपीवी डीएनए टेस्ट को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मानकों पर सफलतापूर्वक खरा उतरने के बाद मंजूरी मिल गई है। इस नई तकनीक से महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती और सटीक पहचान पहले की तुलना में अधिक आसान, तेज और किफायती हो सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारत के कैंसर नियंत्रण अभियान को नई गति देगी। कम लागत वाली इस तकनीक के कारण स्क्रीनिंग सेवाएं अधिक व्यापक और सुलभ बनेंगी, जिससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों की महिलाओं को भी समय पर जांच और उपचार का लाभ मिल सकेगा।

इस दिशा में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली ने आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च, आईसीएमआर-एनआईआरआरसीएच मुंबई तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (फ्रांस) के सहयोग से चार भारतीय एचपीवी परीक्षण प्लेटफॉर्म का मूल्यांकन किया था। अध्ययन के दौरान दो स्वदेशी परीक्षणों को राष्ट्रीय स्क्रीनिंग कार्यक्रम में उपयोग के लिए उपयुक्त पाया गया।

अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता और एम्स के राष्ट्रीय कैंसर संस्थान की प्रोफेसर एमिरेट्स डॉ. नीरजा भाटला ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप विकसित ये स्वदेशी परीक्षण कम लागत, सरल संचालन और जिला स्तर की स्वास्थ्य सुविधाओं में उपयोग के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगे। उन्होंने कहा कि ये तकनीकें वैश्विक स्तर पर उपलब्ध महंगे परीक्षणों के बराबर सटीकता प्रदान करती हैं। उन्होंने महिलाओं को सलाह दी कि सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए 35 वर्ष और 45 वर्ष की आयु में कम से कम दो बार स्क्रीनिंग अवश्य करानी चाहिए।

आईसीएमआर-एनआईसीपीआर की निदेशक डॉ. शालिनी सिंह के अनुसार, एचपीवी डीएनए परीक्षण विश्व स्वास्थ्य संगठन की सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन रणनीति का प्रमुख हिस्सा है। हालांकि अब तक महंगे परीक्षणों के कारण इसकी पहुंच सीमित रही है। ऐसे में स्वदेशी और किफायती विकल्प स्क्रीनिंग कवरेज बढ़ाने और अधिक महिलाओं तक जांच सुविधा पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में से एक है। हर वर्ष देश में लगभग 1.27 लाख नए मामले सामने आते हैं, जबकि करीब 80 हजार महिलाओं की इस बीमारी के कारण मृत्यु हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच और उपचार के जरिए इन आंकड़ों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। नई तकनीक माइक्रोफ्लूडिक चिप आधारित आरटी-पीसीआर किट और पोर्टेबल टेस्टिंग मशीन पर आधारित है। सरकार द्वारा प्रमाणित ट्रूनेट एचपीवी-एचआर प्लस और पैथोडिटेक्ट जैसी स्वदेशी किट्स इसी तकनीक का उपयोग करती हैं। जांच के दौरान महिला के सर्विक्स से स्वाब नमूना लिया जाता है और उसे विशेष कार्ट्रिज में डालकर पोर्टेबल मशीन में परीक्षण किया जाता है। कुछ ही समय में मशीन कैंसर पैदा करने वाले हाई-रिस्क एचपीवी जीनोटाइप्स की पहचान कर परिणाम उपलब्ध करा देती है।

इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके लिए बड़े और महंगे प्रयोगशाला ढांचे की आवश्यकता नहीं होती। किट में सभी आवश्यक रसायन पहले से मौजूद रहते हैं और इन्हें बिना कोल्ड-चेन सुविधा के भी सुरक्षित रखा जा सकता है। यही वजह है कि यह तकनीक गांवों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और कम संसाधन वाले क्षेत्रों में भी आसानी से उपयोग की जा सकेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्वदेशी नवाचार के जरिए अब गांवों और दूरस्थ इलाकों तक सर्वाइकल कैंसर की जांच पहुंचाना संभव होगा। कम प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी भी इसका संचालन कर सकेंगे, जिससे अधिक से अधिक महिलाओं की समय पर जांच और उपचार सुनिश्चित किया जा सकेगा। यह पहल भारत को सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के लक्ष्य के और करीब ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

Related Articles

Back to top button