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Education and Values: शिक्षा वह शक्ति है, जो मनुष्य के भीतर आत्मविश्वास कर उसके चरित्र का निर्माण करती हैं- मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

Education and Values: शिक्षा वह शक्ति है, जो मनुष्य के भीतर आत्मविश्वास कर उसके चरित्र का निर्माण करती हैं- मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

रिपोर्ट : कोमल रमोला

चंडीगढ़, 8 सितंबर- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हमारे बच्चे अपनी जड़ों से जुड़कर आधुनिक विज्ञान और तकनीक में दुनिया का नेतृत्व करते हुए ब्रह्मलीन स्वामी देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी जी के सपने को साकार कर रहे हैं। उनके हाथों में आधुनिक तकनीक, हृदय में करुणा, दृष्टि विश्वव्यापी होने के साथ- साथ कदम भारत की मिट्टी से जुड़े हैं। ऐसा करके अपनी संस्कृत और मातृभाषा को गौरव प्रदान किया है। आज सभी शिक्षण संस्थाओं में आधुनिकता और भारतीय संस्कारों का जो सुंदर संगम दिखाई देता है, वह इसी दूरदर्शी सोच का विस्तार है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मंगलवार को लाडवा के डीबीएस इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में ब्रह्मलीन देवेंद्र स्वरूप ब्रह्मचारी की 22वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में बोल रहे थे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ऑडिटोरियम हॉल का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शॉल ओढाकर संत महात्माओं का स्वागत व सम्मान किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने महामण्डलेश्वर स्वामी हरि चेनानंद महाराज व प्रोफेसर रमेश कुमार पाण्डेय को अवार्ड से सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी के तप, त्याग, साधना और मानव- कल्याण के संकल्प को प्रणाम है। कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनका जीवन समय की सीमाओं में नहीं बंधता। वे शरीर से हमारे बीच न भी रहें तो भी उनके विचार समाज की चेतना में जीवित रहते हैं। उनकी वाणी मार्ग दिखाती है, उनके कार्य प्रेरणा देते हैं और उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों का चरित्र गढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी जी ऐसे ही दिव्य और विराट व्यक्तित्व थे। उनका जीवन अपने लिए नहीं, समाज के लिए था। उनका ज्ञान प्रदर्शन के लिए नहीं, जनकल्याण के लिए था और उनकी साधना संसार से विमुख होने के लिए नहीं, संसार के दुःख दूर करने के लिए थी।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी ने हमारे धर्म ग्रंथों का गहन अध्ययन किया। उनकी महानता यह थी कि उन्होंने उस ज्ञान को जीवन में उतारा। उन्होंने वेदों के ज्ञान को विद्यालयों तक, गीता के कर्मयोग को जनसेवा तक और भारतीय संस्कृति के संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्रों में कहा गया है ‘सा विद्या या विमुक्तये’, अर्थात् सच्ची विद्या वही है, जो मनुष्य को अज्ञान, भय, संकीर्णता और बंधनों से मुक्त करे। स्वामी इसी विचार के जीवंत प्रतीक थे। वे मानते थे कि शिक्षा केवल अक्षर-ज्ञान या डिग्री प्राप्त करने का साधन नहीं है। शिक्षा वह शक्ति है, जो मनुष्य के भीतर आत्मविश्वास पैदा कर उसके चरित्र का निर्माण करती हैं। कर्तव्य का बोध कराती है और राष्ट्र के प्रति समर्पण पैदा करती है। उनके लिए विद्यालय पढ़ाई के साथ-साथ व्यक्ति निर्माण और राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशाला था। स्वामी जी गुरुकुल शिक्षा पद्धति के प्रबल समर्थक रहे। उन्होंने गुरुकुलों को परंपरागत शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा से जोड़ने का दूरदर्शी प्रयास किया।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि स्वामी जी ने अपने विचारों को केवल उपदेशों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने धर्म व राष्ट्र को सर्वोपरि माना। यहीं नहीं उन्होंने सेवा के संकल्प को संस्थाओं का रूप दिया। उनके मार्गदर्शन में दो संस्कृत महाविद्यालय, तीन वेद विद्यालय, एक कन्या महाविद्यालय और एक विद्यालय सहित अनेक शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना तथा संचालन हो रहा है।

विद्यापीठ वैदिक शिक्षा, संस्कृत, धर्म, संस्कृति और राष्ट्रभाव को बढ़ा रही आगे

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि कुरुक्षेत्र में वर्ष 1977 में स्थापित श्री जयराम विद्यापीठ ने वैदिक शिक्षा, संस्कृत, धर्म, संस्कृति और राष्ट्रभाव को आगे बढ़ाया। इस विद्यापीठ से शिक्षा प्राप्त कर हजारों विद्यार्थी समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में सेवा कर रहे हैं। लोहार माजरा में 22 एकड़ भूमि पर स्थापित सेठ नवरंगराय लोहिया जयराम कन्या महाविद्यालय ने बेटियों की उच्च शिक्षा के लिए नए द्वार खोले। उन्होंने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि जिस समय समाज में बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता नहीं मिलती थी, उस समय स्वामी जी ने नारी शिक्षा और नारी-उत्थान को अपने जीवन के प्रमुख लक्ष्यों में शामिल किया। वे जानते थे कि एक बालक पढ़ता है तो एक व्यक्ति शिक्षित होता है, लेकिन जब एक बेटी पढ़ती है तो दो परिवारों और अनेक पीढ़ियों का भविष्य संवरता है। आज हमारी बेटियां शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, खेल और अंतरिक्ष तक भारत का नाम रोशन कर रही हैं। इस परिवर्तन की नींव स्वामी जी जैसे दूरदर्शी संतों ने बहुत पहले रख दी थी।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि स्वामी जी ने धर्म को केवल पूजा-पद्धति नहीं माना। उनके लिए भूखे को भोजन देना धर्म था, रोगी को उपचार उपलब्ध कराना धर्म था, असहाय का हाथ पकड़ना धर्म था और अज्ञान के अंधकार में ज्ञान का दीपक जलाना धर्म था।

भारत विभाजन के समय कुरुक्षेत्र में शरणार्थियों की स्वामी जी ने की सेवा

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि स्वामी जी के व्यक्तित्व का एक और प्रेरक पक्ष उनकी राष्ट्रीय चेतना थी। भारत विभाजन के समय उन्होंने कुरुक्षेत्र में शरणार्थियों की सेवा की। चीन और पाकिस्तान के आक्रमण के समय जन जागरण किया। हरियाणा के बाढ़ पीड़ितों और उत्तरकाशी के भूकंप पीड़ितों की सहायता की। उन्होंने कहा कि उनका जीवन पर्यावरण और गोसेवा के प्रति समर्पण का भी उदाहरण था।
मां-बाप व गुरु का आदर करने वाले बच्चे को हमेशा मिलती है तरक्की : ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी

श्री जयराम विद्यापीठ के संचालक ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी व अन्य अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि स्वामी देवेन्द्र स्वरूप ब्रह्मचारी ने इंसान बनाने का सपना देखा था, जिसे पूरा करने के लिए अच्छी शिक्षा की महत्वपूर्ण मार्ग है। संस्थान द्वारा अनेक प्रकार के संस्थान खोलकर शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है। इन संस्थानों में शिक्षा, संस्कार, शिक्षा व संस्कृति के माध्यम से उनके सपने को साकार कर रहे हैं। यहां से शिक्षा ग्रहण करके बच्चे देश के किसी न किसी क्षेत्र में सहयोग देंगे। उन्होंने कहा कि गुरु का आशीर्वाद, मां-बाप की कृपा बच्चों पर होनी जरूरी है। युवाओं को अपने मां-बाप व गुरु का आदर मान सम्मान करना चाहिए। ऐसा करने वाला बच्चा हमेशा तरक्की करता है।इस मौके पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा, पूर्व मंत्री जेपी दलाल, पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा, चेयरमैन सुभाष कलसाना, चेयरमैन रविंद्र सांगवान, चेयरमैन गुरनाम सैनी, सहित अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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