Tuesday, 3 November 2026निष्पक्ष खबरें • बेबाक नज़रिया
TOP STORY
THE COMPLETE NEWSROOMखबर पूरी। नज़रिया साफ़।भारत से आपके शहर तक
▤ ई-पेपर पढ़ें ↗
BREAKING NEWS
Lucknow : जेलों की सुरक्षा को मिलेगी इंसास की ताकत, योगी सरकार खरीदेगी 676 राइफलGonda : 2017 से पहले की सरकारें करती थीं वसूली, अब हो रहा विकास, लोग हैं भयमुक्त- कीर्तिवर्धन सिंहHapur News : गुलावठी रोड पर दर्दनाक सड़क हादसा, ऑटो चालक की जान गईDrug Bust Ghaziabad: ऑपरेशन प्रहार के तहत एक करोड़ की स्मैक के साथ चार आरोपी गिरफ्तार, कथित महिला सरगना भी शामिलGreater Noida PNB Protest: ऐच्छर पीएनबी शाखा के बाहर किसानों का प्रदर्शन, 16 खाताधारकों को रकम वापसNew Noida Master Plan: 80 गांवों में जमीन की मैपिंग शुरू, 361 किसानों की सहमतिParthala Mobile Snatching: बाइक टैक्सी से जा रही महिला अधिवक्ता का मोबाइल छीना, जांच शुरूNoida Industrial Lease Dispute: लीज पर दी औद्योगिक संपत्ति को नुकसान और 91 लाख किराया बकाया होने का आरोप

Donkey Route Case: अमेरिका भेजने के नाम पर धोखाधड़ी मामले में दिल्ली के ट्रैवल एजेंट को ED ने गिरफ्तार किया

अमेरिका में अवैध तरीके से लोगों को भेजने वाले कथित ‘डंकी रूट’ नेटवर्क के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने दिल्ली के टिकटिंग और ट्रैवल एजेंट तरुण खोसला को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया है। आरोपी को 23 अक्टूबर 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया गया था। इसके पश्चात उसे जालंधर की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने पूछताछ के लिए 30 अक्टूबर 2026 तक सात दिन की ED हिरासत मंजूर की। जांच एजेंसी का यह आरोप लगाया गया है कि तरुण खोसला अमेरिका जाने के इच्छुक लोगों को अवैध रास्तों से वहां पहुंचाने वाले संगठित नेटवर्क का अहम हिस्सा था और पंजाब तथा हरियाणा के कई एजेंटों के साथ मिलकर काम करता था।

इस मामले की जांच फरवरी 2025 में अमेरिका से 300 से अधिक भारतीय नागरिकों को निर्वासित किए जाने के बाद सामने आए घटनाक्रम से जुड़ी है। अमेरिकी अधिकारियों ने इन भारतीयों को सैन्य विमानों के जरिए भारत वापस भेजा था। इसके पश्चात पंजाब और हरियाणा में विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी और अवैध इमिग्रेशन से संबंधित कई एफआईआर दर्ज की गईं। इन्हीं मामलों के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से पड़ताल शुरू की। एजेंसी ने निर्वासित होकर लौटे लोगों के बयान दर्ज किए और उनसे विदेश जाने के लिए किए गए भुगतान, एजेंटों तथा बैंक खातों से संबंधित जानकारियां जुटाईं।

जांच में सामने आया कि अमेरिका जाने के इच्छुक लोगों को एजेंट और बिचौलिए कानूनी तरीके से विदेश भेजने का भरोसा दिलाते थे, लेकिन कथित तौर पर उन्हें खतरनाक और अवैध ‘डंकी रूट’ से अमेरिका पहुंचाने की व्यवस्था की जाती थी। इस पूरी प्रक्रिया के लिए प्रत्येक व्यक्ति से लगभग 30 लाख से 60 लाख रुपये तक वसूले जाने का आरोप है। एजेंसी के अनुसार, इस नेटवर्क में ट्रैवल एजेंट, स्थानीय बिचौलिए, विदेशों में मौजूद सहयोगी, डंकर, हवाला ऑपरेटर और यात्रियों के ठहरने तथा दूसरे इंतजाम करने वाले लोग शामिल थे।

ED की जांच में तरुण खोसला की भूमिका को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्रकाश में आई हैं। एजेंसी के अनुसार, पंजाब और हरियाणा के अलग-अलग एजेंट अमेरिका जाने के इच्छुक लोगों से पासपोर्ट और पैसे इकट्ठा करते थे और फिर इन्हें दिल्ली में तरुण खोसला तक पहुंचाते थे। इसके पश्चात खोसला दक्षिण अमेरिकी देशों के लिए वीजा और हवाई टिकट की व्यवस्था करता था। इनमें गुयाना, सूरीनाम, इक्वाडोर और अल सल्वाडोर जैसे देश शामिल थे। वहां पहुंचने के बाद लोगों को स्थानीय एजेंटों और डंकरों की मदद से अलग-अलग देशों की सीमाएं पार कराकर मैक्सिको के रास्ते अमेरिका पहुंचाने की कथित व्यवस्था की जाती थी। ED का यह आरोप लगाया गया है कि इस नेटवर्क में रास्ते तय करने से लेकर प्रति व्यक्ति वसूली जाने वाली रकम निर्धारित करने तक में खोसला की अहम भूमिका थी।

जांच एजेंसी ने अपनी पड़ताल में डंकी रूट के जरिए अमेरिका पहुंचने के तीन अलग-अलग रास्तों की पहचान की है। पहले रास्ते में लोगों को हवाई जहाज से अल सल्वाडोर भेजा जाता था। वहां से सड़क मार्ग के जरिए मैक्सिको और फिर तिजुआना के रास्ते अमेरिकी सीमा तक पहुंचाया जाता था। इस रास्ते के लिए कथित तौर पर प्रति व्यक्ति 35 लाख से 40 लाख रुपये तक वसूले जाते थे। दूसरे रास्ते में लोगों को दुबई या अदीस अबाबा के जरिए गुयाना पहुंचाया जाता था। इसके पश्चात ब्राजील, इक्वाडोर, कोलंबिया, पनामा के जंगलों, ग्वाटेमाला और मैक्सिको से होते हुए तिजुआना के रास्ते अमेरिका में प्रवेश कराने की व्यवस्था की जाती थी। इस रूट के लिए प्रति व्यक्ति लगभग 25 लाख से 30 लाख रुपये लेने की बात प्रकाश में आई है।

तीसरे रास्ते का खुलासा अमेरिका से निर्वासित होकर लौटे एक व्यक्ति के बयान के आधार पर हुआ। इस रास्ते में यात्रियों को गुयाना से ब्राजील, बोलीविया, पेरू, कोलंबिया, पनामा, कोस्टा रिका, निकारागुआ, होंडुरास, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला और मैक्सिको से होते हुए अमेरिकी सीमा तक पहुंचाया जाता था। इन रास्तों में कई देशों की सीमाएं पार करनी पड़ती थीं और जंगलों तथा दुर्गम इलाकों से होकर गुजरना पड़ता था। जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय डंकरों और अन्य सहयोगियों की अहम भूमिका थी। कई मामलों में यात्रियों को रास्ते में प्रताड़ित करने, अतिरिक्त पैसे वसूलने और अवैध गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।

ED ने बताया कि तरुण खोसला के जब्त मोबाइल फोन से कई ऐसी चैट मिली हैं, जिनसे कथित नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और काम करने के तरीके की जानकारी मिली। इन चैट से संकेत मिला कि खोसला विदेशों में इमिग्रेशन क्लीयरेंस कराने वाले फिक्सर के रूप में भी काम करता था। वह विदेशी हवाई अड्डों पर यात्रियों को संभालने, टिकटों की व्यवस्था करने, इमिग्रेशन क्लीयरेंस के लिए भुगतान जुटाने और विदेशी संपर्कों के साथ समन्वय करने में भूमिका निभाता था। जांच में ओके टू बोर्ड से जुड़े निर्देशों और एयरलाइन तथा इमिग्रेशन से संबंधित संपर्कों का भी उल्लेख प्रकाश में आया है।

एजेंसी के अनुसार, खोसला के विदेशी डंकरों के साथ भी संपर्क थे। उसकी चैट में मैक्सिको के माइक, ब्राजील के अली और मैक्सिको की क्रिस्टी नामक संपर्कों का जिक्र मिला है। यह आरोप लगाया गया है कि ये लोग अमेरिकी सीमा पार कराने के लिए स्थानीय डंकरों की व्यवस्था और संबंधित भुगतान का प्रबंधन करते थे। इसके अलावा दक्षिण अमेरिकी देशों के वीजा, कथित फर्जी येलो फीवर वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट, हवाई टिकट और यात्रियों की आगे की यात्रा से जुड़े इंतजाम भी किए जाते थे। ED इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है।

इस मामले में ED पहले भी कई चरणों में कार्रवाई कर चुकी है। जुलाई 2025 में एजेंसी ने पंजाब और अन्य स्थानों पर 19 ठिकानों पर तलाशी ली थी। इसी दौरान कई दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, रिकॉर्ड और निकारागुआ तथा इथियोपिया से संबंधित कथित फर्जी इमिग्रेशन और वीजा स्टांप बरामद किए गए थे। इसके पश्चात 15 दिसंबर 2025 को एजेंसी ने कथित अपराध से अर्जित रकम के बराबर लगभग 5.41 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया था। इन संपत्तियों में कृषि भूमि, आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियां तथा बैंक खातों में जमा रकम शामिल थी।

इसके पश्चात 18 और 19 दिसंबर 2025 को पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। इस कार्रवाई में तरुण खोसला से जुड़े व्यावसायिक और आवासीय परिसरों से 4.62 करोड़ रुपये नकद, लगभग 5.9 से 6 किलोग्राम सोना और करीब 313 किलोग्राम चांदी बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई थी। बरामद नकदी, सोने और चांदी की कुल अनुमानित कीमत लगभग 19.14 करोड़ रुपये बताई गई थी। इसके अलावा 50 से अधिक अन्य लोगों के मूल पासपोर्ट, डायरियां, लेन-देन के रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी जांच के दायरे में आए थे।

ED की वित्तीय जांच में तरुण खोसला की प्रोपराइटरशिप फर्म बीजे इंटरनेशनल (BJ International) के बैंक खाते भी जांच के दायरे में आए। एजेंसी के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच इस खाते में 414 नकद क्रेडिट लेन-देन के जरिए कुल 30.38 करोड़ रुपये जमा किए गए थे। जांच एजेंसी इन लेन-देन के स्रोत और कथित अवैध इमिग्रेशन नेटवर्क से उनके संबंधों की पड़ताल कर रही है। एजेंसी का मानना है कि यह नेटवर्क कई वर्षों से संगठित तरीके से काम कर रहा था और लोगों को कानूनी तरीके से अमेरिका भेजने का भरोसा देकर उनसे बड़ी रकम वसूलता था।

अभी ED इस पूरे मामले में अन्य ट्रैवल एजेंटों, बिचौलियों और विदेशों में मौजूद सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के जरिए कितने भारतीय नागरिकों को अवैध रूप से अमेरिका भेजा गया और इससे कितनी रकम अर्जित की गई। तरुण खोसला की गिरफ्तारी को इस कथित नेटवर्क की जांच में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मामले में आगे की कार्रवाई वित्तीय लेन-देन, मोबाइल चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर की जा रही है।

Donkey Route Case, Tarun Khosla Arrest, ED Investigation, Illegal Immigration, US Deportation 2025

इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया

Avatar photo
संवाददाता

Priyanka Singh

संबंधित खबरें