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Constitution Controversy: संविधान की लाल किताब को लेकर राजनीतिक बयानबाजी, राहुल गांधी और विपक्ष पर टिप्पणी

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों पर संविधान, लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने विपक्ष के नेताओं के हाथों में दिखाई देने वाली लाल रंग की संविधान की किताब पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा नीले रंग की संविधान की किताब देखी है, लेकिन अब विपक्ष के नेता लाल किताब लेकर घूम रहे हैं। फडणवीस ने आरोप लगाया कि विपक्ष संविधान बचाने के नाम पर देश की राजनीतिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं को बदलने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों का हवाला देते हुए दावा किया कि भारत में भी इसी तरह की कोशिशें की जा रही हैं।

मुंबई में भाजपा की ओर से आयोजित लोकतंत्र और संविधान बचाओ अभियान के दौरान फडणवीस ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव के जरिए सरकार बदलना पूरी तरह सामान्य प्रक्रिया है। जनता को यह अधिकार है कि वह अपने मताधिकार का इस्तेमाल करके किसी भी सरकार को सत्ता से बाहर कर दूसरी सरकार चुन सके। लेकिन उनके अनुसार, ‘रेजीम चेंज’ का अर्थ केवल सरकार बदलना नहीं, बल्कि देश की राजनीतिक व्यवस्था, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं को बदलना है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल ‘संविधान बचाओ’ के नारे की आड़ में इसी तरह का एजेंडा आगे बढ़ा रहे हैं।

फडणवीस ने कहा कि विपक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति आम लोगों के विश्वास को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है। उनका आरोप था कि पहले इन संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं और फिर उन्हें अप्रभावी तथा अविश्वसनीय बताकर व्यवस्था में बदलाव का माहौल तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान डॉ. भीमराव आंबेडकर की देन है और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था इसी संविधान के आधार पर चलती है। भाजपा इस व्यवस्था और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने साफ कहा कि किसी को भी संविधान और लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इन देशों में राजनीतिक सत्ता और संवैधानिक व्यवस्था में हुए बदलावों के पीछे बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश रही है और इसी तरह की कोशिशें भारत में भी की जा रही हैं। लाल किताब का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता जिस किताब को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं, उसके पीछे देश की व्यवस्था बदलने की मंशा छिपी हुई है। हालाँकि, ये सभी दावे फडणवीस के राजनीतिक आरोप हैं और विपक्ष की ओर से इन आरोपों को लेकर अलग-अलग मौकों पर जवाब दिया गया है।

राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए फडणवीस ने कहा कि कांग्रेस और उसके नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भाजपा के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई लड़ने का दावा करते हैं, लेकिन उनका वास्तविक संघर्ष देश की संवैधानिक संस्थाओं के साथ दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष संसद, चुनाव आयोग, भारतीय रिजर्व बैंक, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक और सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर निरंतर सवाल उठा रहा है। फडणवीस के अनुसार, किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में संस्थाओं के फैसलों से असहमति जताने का अधिकार सभी को है, लेकिन संस्थाओं की गरिमा को निरंतर निशाना बनाना उचित नहीं है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ विपक्षी नेताओं की ओर से किए गए प्रदर्शनों पर भी सवाल उठाए। फडणवीस ने कहा कि अदालतों में फैसले किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष को देखकर नहीं किए जाते, बल्कि कानून और संविधान के आधार पर निर्णय दिए जाते हैं। यदि किसी पक्ष को अदालत के फैसले से असहमति है तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायपालिका के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन करने से संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है और आम जनता के मन में उनके प्रति अविश्वास पैदा हो सकता है।

फडणवीस ने कांग्रेस पर हमला करते हुए 1975 में लगाए गए आपातकाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासनकाल में देश ने लोकतंत्र का कठिन दौर देखा था। उनके अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद इंदिरा गांधी सरकार ने संवैधानिक व्यवस्था में ऐसे बदलाव करने की कोशिश की, जिनसे न्यायिक प्रक्रिया और लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हुए। उन्होंने 1976 में किए गए 42वें संविधान संशोधन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित करने और न्यायपालिका की शक्तियों पर अंकुश लगाने के प्रयास किए गए थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1977 में मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद संविधान में किए गए कई बदलावों को ठीक करने की दिशा में कदम उठाए गए। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों को फिर से मजबूत करने का प्रयास किया गया था। फडणवीस ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के इतिहास में संविधान के साथ किए गए बदलावों को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि आज कांग्रेस उसी तरह की राजनीति को नए तरीके से आगे बढ़ा रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि बोतल नई है, लेकिन शराब वही है।

फडणवीस ने विपक्ष के ‘संविधान बचाओ’ अभियान पर सवाल उठाते हुए कहा कि संविधान का सम्मान केवल किताब हाथ में लेकर दिखाने से साबित नहीं होता, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं और उनके फैसलों का सम्मान करना भी जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष एक तरफ संविधान की रक्षा की बात करता है और दूसरी तरफ उसी संविधान के तहत स्थापित संस्थाओं को बदनाम करता है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध होना स्वाभाविक है, लेकिन विरोध के नाम पर संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

इस राजनीतिक बयानबाजी के बीच कांग्रेस की ओर से भी फडणवीस के आरोपों का विरोध किया गया है। कांग्रेस नेताओं ने पहले भी भाजपा पर संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने के आरोप लगाए हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार से सवाल पूछना, चुनावी प्रक्रिया पर चिंता जताना और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही मांगना लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है। ऐसे में महाराष्ट्र की राजनीति में संविधान, लाल किताब, लोकतांत्रिक संस्थाओं और ‘रेजीम चेंज’ को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होता दिखाई दे रहा है।

Devendra Fadnavis, Rahul Gandhi, Red Constitution Book, Regime Change Debate, Indian Politics

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संवाददाता

Priyanka Singh

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