दिल्ली में साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पूर्वी जिला पुलिस की साइबर टीम ने पर्सनल लोन, बीमा पॉलिसी और नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से कथित रूप से ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में उत्तर प्रदेश के नोएडा में फर्जी लोन और वित्तीय सेवाओं के नाम पर कार्यालय चलाने तथा बैंक खातों के नेटवर्क के जरिए ठगी की रकम को अलग-अलग स्थानों पर ट्रांसफर करने का कथित मामला प्रकाश में आया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी लोगों को आकर्षक वित्तीय सेवाओं का भरोसा दिलाकर उनसे एडवांस प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क वसूलते थे।
पूर्वी जिला पुलिस के अनुसार, इस मामले की जांच तमिलनाडु के डिंडीगुल निवासी बालमुरुगन की शिकायत के आधार पर शुरू हुई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्हें मुद्रा फाइनेंस के माध्यम से पर्सनल लोन दिलाने का प्रस्ताव दिया गया था। आरोपियों की ओर से लोन दिलाने के नाम पर प्रोसेसिंग फीस मांगी गई और उन्होंने कुल 39,020 रुपये जमा करा दिए। हालाँकि, पैसे लेने के बाद उन्हें न तो कोई लोन उपलब्ध कराया गया और न ही उनकी रकम वापस की गई। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।
शिकायत की जांच करते हुए साइबर पुलिस ने पैसों के लेन-देन से जुड़े बैंक खातों की जानकारी जुटाई। इसी दौरान लक्ष्मी नगर स्थित कर्नाटक बैंक की एक शाखा में संचालित संदिग्ध बैंक खाते का पता चला। पुलिस के अनुसार, इस खाते में साइबर ठगी से जुड़ी संदिग्ध रकम के रूप में कुल 2,60,675 रुपये जमा हुए थे। बैंक खाते के दस्तावेजों और संदिग्ध लेन-देन की जांच के बाद पुलिस को मामले में संगठित तरीके से काम करने वाले नेटवर्क की आशंका हुई। इसके पश्चात 29 अक्टूबर 2026 को साइबर ईस्ट थाने में एफआईआर संख्या 86/2026 दर्ज की गई और विस्तृत पड़ताल शुरू की गई।
जांच के दौरान पुलिस ने बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया। इसी प्रक्रिया में तीन संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका सामने आई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रवि शर्मा (42), सनी कश्यप (40) और गौरव (33) को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, तीनों की भूमिका कथित ठगी के अलग-अलग हिस्सों से जुड़ी हुई थी। जांच में सामने आया कि रवि शर्मा उत्तर प्रदेश के नोएडा सेक्टर-2 में फर्जी लोन और वित्तीय सेवाओं के नाम पर एक कार्यालय संचालित कर रहा था। यह आरोप लगाया गया है कि इस कार्यालय के माध्यम से लोगों को पर्सनल लोन, बीमा पॉलिसी और नौकरी दिलाने का भरोसा दिया जाता था। इसके पश्चात उनसे प्रोसेसिंग फीस, एडवांस शुल्क और अन्य भुगतान के नाम पर पैसे वसूले जाते थे।
पुलिस के अनुसार, कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों को भी कथित तौर पर यही बताया गया था कि वहां वैध लोन और वित्तीय सेवाओं से संबंधित काम होता है। इस तरीके से कार्यालय को सामान्य वित्तीय सेवा केंद्र की तरह संचालित किया जा रहा था, जबकि जांच में उसके माध्यम से लोगों से कथित ठगी किए जाने की बात प्रकाश में आई है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कार्यालय के जरिए कितने लोगों को निशाना बनाया गया और अलग-अलग राज्यों में कितनी रकम की ठगी की गई।
जांच में गौरव की भूमिका बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति के रूप में सामने आई। पुलिस का यह आरोप लगाया गया है कि गौरव कमीशन का लालच देकर लोगों के बैंक खाते खुलवाता था और बाद में उन खातों का इस्तेमाल कथित साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किया जाता था। इसी सिलसिले में उसने अपने चचेरे भाई सनी कश्यप के नाम पर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए थे। पुलिस के अनुसार, इन खातों से संबंधित चेकबुक, पासबुक और डेबिट कार्ड जैसे दस्तावेज गौरव अपने पास रखता था। इस व्यवस्था के जरिए कथित तौर पर ठगी की रकम अलग-अलग बैंक खातों में प्राप्त की जाती थी और आगे ट्रांसफर की जाती थी।
पुलिस के अनुसार सनी कश्यप भी अपने बैंक खातों का इस्तेमाल करने की अनुमति देने के बदले कमीशन प्राप्त करता था। जांच में यह भी सामने आया कि गौरव ने बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबर और सिम कार्ड की व्यवस्था की थी। इसका उद्देश्य बैंक खातों में होने वाले लेन-देन से संबंधित संदेशों और अन्य जानकारियों पर नियंत्रण रखना बताया जा रहा है। पुलिस अब इन बैंक खातों के जरिए हुए सभी वित्तीय लेन-देन की कड़ियां जोड़ रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ठगी की रकम किन-किन खातों में भेजी गई और इस कथित नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने रवि शर्मा के कब्जे से सात मोबाइल फोन बरामद किए हैं। वहीं, गौरव के पास से सनी कश्यप के नाम की एक चेकबुक, एक पासबुक और आधार कार्ड बरामद किया गया है। इसके अलावा पुलिस ने रवि शर्मा और गौरव के बीच हुई व्हाट्सऐप बातचीत भी हासिल की है। पुलिस इस बातचीत और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है। माना जा रहा है कि इन साक्ष्यों से आरोपियों के बीच कथित संपर्क, बैंक खातों की व्यवस्था और पैसों के लेन-देन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं।
पूर्वी जिला पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब गिरोह से जुड़े अन्य संभावित सहयोगियों की तलाश की जा रही है। पुलिस अतिरिक्त म्यूल बैंक खातों की पहचान करने और ठगी की रकम के पूरे वित्तीय नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि नोएडा स्थित कार्यालय से कितने लोगों को लोन, बीमा और नौकरी के नाम पर संपर्क किया गया था तथा कितने लोग इस कथित ठगी का शिकार हुए हैं। पुलिस इस आशंका की जांच कर रही है कि इस नेटवर्क के जरिए अलग-अलग राज्यों के लोगों को निशाना बनाया गया हो सकता है।
इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने आम लोगों से ऑनलाइन वित्तीय सेवाओं का लाभ उठाते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। पुलिस के अनुसार किसी भी अनजान व्यक्ति या संस्था के लोन ऑफर पर बिना जांच-पड़ताल भरोसा नहीं करना चाहिए। पर्सनल लोन दिलाने के नाम पर एडवांस प्रोसेसिंग फीस या अन्य शुल्क जमा कराने के प्रस्तावों की पहले पूरी जानकारी हासिल करनी चाहिए। साथ ही लोगों को कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक या सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए नहीं देना चाहिए, क्योंकि ऐसे खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने और ट्रांसफर करने में किया जा सकता है।
पुलिस ने साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होने वाले लोगों से आग्रह किया है कि वे बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या आधिकारिक वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। शुरुआती समय में शिकायत दर्ज कराने से संदिग्ध लेन-देन को रोकने और ठगी की रकम की जांच में मदद मिल सकती है। दिल्ली पुलिस की साइबर टीम मामले की आगे जांच कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों तथा ठगी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
Cyber Fraud, Personal Loan Scam, Delhi Police, Noida Fraud Gang, Online Loan Fraud





