बिहार के जमुई में 10वीं कक्षा के दो नाबालिगों के साथ कथित बदसलूकी और छेड़छाड़ के मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद अब तक तीन नाबालिग आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी एसआईटी बनाई गई है और आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
पुलिस के मुताबिक घटना 19 सितंबर की शाम की है। दोनों नाबालिग कोचिंग से लौट रहे थे और मड़वा पहाड़ इलाके की ओर स्कूटी से जा रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। आरोप है कि समूह ने दोनों के साथ दुर्व्यवहार किया। मौके पर बनाया गया वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया।
वीडियो सामने आने के बाद जमुई पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया और दोनों नाबालिगों से जानकारी जुटाई। जांच में वीडियो फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान का प्रयास किया गया। पुलिस की जांच में सात से आठ लोगों के नाम सामने आने की बात कही गई है।
तीन नाबालिग आरोपी गिरफ्तार
बिहार पुलिस की एडीजी लॉ एंड ऑर्डर केएस अनुपम के अनुसार मामले में अब तक तीन नाबालिगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें दो की उम्र 17 से 18 वर्ष के बीच बताई गई है। पुलिस अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच कर रही है और उनकी तलाश जारी है।
जमुई थाने में बीएनएस की संबंधित धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 8 और 12 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच में जिस व्यक्ति की भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
एसआईटी करेगी मामले की जांच
विशेष जांच टीम का काम वीडियो में दिखने वाले लोगों की पहचान करना, घटना की परिस्थितियों को समझना और प्रत्येक संदिग्ध की भूमिका की जांच करना है। एसआईटी की निगरानी जमुई के एसडीपीओ स्तर के अधिकारी कर रहे हैं। पुलिस घटना वाले क्षेत्र की पेट्रोलिंग व्यवस्था की भी समीक्षा करेगी।
नाबालिगों के वीडियो शेयर करने वाले अकाउंट भी जांच के दायरे में
पुलिस ने सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित करने वाले अकाउंट्स पर भी कार्रवाई शुरू की है। एडीजी के अनुसार 13 फेसबुक, 12 इंस्टाग्राम और सात एक्स अकाउंट्स को चिन्हित किया गया है। इन 32 अकाउंट्स के खिलाफ वीडियो हटाने की कार्रवाई शुरू की गई है।
पुलिस ने कहा है कि किसी नाबालिग पीड़ित की पहचान या चेहरा उजागर करने वाली सामग्री को सोशल मीडिया पर प्रसारित करना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है। ऐसे मामलों में पॉक्सो एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 74 के प्रावधान लागू हो सकते हैं।
घटना के बाद मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। बिहार सरकार की ओर से कहा गया है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस बाकी संदिग्धों की पहचान, उनकी गिरफ्तारी और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट करने पर ध्यान दे रही है।
मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस वीडियो के स्रोत और उसे आगे प्रसारित करने वाले अकाउंट्स की भी पड़ताल कर रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि नाबालिग पीड़ितों की पहचान सार्वजनिक करने वाली कोई सामग्री साझा न करें।


