Noida Land Policy: गैर अधिग्रहित जमीन के विकास की तैयारी, लेफ्ट ओवर लैंड पॉलिसी का होगा कानूनी परीक्षण
नोएडा। नोएडा में अधिग्रहण से छूटी जमीन को नियोजित शहरी विकास की मुख्यधारा में शामिल करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए नोएडा प्राधिकरण ‘लेफ्ट ओवर लैंड पॉलिसी’ पर काम कर रहा है। नीति का प्रस्ताव प्राधिकरण की 223वीं बोर्ड बैठक में रखा गया था। अब शासन के निर्देश पर इसके ड्राफ्ट का कानूनी परीक्षण कराया जाएगा। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश और अपर महाधिवक्ता (एएजी) से विधिक पहलुओं की समीक्षा कराए जाने की प्रक्रिया प्रस्तावित है। कानूनी जांच के बाद जरूरी संशोधन किए जाएंगे और फिर प्रस्ताव को आगामी बोर्ड बैठक में दोबारा रखा जाएगा।
नोएडा को करीब 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया गया है। शहर के विभिन्न सेक्टरों में कई जगह ऐसी जमीन मौजूद है, जिसका किसी कारणवश अधिग्रहण नहीं हो सका। इन भूखंडों को शहर की नियोजन व्यवस्था से जोड़ना लंबे समय से चुनौती रहा है। ऐसी जमीन के आसपास शहरी विकास होने के बावजूद उनके उपयोग और विकास को लेकर नियोजन संबंधी सवाल बने रहते हैं। लेफ्ट ओवर लैंड पॉलिसी के माध्यम से इन जमीनों के विकास के लिए स्पष्ट व्यवस्था तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे उन्हें मास्टर प्लान और शहर की समग्र विकास योजना के अनुरूप इस्तेमाल करने का रास्ता खुल सके।
प्राधिकरण की 223वीं बोर्ड बैठक में इस नीति का प्रस्ताव रखा गया था। इसके बाद शासन ने निर्देश दिए कि ड्राफ्ट को लागू करने से पहले उसका विधिक परीक्षण कराया जाए। इसमें सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश और अपर महाधिवक्ता से कानूनी पहलुओं की जांच कराने की बात कही गई है। इस समीक्षा के जरिए नीति के प्रावधानों, उनकी वैधानिक स्थिति और संभावित कानूनी जटिलताओं का आकलन किया जाएगा। परीक्षण के दौरान जरूरी बदलाव सामने आने पर उन्हें ड्राफ्ट में शामिल किया जा सकेगा।
नीति का दायरा तय करना भी इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। कानूनी परीक्षण के बाद यह निर्णय लिया जाएगा कि लेफ्ट ओवर लैंड पॉलिसी को आवासीय, संस्थागत, व्यावसायिक, औद्योगिक और ग्रुप हाउसिंग जैसी सभी श्रेणियों की जमीन पर एक साथ लागू किया जाए या अलग-अलग चरणों में इसकी शुरुआत की जाए। इसके अलावा जमीन के विकास के लिए निर्धारित शर्तों, पात्रता और प्रक्रिया को लेकर भी अंतिम रूप से फैसला किया जाना है। इन सभी पहलुओं पर निर्णय बोर्ड की मंजूरी के बाद ही होगा।
दिल्ली और हरियाणा में अधिग्रहण से छूटी जमीन के नियोजन और विकास से जुड़ी नीतियों के उदाहरणों के बीच नोएडा में भी इस तरह की व्यवस्था तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है। यदि प्रस्ताव को कानूनी परीक्षण और बोर्ड की मंजूरी मिलती है, तो इससे गैर अधिग्रहित जमीन के विकास को लेकर एक व्यवस्थित ढांचा तैयार हो सकता है। फिलहाल नीति का ड्राफ्ट कानूनी समीक्षा और संशोधन की प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही आगे बढ़ेगा।


