Noida Consumer Court: फ्लैट का इंटीरियर अधूरा छोड़ना कंपनी को पड़ा भारी, ग्राहक को 12.59 लाख लौटाने का आदेश
नोएडा। नोएडा एक्सटेंशन में फ्लैट का इंटीरियर तय समय पर पूरा नहीं करना और काम के दौरान कथित तौर पर घटिया सामग्री का इस्तेमाल करने के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने इंटीरियर कंपनी के खिलाफ आदेश दिया है। आयोग ने कंपनी को ग्राहक से ली गई 12.59 लाख रुपये की रकम वापस करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा ग्राहक को 2,000 रुपये वाद व्यय के रूप में भी देने होंगे। आयोग ने माना कि कंपनी ने भुगतान लेने के बावजूद तय सेवा पूरी नहीं की और बार-बार किए गए आश्वासनों का पालन नहीं किया।
मामला नोएडा एक्सटेंशन निवासी आदित्य कुमार जेना से जुड़ा है। उन्होंने अपने फ्लैट के इंटीरियर का काम ग्रिड इंटीरियर्स एंड आर्किटेक्ट को सौंपा था। दोनों पक्षों के बीच इंटीरियर के काम, उसके दायरे और लागत को लेकर समझौता हुआ था। काम से संबंधित विभिन्न बिंदुओं का विवरण कंपनी की ओर से दिए गए कोटेशन में तय किया गया था।
शिकायत के अनुसार, कंपनी को इंटीरियर का काम पूरा करने के लिए भुगतान किया गया। बताया गया है कि 13 नवंबर 2024 से 27 अप्रैल 2025 के बीच ग्राहक ने कंपनी को करीब 12.59 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। इसके बावजूद निर्धारित काम पूरा नहीं किया गया और फ्लैट का इंटीरियर अधूरा ही रह गया।
ग्राहक का आरोप था कि कंपनी ने तय काम को समय पर पूरा नहीं किया और काम की गुणवत्ता को लेकर भी आपत्तियां थीं। इसके अलावा बिना अनुमति डिजाइन में बदलाव किए जाने का भी आरोप लगाया गया। काम पूरा कराने के लिए ग्राहक ने कंपनी से कई बार संपर्क किया और लंबित कार्य को जल्द पूरा करने की मांग की।
शिकायत के मुताबिक, देरी होने की स्थिति में कंपनी की ओर से प्रतिदिन एक हजार रुपये विलंब शुल्क देने की बात स्वीकार की गई थी। इसके बावजूद तय समय बीतने के बाद भी इंटीरियर का काम पूरा नहीं हुआ। ग्राहक ने भुगतान की गई राशि वापस मांगी, लेकिन कंपनी की ओर से रकम लौटाने से इनकार कर दिया गया।
लगातार आश्वासन मिलने और काम पूरा नहीं होने के बाद ग्राहक ने मामले को जिला उपभोक्ता आयोग के सामने रखा। आयोग में सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद मामले की सुनवाई एकपक्षीय तरीके से की गई और उपलब्ध दस्तावेजों तथा शिकायत में लगाए गए तथ्यों के आधार पर मामले की जांच की गई।
आयोग ने माना कि ग्राहक से रकम लेने के बावजूद कंपनी ने अनुबंध के अनुसार तय कार्य पूरा नहीं किया। आयोग ने यह भी माना कि काम पूरा करने के लिए दिए गए आश्वासनों का पालन नहीं किया गया। इस आधार पर आयोग ने कंपनी की सेवा में कमी मानी और ग्राहक को राहत देने का आदेश जारी किया।
आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया कि वह ग्राहक को 12.59 लाख रुपये की पूरी भुगतान राशि 30 दिन के भीतर वापस करे। इसके साथ ही 2,000 रुपये वाद व्यय के रूप में भी अदा करने होंगे। आयोग के आदेश के बाद ग्राहक के लिए लंबे समय से अधूरे पड़े इंटीरियर कार्य और भुगतान की गई रकम को लेकर राहत का रास्ता खुला है।
इस मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि इंटीरियर कार्य के लिए किसी कंपनी के साथ समझौता करते समय काम की समयसीमा, सामग्री की गुणवत्ता, डिजाइन में बदलाव की अनुमति और भुगतान की शर्तों को लिखित रूप में स्पष्ट रखना जरूरी है। अनुबंध के बावजूद सेवा पूरी नहीं होने या तय शर्तों का पालन नहीं होने पर उपभोक्ता आयोग में शिकायत की जा सकती है।
फिलहाल जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश के तहत कंपनी को निर्धारित अवधि में रकम लौटानी होगी। यदि आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो ग्राहक के पास आगे कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प रहेगा।


