Gurukul Fraud: निवेश के नाम पर 10 लाख की ठगी का आरोप, ऑटिज्म पीड़ित नाबालिग से बालश्रम और प्रताड़ना का मामला
नोएडा। बिसरख थाना क्षेत्र में सेक्टर-1 स्थित सिद्ध बाबा मंदिर के पास संचालित एक गुरुकुल को लेकर गंभीर आरोपों का मामला सामने आया है। एक व्यक्ति ने गुरुकुल संचालकों पर दिव्यांग बच्चों के नाम पर निवेश कराकर करीब 10 लाख रुपये लेने, तय रिटर्न नहीं देने और रकम वापस मांगने पर उसके ऑटिज्म से पीड़ित नाबालिग बेटे को कथित रूप से परेशान करने तथा बालश्रम कराने का आरोप लगाया है। न्यायालय के आदेश के बाद बिसरख थाना पुलिस ने गुरुकुल संचालक दंपती नीरज सिंह और सागरिका नायक, कोषाध्यक्ष पुनीता तथा कुछ अज्ञात रिश्तेदारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
नोएडा निवासी राजीव झा ने पुलिस और अदालत के समक्ष दी गई शिकायत में बताया कि उनका 16 वर्षीय बेटा जन्म से ही ऑटिज्म से प्रभावित है। उन्होंने वर्ष 2019 में अपने बेटे को सिद्ध बाबा मंदिर, बिसरख सेक्टर-1 स्थित ‘हमारा गुरुकुल’ नामक संस्थान में दाखिल कराया था। शिकायत के अनुसार, गुरुकुल का संचालन नीरज सिंह करते हैं और वह बिसरख जलालपुर स्थित विहान ग्रीन अपार्टमेंट में रहते हैं।
राजीव झा का आरोप है कि वर्ष 2023 में गुरुकुल संचालक नीरज सिंह, उनकी पत्नी सागरिका नायक और संस्था की कोषाध्यक्ष पुनीता उनके घर पहुंचे थे। शिकायतकर्ता के अनुसार, तीनों ने उन्हें गुरुकुल में निवेश करने के लिए तैयार किया और संस्था में पैसा लगाने के बदले आर्थिक लाभ का भरोसा दिलाया।
आरोप है कि इस दौरान राजीव झा ने करीब 10 लाख रुपये गुरुकुल से जुड़ी संस्था में निवेश किए। शिकायतकर्ता का कहना है कि निवेश की रकम के संबंध में उन्हें रसीदें भी दी गई थीं और इन रसीदों के सरकारी पोर्टल पर दर्ज होने का दावा किया गया था। साथ ही उन्हें हर महीने करीब 35 हजार रुपये का एश्योर्ड रिटर्न देने का आश्वासन भी दिया गया था।
शिकायत के मुताबिक, निर्धारित 24 महीने की अवधि पूरी होने के बाद जब राजीव झा ने अपनी रकम वापस मांगी तो कथित तौर पर उन्हें लगातार अलग-अलग बहाने बताए गए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि समय गुजरने के बावजूद उन्हें न तो उनकी मूल रकम वापस मिली और न ही तय रिटर्न की राशि नियमित रूप से दी गई। बाद में कथित रूप से एश्योर्ड रिटर्न देना भी पूरी तरह बंद कर दिया गया।
राजीव झा का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी रकम वापस लेने के लिए दबाव बनाया तो मामले ने दूसरा रूप ले लिया। उनके अनुसार, गुरुकुल में रह रहे उनके ऑटिज्म से प्रभावित नाबालिग बेटे के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार और मारपीट शुरू कर दी गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि बच्चे से उसकी क्षमता के अनुसार शिक्षा और देखभाल के बजाय काम कराया गया और बालश्रम जैसी स्थिति पैदा की गई।
शिकायतकर्ता का कहना है कि बेटे के साथ कथित व्यवहार की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने पुलिस और प्रशासन से शिकायत करने की बात कही। उनका आरोप है कि गुरुकुल संचालकों की ओर से उन्हें मामले को लेकर दबाव में रखने का प्रयास भी किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि अन्य लोगों से भी पैसे लिए गए और कई परिवारों की मेहनत की कमाई फंस गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। मुकदमे में गुरुकुल संचालक नीरज सिंह, उनकी पत्नी सागरिका नायक, कोषाध्यक्ष पुनीता और कुछ अज्ञात रिश्तेदारों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आर्थिक धोखाधड़ी, नाबालिग के साथ कथित उत्पीड़न और बालश्रम से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है।
पुलिस जांच में गुरुकुल से संबंधित वित्तीय दस्तावेज, निवेश की रसीदें, कथित रिटर्न से जुड़ी जानकारी और संस्था के रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है। इसके साथ यह भी देखा जाएगा कि शिकायतकर्ता की ओर से किए गए भुगतान की वास्तविक स्थिति क्या थी और रकम किस खाते या संस्था के माध्यम से ली गई।
नाबालिग के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों को देखते हुए पुलिस उसके बयान और परिस्थितियों से जुड़े अन्य तथ्यों की भी जांच कर सकती है। गुरुकुल में बच्चों की देखभाल, उनकी शिक्षा और वहां उनके साथ किए जाने वाले व्यवहार से संबंधित रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं। यदि बालश्रम के आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित कानूनों के तहत भी कार्रवाई हो सकती है।
इस पूरे मामले में अभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं और उनकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही होगी। गुरुकुल संचालकों और अन्य नामजद आरोपियों का पक्ष जांच के दौरान सामने आना बाकी है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों तथा संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कोतवाली प्रभारी रंजीत कुमार के मुताबिक, न्यायालय के आदेश के बाद मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस सभी आरोपों की जांच कर रही है। आर्थिक लेनदेन से लेकर नाबालिग से जुड़े आरोपों तक प्रत्येक पहलू को जांच के दायरे में रखा गया है।
फिलहाल यह मामला निवेश के नाम पर कथित ठगी और विशेष जरूरत वाले बच्चे के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों के कारण गंभीर बना हुआ है। पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है, निवेश की रकम का वास्तविक इस्तेमाल कैसे हुआ और गुरुकुल में बच्चों की देखभाल तथा उनके साथ व्यवहार से जुड़े नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

