Rescue Operation: यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड में छह घंटे चला राहत-बचाव अभियान, सुबह हटाई गई जली बस
नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में लगी भीषण आग के बाद करीब छह घंटे तक राहत और बचाव अभियान चलाया गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग, जिला प्रशासन और एक्सप्रेसवे पर तैनात टोल कर्मचारियों की टीमें मौके पर पहुंचीं। आग तेजी से फैलने के कारण शुरुआती दौर में राहत दल को बस के भीतर प्रवेश करने में भी काफी कठिनाई हुई।
हादसे के दौरान सिवारा गांव के कुछ स्थानीय युवक भी घटनास्थल पर पहुंचे और बचाव कार्य में सहयोग किया। आग पर नियंत्रण के बाद रेस्क्यू टीम ने बस के अंदर जाकर स्थिति का जायजा लिया। जली हुई बस के भीतर कुछ यात्री गंभीर रूप से झुलसी अवस्था में फंसे मिले, जिन्हें काफी मशक्कत के बाद बाहर निकालकर एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया।
अस्पताल पहुंचने के बाद नौ यात्रियों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए। आग लगने के बाद कुछ यात्रियों ने खिड़कियों के शीशे तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की। वहीं कुछ यात्रियों को स्थानीय लोगों और बचाव दल की मदद से बस से बाहर निकाला गया।
राहत अभियान के दौरान यमुना एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। आग की तीव्रता और बस के आसपास मौजूद खतरे को देखते हुए पुलिस ने दोनों दिशाओं में वाहनों की आवाजाही कुछ समय के लिए रोक दी, ताकि किसी दूसरे वाहन को आग या संभावित मलबे से नुकसान न पहुंचे।
घटना के दौरान बस से धमाके जैसी आवाजें आने की बात भी सामने आई। शुरुआती स्तर पर बस के भीतर कुछ संदिग्ध सामान होने की आशंका जताई गई, लेकिन किसी विस्फोटक पदार्थ की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस और संबंधित टीमें बस के अवशेषों तथा घटनास्थल से मिले साक्ष्यों की जांच कर रही हैं।
धमाके जैसी आवाज और आग के तेजी से फैलने के कारण एहतियातन दोनों दिशाओं में यातायात रोका गया था। स्थिति सुरक्षित होने और आग पर पूरी तरह काबू पाने के बाद वाहनों की आवाजाही फिर शुरू कराई गई। इस दौरान एक्सप्रेसवे पर बड़ी संख्या में वाहन रुक गए, जिससे कुछ समय तक जाम की स्थिति बनी रही।
राहत और बचाव कार्य के साथ प्रशासन ने मृतकों और घायलों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर आवश्यक साक्ष्य जुटाने शुरू किए। बस के अंदर और आसपास मिले अवशेषों को भी जांच के लिए सुरक्षित किया गया है।
करीब छह घंटे तक चले अभियान के बाद सुबह लगभग छह बजे जली हुई बस को एक्सप्रेसवे से हटवाया गया। इसके बाद सड़क पर फैले मलबे और अन्य अवशेषों की सफाई कराई गई, ताकि यातायात को सामान्य रूप से संचालित किया जा सके। बस हटाए जाने और सफाई पूरी होने के बाद एक्सप्रेसवे पर वाहनों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य हुई, हालांकि हादसे के कारण कई घंटे तक यातायात प्रभावित रहा।
पुलिस और प्रशासन अब हादसे के प्रत्येक पहलू की जांच कर रहे हैं। आग लगने की वजह, आग कितनी तेजी से फैली, बस में मौजूद सुरक्षा इंतजामों की स्थिति और यात्रियों की निकासी के दौरान बनी परिस्थितियों को जांच में शामिल किया गया है।
इस घटना ने स्लीपर बसों में आग लगने की स्थिति में आपातकालीन निकासी और सुरक्षा इंतजामों की अहमियत को सामने ला दिया है। शुरुआती मिनटों में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालना महत्वपूर्ण होता है, लेकिन इस मामले में आग की तेजी और घने धुएं ने बचाव अभियान को चुनौतीपूर्ण बनाया।
फिलहाल नौ यात्रियों की मौत के बाद पुलिस और प्रशासन आगे की कानूनी प्रक्रिया में जुटे हैं। घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों और तकनीकी जांच के बाद ही आग लगने की वास्तविक वजह तथा धमाके जैसी आवाजों से जुड़े तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


