Himachal Mid Day Meal: नर्सरी से आठवीं तक बच्चों को सप्ताह में दो दिन मिलेगा अंडा या फल
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले नर्सरी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के पोषण को बेहतर बनाने के लिए मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना में संशोधन को मंजूरी दी है। अब विद्यार्थियों को नियमित मिड-डे-मील के साथ सप्ताह में दो दिन अतिरिक्त पौष्टिक आहार दिया जाएगा। यह सुविधा पहले सप्ताह में एक दिन उपलब्ध कराई जाती थी। जुलाई में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में भी इस योजना में सप्ताह में दो बार अंडा या मौसमी फल देने के निर्णय की जानकारी सामने आई थी।
नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को बुधवार और शुक्रवार को उनकी या उनके अभिभावकों की पसंद के अनुसार उबला हुआ अंडा या ताजा फल दिया जाएगा। फल के विकल्प में केला या सेब उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का उद्देश्य नियमित भोजन के अलावा बच्चों को अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराना है, ताकि उनके शारीरिक विकास और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके।
विद्यालय स्तर पर मिड-डे-मील प्रभारी शिक्षक कुक-कम-हेल्पर्स की सहायता से निर्धारित दिनों में बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाएंगे। योजना की निगरानी प्रधानाचार्य, मुख्याध्यापक, केंद्र मुख्य शिक्षक, मुख्य शिक्षक, स्कूल प्रबंधन समितियां और संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारी करेंगे।
अतिरिक्त पौष्टिक आहार के लिए आवश्यक खाद्य सामग्री की खरीद विद्यालय स्तर पर स्थानीय बाजार से की जाएगी। इस प्रक्रिया में स्वयं सहायता समूहों, महिला मंडलों और स्कूल प्रबंधन समितियों का सहयोग लिया जाएगा। सरकार ने योजना के संचालन में स्थानीय स्तर पर सहभागिता को भी व्यवस्था का हिस्सा बनाया है।
योजना के लिए आवश्यक बजट विद्यार्थियों के दाखिले के आधार पर कोषागार के माध्यम से ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों को उपलब्ध कराया जाएगा। बीईईओ अपने क्षेत्र के स्कूलों को विद्यार्थियों की संख्या और निर्धारित प्रति विद्यार्थी दर के आधार पर तिमाही धनराशि जारी करेंगे। स्कूलों को पौष्टिक आहार पर होने वाले खर्च का अलग रिकॉर्ड रखना होगा और मासिक तथा त्रैमासिक व्यय विवरण संबंधित बीईईओ को देना होगा। इसके बाद समेकित रिपोर्ट उच्च शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय तक भेजी जाएगी।
बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए योजना में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता पर भी विशेष जोर दिया गया है। स्कूलों में अंडों को उचित तरीके से उबालकर दिया जाएगा, जबकि फलों को बच्चों को परोसने से पहले अच्छी तरह साफ किया जाएगा। खाद्य सामग्री की खरीद, भंडारण, तैयारी और वितरण के दौरान भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के निर्धारित दिशा-निर्देशों और मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और समग्र कल्याण को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सप्ताह में दो बार दिया जाने वाला अतिरिक्त पौष्टिक आहार नियमित मिड-डे-मील का पूरक होगा और इससे विद्यार्थियों को अतिरिक्त पोषण मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निगरानी व्यवस्था, सामुदायिक भागीदारी और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन को महत्वपूर्ण बताया। सरकार के अनुसार अतिरिक्त पौष्टिक आहार की सुविधा बढ़ाने का उद्देश्य स्कूल जाने वाले बच्चों के पोषण स्तर को मजबूत करना और उनके स्वस्थ विकास में सहायता करना है।


