GBU Student Notice: जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर छात्र को 5 लाख का नोटिस देने का मामला, ACP के निलंबन पर स्थिति स्पष्ट नहीं; ADCP करेंगे जांच
नोएडा। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) के छात्र अक्षत त्रिपाठी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन से जोड़ते हुए पांच लाख रुपये के निजी मुचलके का नोटिस जारी करने का मामला लगातार चर्चा में है। इस प्रकरण में संबंधित एसीपी के खिलाफ कार्रवाई और कथित निलंबन को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल केवल छात्र के खिलाफ आख्या तैयार करने वाले उपनिरीक्षक शिवा पांडेय को निलंबित किया गया है, जबकि पूरे मामले की विस्तृत जांच एडीसीपी ग्रेटर नोएडा संतोष कुमार को सौंपी गई है।
अपर पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था राजीव नारायण मिश्र के मुताबिक, एसीपी स्तर के अधिकारी के निलंबन का निर्णय शासन स्तर से लिया जाता है। पुलिस को अभी तक संबंधित एसीपी के निलंबन के संबंध में कोई लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों की भूमिका के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
पुलिस के अनुसार, एडीसीपी ग्रेटर नोएडा संतोष कुमार को पूरे घटनाक्रम की जांच की जिम्मेदारी दी गई है। जांच के दायरे में ईकोटेक-वन कोतवाली प्रभारी अरविंद वर्मा, एसीपी ग्रेटर नोएडा-तृतीय डॉ. रवि शंकर निम और एसीपी ग्रेटर नोएडा-चार राजीव सिसोदिया की भूमिका बताई गई है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि छात्र के खिलाफ रिपोर्ट किन तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर तैयार की गई तथा पांच लाख रुपये के निजी मुचलके का नोटिस जारी करने की प्रक्रिया में किस स्तर पर क्या भूमिका रही।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की ओर से बताया गया कि जीबीयू के छात्र को नोटिस जारी करने के मामले में ग्रेटर नोएडा के कार्यपालक मजिस्ट्रेट को निलंबित कर दिया गया है। इसके बाद सोशल मीडिया पर एसीपी ग्रेटर नोएडा-तृतीय डॉ. रवि शंकर निम के निलंबन की खबरें प्रसारित होने लगीं। हालांकि स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने उनके निलंबन की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ईकोटेक-वन कोतवाली एसीपी ग्रेटर नोएडा-तृतीय डॉ. रवि शंकर निम के सर्किल में आती है। इसी कोतवाली में तैनात उपनिरीक्षक शिवा पांडेय ने छात्र अक्षत त्रिपाठी के संबंध में आख्या तैयार की थी। इस आख्या में आरोप लगाया गया था कि छात्र जंतर-मंतर पर सीजेपी के धरना-प्रदर्शन के लिए अन्य छात्रों को उकसा रहा था।
इस रिपोर्ट के आधार पर चार सितंबर को बीएनएसएस की धारा 130 के तहत छात्र को पांच लाख रुपये के निजी मुचलके से संबंधित नोटिस जारी किया गया था। मामला विवादों में आने के बाद अगले ही दिन नोटिस वापस ले लिया गया। इसके बाद नोटिस जारी करने की पूरी प्रक्रिया और इसमें शामिल अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे।
पुलिस के अनुसार, कार्यपालक मजिस्ट्रेट तृतीय का प्रभार एसीपी ग्रेटर नोएडा-चार राजीव सिसोदिया के पास था और छात्र को नोटिस कार्यपालक मजिस्ट्रेट तृतीय की ओर से जारी किया गया था। अब जांच में यह भी देखा जा रहा है कि पुलिस रिपोर्ट से लेकर कार्यपालक मजिस्ट्रेट स्तर पर नोटिस जारी किए जाने तक निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं।
अधिकारियों का कहना है कि एसीपी स्तर के अधिकारी पीपीएस संवर्ग के होते हैं। पुलिस आयुक्त के पास जिले में ऐसे अधिकारी को कार्यमुक्त करने या उसका कार्यक्षेत्र बदलने का अधिकार होता है, जबकि निलंबन का निर्णय शासन स्तर से किया जाता है। इसी कारण पुलिस का कहना है कि शासन से आधिकारिक लिखित आदेश मिलने तक किसी एसीपी के निलंबन की पुष्टि नहीं की जा सकती।
फिलहाल उपनिरीक्षक शिवा पांडेय के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है और एडीसीपी संतोष कुमार की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट में जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी या लापरवाही सामने आएगी, उसके आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय किए जाने की बात कही गई है।


