Satya Niketan Building Collapse: 27 घंटे बाद रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म, सात लोगों की मौत; मृतकों में पांच छात्र
नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद करीब 27 घंटे तक चला राहत एवं बचाव अभियान पूरा हो गया है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक हादसे में सात लोगों की मौत हुई है, जबकि पांच लोग घायल हुए हैं। घायलों में तीन की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। मृतकों में पांच छात्र शामिल हैं। हादसे के बाद शुरू हुई पुलिस कार्रवाई में इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता, उसके बेटे और पत्नी को गिरफ्तार किया गया है। वहीं दिल्ली सरकार ने राजधानी में संचालित सभी पीजी का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने के आदेश दिए हैं।
सत्य निकेतन में 6 सितंबर को इमारत गिरने के बाद मौके पर बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया था। मलबे के नीचे लोगों के फंसे होने की आशंका को देखते हुए बचाव दल लगातार अभियान में जुटे रहे। भारी मलबे को हटाने के साथ अंदर फंसे लोगों की तलाश की गई। करीब 27 घंटे तक चले अभियान के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त किया गया।
पुलिस के अनुसार हादसे में सात लोगों की जान गई है। इनमें 20 वर्षीय अभिषेक शामिल है, जो उत्तर प्रदेश के सोनभद्र का रहने वाला था। उसके पिता का नाम संतोष कुमार बताया गया है। अभिषेक छात्र था। छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी 20 वर्षीय युवराज सोनी की भी हादसे में मौत हुई है। उसके पिता का नाम कन्हैया लाल सोनी है और वह भी छात्र था।
उत्तर प्रदेश के औरैया निवासी 17 वर्षीय पवन भी मृतकों में शामिल है। उसके पिता का नाम विश्वंभर नाथ बताया गया है। इसके अलावा मध्य प्रदेश के देवास निवासी 19 वर्षीय अर्पित जहाज और कटनी निवासी 18 वर्षीय अक्षत सिंह यादव की भी जान गई है। दोनों छात्र थे। इस तरह हादसे में जान गंवाने वाले सात लोगों में पांच छात्र शामिल हैं।
मृतकों में 75 वर्षीय सुरिंदर सिंह भी शामिल हैं, जो मजदूरी करते थे। उनके पिता का नाम केवल सिंह बताया गया है। सातवें मृतक की पहचान अभी नहीं हो सकी है। पुलिस अज्ञात मृतक की पहचान कराने का प्रयास कर रही है।
हादसे में घायल हुए लोगों में 30 वर्षीय असगर अली, 19 वर्षीय नीरज बावा, 19 वर्षीय आदित्य कुमार, 19 वर्षीय नितीश चिब और 18 वर्षीय मोहम्मद अयान शामिल हैं। नितीश के पिता का नाम पवन और मोहम्मद अयान के पिता का नाम मोहम्मद वकील बताया गया है। पांचों घायलों का उपचार किया जा रहा है और इनमें तीन की स्थिति बेहद गंभीर बताई गई है।
हादसे के बाद पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता की तलाश तेज कर दी थी। घटना के तुरंत बाद पुलिस टीम ने पालम विहार स्थित उसके घर पर छापेमारी की, लेकिन वह वहां नहीं मिला। इसके बाद पुलिस को आशंका हुई कि वह गिरफ्तारी से बचने के लिए किसी अन्य स्थान पर छिपा हुआ है।
पुलिस ने हरिराम के करीबियों और सहयोगियों से जुड़े कई ठिकानों पर दबिश दी। जांच के दौरान उसके राजस्थान के भिवाड़ी में होने की जानकारी मिली, जिसके बाद पुलिस ने वहां कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। मामले में हरिराम गुप्ता के बेटे और पत्नी को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब इमारत से जुड़े दस्तावेजों और हादसे के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों की जांच कर रही है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने पीजी में रहने वाले छात्रों और अन्य लोगों की सुरक्षा को लेकर व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली में मौजूद सभी पीजी का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने का आदेश दिया है। इसके तहत इमारतों की संरचनात्मक स्थिति और सुरक्षा मानकों की जांच की जाएगी।
मुखर्जी नगर, राजेंद्र नगर, लक्ष्मी नगर, सत्य निकेतन और साकेत जैसे उन इलाकों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है, जहां बड़ी संख्या में छात्र और युवा पीजी में रहते हैं। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित इमारतों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मामले में एमसीडी के अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई है। डिप्टी कमिश्नर, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर समेत पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इस कार्रवाई की जानकारी दी।
इसके साथ ही राजधानी में बिना अनुमति बनाई गई पांचवीं मंजिल वाली इमारतों को तत्काल सील करने के आदेश दिए गए हैं। सत्य निकेतन में घटनास्थल के आसपास संचालित पीजी और दूसरी इमारतों की भी गहन जांच की जा रही है। नियमों का उल्लंघन मिलने पर सीलिंग समेत अन्य सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और हादसे के लिए जो भी व्यक्ति या अधिकारी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद अवैध निर्माण और नियमों की अनदेखी कर संचालित किए जा रहे पीजी भी प्रशासन की जांच के दायरे में आ गए हैं।
इस बीच सत्य निकेतन में पीजी हॉस्टल के रूप में इस्तेमाल की जा रही इमारतों के गिरने का मामला दिल्ली हाईकोर्ट भी पहुंच गया है। मामले में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, एमसीडी, दिल्ली पुलिस, दिल्ली विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि वह केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और एमसीडी की ओर से पेश होंगे। हाईकोर्ट ने इस हादसे को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को निर्धारित की गई है।
सत्य निकेतन हादसे में पांच छात्रों समेत सात लोगों की मौत ने राजधानी में पीजी और बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब एक तरफ पुलिस हादसे की आपराधिक जांच आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों के सामने अवैध निर्माण की पहचान, पीजी का स्ट्रक्चरल ऑडिट और प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने की चुनौती है।


