GST Evasion: दनकौर की फर्म में करोड़ों की जीएसटी गड़बड़ी पकड़ी, जांच के बाद जमा किए 64.28 करोड़ रुपये
नोएडा। राज्यकर विभाग गौतमबुद्ध नगर जोन नोएडा ने केंद्रीय जीएसटी के क्षेत्राधिकार में आने वाली दनकौर क्षेत्र की एक फर्म की जांच में करोड़ों रुपये की कथित जीएसटी गड़बड़ी पकड़ी है। विभाग का दावा है कि जांच में फर्जी फर्मों से आपूर्ति दिखाने, अधिक इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा करने और बिना वास्तविक आपूर्ति के बिल जारी कर टर्नओवर बढ़ाकर दिखाने जैसी अनियमितताएं सामने आईं। जांच के बाद संबंधित फर्म ने 64.28 करोड़ रुपये जीएसटी के रूप में जमा किए हैं।
राज्यकर विभाग की टीम ने एक सितंबर को फर्म की जांच की थी। अधिकारियों के मुताबिक, यह फर्म सिविल संविदा से संबंधित सेवाएं प्रदान करती है। विभाग को फर्म की कारोबारी गतिविधियों और जीएसटी भुगतान के तरीके को लेकर संदेह हुआ था। इसके बाद उपलब्ध डेटा और गोपनीय सूचनाओं के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई।
अपर आयुक्त राज्यकर परीक्षित खटाना के निर्देश पर संयुक्त आयुक्त विशेष अनुसंधान शाखा संजय कुशवाहा, उपायुक्त रमेश कुमार सिंह, सहायक आयुक्त दिव्यांश आनंद, राज्यकर अधिकारी वीरेंद्र पाल उपाध्याय और तरुण राय की टीम ने फर्म की जांच की।
संयुक्त आयुक्त विशेष अनुसंधान शाखा संजय कुशवाहा के मुताबिक, विभागीय पोर्टल बोवेब, बीफा, जीएसटी प्राइम, ईडब्ल्यूबी और गोपनीय सूचना के आधार पर फर्म से संबंधित डेटा की छानबीन की गई। जांच में सामने आया कि फर्म की ओर से नकद में कर की धनराशि जमा नहीं की जा रही थी। इसके बजाय अधिक आईटीसी का दावा कर देय कर का समायोजन किए जाने की बात सामने आई।
विभाग का दावा है कि जांच में फर्म द्वारा कुछ फर्जी फर्मों से आपूर्ति प्राप्त करना भी प्रदर्शित किया गया था। इसके अलावा कारोबारी लेनदेन की जांच के दौरान कथित सर्कुलर ट्रेडिंग से संबंधित गतिविधियां सामने आईं। इसमें वास्तविक आपूर्ति के बिना आपस में बिल जारी कर कारोबार का टर्नओवर बढ़ाकर दिखाने का आरोप है।
अधिकारियों के अनुसार, सिविल संविदा से जुड़े कार्यों में फर्म द्वारा आपस में ही ठेकेदार और उपठेकेदार के रूप में आईटीसी पास किए जाने की बात भी जांच में सामने आई। विभाग ने इन लेनदेन और आईटीसी के दावों की जांच के आधार पर कर देनदारी का आकलन किया।
राज्यकर विभाग के मुताबिक, जांच की कार्रवाई के बाद फर्म ने 64.28 करोड़ रुपये जीएसटी के रूप में जमा कर दिए। विभाग संबंधित लेनदेन और टैक्स रिकॉर्ड की आगे भी जांच कर रहा है।


