Illegal Construction: ग्रेटर नोएडा में अवैध निर्माण पर बुलडोजर की रफ्तार धीमी, 500 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर कब्जा
नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की रफ्तार धीमी पड़ने से कई इलाकों में अवैध कॉलोनियां विकसित होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। प्राधिकरण की ओर से अवैध निर्माण की सूची तैयार करने और ध्वस्तीकरण के लिए तिथिवार रोस्टर जारी करने के बावजूद जमीनी स्तर पर नियमित कार्रवाई नहीं होने के आरोप लग रहे हैं। ग्रेटर नोएडा वेस्ट समेत कई गांवों में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण किए जाने की शिकायत प्राधिकरण के उच्चाधिकारियों तक पहुंच चुकी है।
बीते बुधवार को बिलासपुर क्षेत्र में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। बताया जा रहा है कि इससे पहले करीब दो महीने तक इस तरह की बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। प्राधिकरण की ओर से हर महीने अवैध निर्माण की सूची तैयार की जाती है और ध्वस्तीकरण के लिए रोस्टर भी बनाया जाता है, लेकिन कार्रवाई की गति अवैध निर्माण की रफ्तार के मुकाबले धीमी बताई जा रही है।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग की बीते साल जारी रिपोर्ट में भी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में अतिक्रमण की गंभीर स्थिति सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में 500 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर अवैध कब्जा है। इस जमीन की कीमत करीब 1,924.68 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
अवैध कब्जे और निर्माण के कारण प्राधिकरण की आवासीय, औद्योगिक और व्यावसायिक योजनाओं पर भी असर पड़ रहा है। कई स्थानों पर जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण जरूरी सड़कों और अन्य आधारभूत ढांचा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में परेशानी हो रही है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के आमका गांव में खसरा संख्या 150 और 151 पर अवैध कॉलोनी विकसित किए जाने की शिकायत मिली है। इसी तरह कैलाशपुर गांव में खसरा संख्या 259, 261, 269, 270, 274 और 275 पर कॉलोनाइजरों द्वारा अवैध कॉलोनी विकसित किए जाने का आरोप है। शिकायत के मुताबिक इन स्थानों पर निर्माण गतिविधियां भी चल रही हैं।
इसके अलावा तिलपता, खोदना, डेरीन, खेड़ा चौगानपुर और बिसरख समेत अन्य गांवों में भी जमीन पर अवैध निर्माण किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। इन मामलों की जानकारी प्राधिकरण के उच्च अधिकारियों को दिए जाने की बात कही गई है।
चिंता की बात यह भी है कि कुछ अवैध कॉलोनियों का प्रचार-प्रसार कर लोगों को भूखंड खरीदने के लिए आकर्षित किया जा रहा है। ऐसे में उन खरीदारों के फंसने का खतरा बढ़ जाता है, जिन्हें जमीन की वास्तविक स्थिति, प्राधिकरण की अनुमति या क्षेत्र में निर्माण संबंधी नियमों की जानकारी नहीं होती।
प्राधिकरण की ओर से पहले दावा किया गया था कि खाली पड़ी अधिग्रहित जमीन की तारबंदी कर उसे सुरक्षित किया जाएगा और अवैध कब्जों को ध्वस्त किया जाएगा। हालांकि विभिन्न इलाकों में लगातार सामने आ रहे अवैध निर्माण के मामलों के बाद निगरानी और कार्रवाई को और प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
कैग की रिपोर्ट में भूमि की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक कब्जा प्राप्त भूमि के नियमित निरीक्षण की प्रभावी व्यवस्था नहीं होने से अतिक्रमण का खतरा बढ़ता है। पिछले कुछ वर्षों में अधिसूचित क्षेत्र में अवैध निर्माण तेजी से बढ़ने की बात भी सामने आई है।
अतिक्रमण और अवैध निर्माण पर तकनीक की मदद से निगरानी के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई आधारित व्यवस्था विकसित करने की योजना भी बनाई थी। इसके लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर के सहयोग से अतिक्रमण मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने की तैयारी की गई।
प्राधिकरण और इसरो के बीच इसके लिए समझौता भी किया गया था। योजना के तहत सैटेलाइट और तकनीक की मदद से जमीन पर होने वाले बदलावों और नए निर्माण की पहचान कर अतिक्रमण के खिलाफ समय रहते कार्रवाई की जानी थी। हालांकि इस व्यवस्था का प्रभाव अभी जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देने के आरोप लग रहे हैं।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ रवि कुमार एनजी का कहना है कि अधिसूचित क्षेत्र में प्राधिकरण से नक्शा पास कराए बिना किया गया किसी भी प्रकार का निर्माण अवैध है। अवैध कब्जे रोकने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है और परियोजना विभाग के अधिकारियों को भी इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
