Dengue-Malaria: दिल्ली में डेंगू-मलेरिया पर शिकंजा, मामले आधे से भी कम, 2026 में अब तक कोई मौत नहीं
नई दिल्ली, 18 अगस्त। अगस्त में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के बावजूद दिल्ली में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की स्थिति इस साल पिछले वर्षों की तुलना में राहत देने वाली बनी हुई है। मध्य अगस्त तक दिल्ली में डेंगू के 246, मलेरिया के 80 और चिकनगुनिया के 19 मामले सामने आए हैं। राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि 2026 में अब तक इन तीनों मच्छरजनित बीमारियों से किसी मरीज की मौत नहीं हुई है।
दिल्ली नगर निगम की ओर से मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने के लिए चलाए जा रहे एंटी-लार्वा अभियान और लगातार निगरानी का असर बीमारी के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 14 अगस्त 2023 तक दिल्ली में डेंगू के 653 मामले सामने आए थे। 2025 में इसी अवधि तक यह संख्या घटकर 354 रह गई थी, जबकि 2026 में अब तक डेंगू के 246 मामले दर्ज किए गए हैं।
इसी तरह मलेरिया के मामलों में भी कमी आई है। 2025 में मध्य अगस्त तक मलेरिया के 165 मामले सामने आए थे, जो इस साल घटकर 80 रह गए हैं। चिकनगुनिया के मामले भी पिछले साल के 27 से घटकर इस साल 19 हो गए हैं। इस तरह तीनों प्रमुख मच्छरजनित बीमारियों के मामलों में पिछले वर्ष की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है।
एमसीडी की टीमों ने मच्छरों के प्रजनन की संभावनाओं वाले स्थानों की बड़े स्तर पर जांच की है। अब तक 2.38 करोड़ से अधिक परिसरों का निरीक्षण किया जा चुका है। जांच के दौरान 91,217 घरों में मच्छरों का लार्वा पाया गया। ऐसे स्थानों पर कार्रवाई करते हुए निगम की ओर से 74,591 नोटिस जारी किए गए हैं।
जलजनित और मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ निगम ने कानूनी कार्रवाई भी की है। अब तक 6,724 मामलों में अदालत का रुख किया गया है। निगम का उद्देश्य लोगों को अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने देने के लिए लगातार जागरूक करने के साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करना है।
229 जलस्रोतों में छोड़ी गई गंबूशिया मछली
मच्छरों के लार्वा को नियंत्रित करने के लिए एमसीडी ने जैविक उपायों का भी सहारा लिया है। निगम की टीमों ने 229 जलाशयों और गंदे पानी के स्रोतों में गंबूशिया मछलियां छोड़ी हैं। ये मछलियां मच्छरों के लार्वा को खाती हैं और इस तरह उनके प्रजनन को नियंत्रित करने में मदद करती हैं।
निगम का जोर केवल मच्छर बढ़ने के बाद फॉगिंग या अन्य उपाय करने के बजाय उनके प्रजनन स्थलों को पहले ही खत्म करने पर है। इसके लिए घरों, संस्थानों, खाली प्लॉटों, जलस्रोतों और अन्य संभावित स्थानों की लगातार निगरानी की जा रही है।
हालांकि बीमारी की रोकथाम और मरीजों की निगरानी के दौरान कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। आंकड़ों के अनुसार डेंगू के 86 मरीज दिल्ली से बाहर के हैं। इसके अलावा 151 मरीजों के पते अधूरे या गलत पाए गए हैं। मरीजों के सही पते की जानकारी नहीं होने से स्वास्थ्य और फॉगिंग टीमों को उनके घरों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।
मरीजों के घरों तक पहुंचकर आसपास के क्षेत्र में मच्छरों के प्रजनन स्थलों की जांच करना और जरूरत के अनुसार फॉगिंग व एंटी-लार्वा गतिविधियां चलाना बीमारी की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में गलत या अधूरे पते निगरानी व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।
दिल्ली में अगस्त के दौरान मच्छरों की संख्या बढ़ने के बीच निगम की ओर से निगरानी और रोकथाम अभियान को जारी रखा जा रहा है। इस साल अब तक डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मामलों में कमी तथा किसी मौत का सामने नहीं आना राहत की बात है, लेकिन मानसून के दौरान मच्छरों के प्रजनन की स्थिति को देखते हुए आने वाले दिनों में सतर्कता बनाए रखना जरूरी होगा।


