Male Fertility: नियमित योग से बढ़ सकती है पिता बनने की संभावना, एम्स विशेषज्ञों ने बताए वैज्ञानिक कारण
नियमित योगाभ्यास पुरुषों की प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विशेष रूप से उन पुरुषों में, जिनकी समस्या स्पर्म काउंट से अधिक ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, स्पर्म डीएनए डैमेज और मानसिक तनाव से जुड़ी होती है, योग सकारात्मक परिणाम दे सकता है। यह दावा नई दिल्ली स्थित एम्स की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रीमा दादा ने वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर किया है।
डॉ. रीमा दादा के अनुसार नियमित योग, प्राणायाम और मेडिटेशन शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं, जिससे स्पर्म के डीएनए को होने वाला नुकसान घटता है। साथ ही शरीर की कुल एंटीऑक्सीडेंट क्षमता बढ़ती है, टेलोमेयर की लंबाई और टेलोमेरेज की सक्रियता में सुधार होता है तथा एपीजीनोम पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ये सभी बदलाव स्वस्थ शुक्राणुओं के निर्माण और बेहतर प्रजनन क्षमता से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने बताया कि लगातार तनाव की स्थिति में शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे स्पर्म की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और मेडिटेशन जैसे अभ्यास कॉर्टिसोल को कम कर मानसिक तनाव और चिंता घटाते हैं, जिससे पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य को लाभ मिलता है। इसके अलावा योग पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार बढ़ाकर वृषण (टेस्टिस) के सामान्य कार्य में भी सहायता करता है।
विशेषज्ञों ने पुरुष प्रजनन क्षमता के लिए भुजंगासन, धनुरासन, पश्चिमोत्तानासन, सेतु बंधासन और वज्रासन को लाभकारी बताया है। इन आसनों से पेल्विक क्षेत्र में रक्त प्रवाह बेहतर होता है, प्रजनन अंग सक्रिय रहते हैं, हार्मोन संतुलन में मदद मिलती है और शरीर की समग्र कार्यक्षमता में सुधार होता है।
एम्स के अनुसार बेहतर परिणाम के लिए सप्ताह में कम से कम पांच दिन 30 से 45 मिनट तक नियमित योग करना चाहिए। चूंकि स्पर्म बनने की प्रक्रिया लगभग 72 से 90 दिन की होती है, इसलिए कम से कम तीन महीने तक लगातार अभ्यास करने पर सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे सकता है। योग के साथ संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और शराब व धूम्रपान से दूरी रखने पर बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
हालांकि डॉ. रीमा दादा ने स्पष्ट किया कि योग कोई चमत्कारी इलाज नहीं है। यदि किसी व्यक्ति का स्पर्म काउंट अत्यधिक कम है या कोई गंभीर चिकित्सकीय समस्या है, तो उसे डॉक्टर और एंब्रियोलॉजिस्ट की सलाह लेकर उचित उपचार कराना चाहिए। योग को स्वस्थ जीवनशैली और चिकित्सकीय उपचार के साथ अपनाने पर पिता बनने की संभावना बेहतर हो सकती है।


