GIMS Noida: जिम्स में 14 वर्षीय छात्र की मौत पर सख्त रुख, ऑपरेशन में लापरवाही पर डॉक्टरों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश

GIMS Noida: जिम्स में 14 वर्षीय छात्र की मौत पर सख्त रुख, ऑपरेशन में लापरवाही पर डॉक्टरों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश

नोएडा के राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान जिम्स में ऑपरेशन के दौरान 14 वर्षीय छात्र की मौत के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने इस घटना को गंभीर मानते हुए कासना कोतवाली पुलिस को इलाज में लापरवाही बरतने वाले जिम्स के चिकित्सकों के खिलाफ मामला दर्ज कर विस्तृत जांच करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामला मानव मृत्यु से जुड़ा है और प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है, जिसकी वास्तविकता जांच के दौरान सामने आ सकती है।
मामला ग्रेटर नोएडा निवासी सोनू यादव के 14 वर्षीय पुत्र अभिमान यादव से जुड़ा है। पीड़ित पक्ष की ओर से अधिवक्ता रजनीश यादव ने अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल कर बताया कि मई 2024 में अभिमान को पेट दर्द की शिकायत हुई थी। जांच कराने पर डॉक्टरों ने अपेंडिक्स की समस्या बताई। इसके बाद तीन जुलाई 2024 को अभिमान को ग्रेटर नोएडा स्थित जिम्स में भर्ती कराया गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों ने इसे सामान्य ऑपरेशन बताते हुए बच्चे के जल्द स्वस्थ होने का भरोसा दिलाया था।
परिजनों के अनुसार पांच जुलाई 2024 की सुबह करीब 9.30 बजे अभिमान को ऑपरेशन के लिए ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया, जहां जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों की मौजूदगी में सर्जरी की गई। दोपहर करीब 12 बजे अस्पताल प्रशासन ने अचानक परिजनों से खून की मांग की और बताया कि ऑपरेशन के दौरान किसी नस के कट जाने से अत्यधिक रक्तस्राव हो गया है। इसके बाद परिजनों ने तत्काल रक्तदाताओं की व्यवस्था कर खून उपलब्ध कराया।
आरोप है कि इसके बावजूद दोपहर 3.30 बजे तक डॉक्टरों की ओर से बच्चे की स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई और न ही परिजनों को कोई संतोषजनक जवाब मिला। लंबे समय तक जानकारी न मिलने से परेशान स्वजन ने डायल 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस के अस्पताल पहुंचने के बाद शाम करीब 5.30 बजे डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि ऑपरेशन के दौरान गलत नस कट जाने के कारण अभिमान की मौत हो गई है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रार्थना पत्र में ऐसे गंभीर तथ्य सामने आए हैं, जिनका खुलासा केवल निष्पक्ष पुलिस जांच से ही संभव है। इसलिए मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच कराई जानी आवश्यक है। अदालत के आदेश के बाद अब कासना कोतवाली पुलिस जिम्स के संबंधित चिकित्सकों की भूमिका की जांच करेगी।
वहीं इस मामले पर जिम्स प्रशासन की ओर से निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता ने पक्ष रखते हुए कहा कि ऑपरेशन के दौरान बच्चे की हालत अचानक गंभीर हो गई थी और चिकित्सकों ने अपनी ओर से इलाज में हरसंभव प्रयास किए थे। उनके अनुसार इलाज में लापरवाही के आरोप निराधार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत के आदेश की पूरी जानकारी अभी नहीं मिली है, लेकिन जांच में पुलिस को पूरा सहयोग दिया जाएगा।

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