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Working Journalist India: डिजिटल, टीवी, रेडियो पत्रकार अब “वर्किंग जर्नलिस्ट” श्रेणी में, 4 श्रम कोड लागू होते ही बड़ा बदलाव, WJI की लंबी लड़ाई सफल

Working Journalist India: डिजिटल, टीवी, रेडियो पत्रकार अब “वर्किंग जर्नलिस्ट” श्रेणी में, 4 श्रम कोड लागू होते ही बड़ा बदलाव, WJI की लंबी लड़ाई सफल

दिल्ली । वर्किंग जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संजय कुमार उपाध्याय व राष्ट्रीय महासचिव श्री नरेंद्र भंडारी ने कहां हैं कि केंद्र मोदी सरकार द्वारा चारों श्रम कोड के लागू करते ही पत्रकार की परिभाषा का दायरा बढ़ गया है। डिजिटल मीडिया, टीवी, रेडियो के साथी अब औपचारिक रूप से श्रमिक सुरक्षा के दायरे में आ गए हैं। यूनियन ने इसे वर्किंग जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया की ऐतिहासिक जीत बताया है। श्री आज खास बातचीत कर रहे थे। देश में चार नए श्रम कोड (Labour Codes) लागू होते ही पत्रकारिता जगत में एक बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि अब डिजिटल मीडिया, वेब पोर्टल, टीवी चैनल और रेडियो में काम करने वाले पत्रकारों को भी औपचारिक रूप से ‘वर्किंग जर्नलिस्ट’ की श्रेणी में शामिल किया गया है। यह वही मांग थी जिसे वर्किंग जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया (WJI) ने वर्षों से केंद्र में रखकर संघर्ष किया था।

श्री शर्मा ने इसे पत्रकारों के हित में “लंबे संघर्ष की बड़ी जीत” बताया है। उन्होंने इसके लागू होने से क्या बदला गया, उसकी जानकारी देते हुए बताया कि पत्रकार की परिभाषा हुई व्यापक पहले ‘वर्किंग जर्नलिस्ट’ की परिभाषा मुख्यतः अखबारों, प्रिंट मीडिया, समाचार एजेंसियों, तक सीमित थी। अब यह परिभाषा विस्तारित होकर तीन बड़े सेक्टरों को भी शामिल कर चुकी है। उन्होंने बताया कि पहला डिजिटल/ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल, दुसरा टीवी न्यूज़ और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, तीसरा रेडियो/एफएम/सामुदायिक रेडियो पत्रकार है। इससे मीडिया जगत का वह सबसे बड़ा वर्ग जो डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफ़ॉर्म पर न्यूज़ कंटेंट तैयार करता है। अब औपचारिक रूप से श्रमिक संरक्षण के दायरे में आ गया है। श्री शर्मा ने कौन से श्रम कोड लागू हुए और पत्रकारों को क्या फायदा होगा कि जानकारी देते हुए बताया कि पहला वेज कोड (Code on Wages), न्यूनतम वेतन का अधिकार, समय पर और पारदर्शी वेतन भुगतान। समान कार्य के लिए समान वेतन, बोनस और भत्तों पर स्पष्ट नियम, डिजिटल मीडिया में कॉन्ट्रैक्ट / स्ट्रिंगर / प्रोजेक्ट-बेस्ड काम करने वालों के लिए यह सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। उन्होंने बताया कि इस से सामाजिक सुरक्षा कोड (Social Security Code) ESIC, EPFO, मातृत्व लाभ, ग्रेच्युटी जैसी सुविधाओं में पत्रकारों की पात्रता मजबूत अनिश्चित नौकरी और असंगठित कामगार स्थितियों में सुरक्षा फ्रीलांस व गिग पत्रकारों के लिए भी सुरक्षा-जाल की संभावनाएँ बन गई है। उन्होंने तीसरे का जिकर करते हुए बताया कि इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (IR Code) नौकरी की शर्तों में पारदर्शिता, विवाद निवारण प्रणाली मनमानी छंटनी पर रोक, पत्रकार यूनियन की वैधता और अधिकारों में मजबूती, पत्रकार संगठनों को कानूनी मान्यता और संरक्षण इससे मजबूत होता है।

चौथा OSHWC कोड (Occupational Safety, Health & Working Conditions) रिपोर्टिंग के दौरान सुरक्षा व्यवस्था न्यूज़रूम व फील्ड वर्क में सुरक्षित माहौल, अत्यधिक घंटे, जोखिमपूर्ण कवरेज, लाइव ड्यूटी जैसे क्षेत्रों में स्पष्ट मानक, टीवी व डिजिटल रिपोर्टरों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि फील्ड कवरेज में जोखिम अधिक होता है। उन्होंने बताया की WJI क्यों कह रही है, “लंबे संघर्ष की जीत”? उन्होंने बताया कि वर्किंग जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया (WJI) लगातार मांग कर रही थी कि “पत्रकारिता अब सिर्फ़ प्रिंट तक सीमित नहीं है। डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सबसे बड़ा कार्यबल बन चुका है, इसे कानून में जगह मिलनी ही चाहिए। उन्होंने बताया कि वर्किंग जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया कई वर्षों से सरकार को ज्ञापन, धरना–प्रदर्शन करती रही। इसी के साथ WJI श्रम मंत्रालय से संवाद, संसदीय समितियों को सुझाव, नए कोड ड्राफ्टिंग पर आपत्तियाँ ये सभी प्रयास इस बदलाव का आधार बने। श्री शर्मा ने बताया कि इस से पत्रकारों के लिए क्या बदलेगा…?। उन्होंने बताया कि पाँच बड़े प्रभाव जैसे वेतन व अनुबंध में पारदर्शिता, अब चैनल, पोर्टल, एफएम स्टेशन मनमाने कॉन्ट्रैक्ट नहीं बना सकेंगे। नौकरी की सुरक्षा में बढ़ोतरी जैसे छंटनी, कटौती, शोषण—इन पर कानूनी सुरक्षा बढ़ेगी। काम के घंटे और छुट्टियाँ नियंत्रित होंगी। डिजिटल और टीवी में 12–14 घंटे काम सामान्य था, अब नियम लागू होंगे। जोखिमपूर्ण कवरेज में सुरक्षा जैसे भीड़, दंगे, आपदा, चुनाव, अपराध रिपोर्टिंग—इनमें सुरक्षा मानक लागू होंगे। श्री शर्मा ने बताया कि इस से यूनियन की शक्ति बढ़ेगी। WJI जैसी यूनियनें अब अधिक प्रभावी तरीके से पत्रकारों का प्रतिनिधित्व कर सकेंगी। सावधानी की जरूरत— क्या चुनौतियाँ अभी भी बाकी..? कुछ विशेषज्ञों ने चेताया है कि पुराने Working Journalists Act की कुछ विशिष्ट सुरक्षाएँ कमजोर हुई हैं, वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब राज्य सरकारें नियम बनाएँगी।

डिजिटल मीडिया में बड़े पैमाने पर “इंटर्न–फेलो–फ्रीलांस” मॉडल चलता है, इसमें स्पष्टता ज़रूरी है। छोटे पोर्टलों पर लागू करवाना सबसे कठिन होगा। इसलिए यह “पहला बड़ा कदम” है, अंतिम मंज़िल नहीं। श्री शर्मा ने यह भी बताया कि मीडिया सेक्टर में ऐतिहासिक सुधार, पर अमल ही तय करेगा परिणाम। चारों श्रम कोड लागू होने के साथ ही डिजिटल, टीवी और रेडियो पत्रकारों को पहली बार कानूनी रूप से “वर्किंग जर्नलिस्ट” का दर्जा मिलने का रास्ता खुला है। शर्मा ने इस से होने वाले बदलाव की जानकारी देते हुए कहा कि पत्रकारों, यूनियनों और मीडिया संस्थानों, मतलब तीनों के लिए नई संरचना तैयार करता है।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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