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New Delhi : भारत सरकार ने 11 नए अंतरराष्ट्रीय पोर्ट जोड़े, ई-वीजा धारकों के लिए प्रवेश हुआ आसान

New Delhi : ई-वीजा धारक विदेशी नागरिकों के भारत में प्रवेश को और सुगम बनाने के लिए भारत सरकार ने 11 नए अंतरराष्ट्रीय पोर्ट्स को अधिसूचित किया है। इसके साथ ही अब ई-वीजा के जरिए भारत में प्रवेश करने वाले पोर्ट्स की कुल संख्या बढ़कर 88 हो गई है।

नए जोड़े गए 11 पोर्ट्स में 9 लैंड पोर्ट्स और 2 हवाई अड्डे शामिल हैं। इनमें अगरतला, दर्रांगा, गेडे, घोजाडांगा, हरिदासपुर, जयगांव, डावकी, मोरेह, अटारी रोड, भोपाल और तिरुपति शामिल हैं।

सरकार के अनुसार अब ई-वीजा और भी आकर्षक और उपयोगी हो गया है। भारत लगभग 95 प्रतिशत ई-वीजा आवेदन 72 घंटे से भी कम समय में प्रोसेस कर देता है। वर्तमान में भारत कुल वीजाओं का करीब 78 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक रूप में जारी कर रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में वैध विदेशी यात्रियों की सुविधा के लिए वीजा व्यवस्था को उदार, सुव्यवस्थित और सरल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। इसके साथ ही आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तकनीकी बुनियादी ढांचे को भी बेहतर किया गया है।

11 नए पोर्ट्स जुड़ने के बाद अब ई-वीजाधारक विदेशी नागरिक 37 हवाई अड्डों, 38 बंदरगाहों और 13 लैंड पोर्ट्स सहित कुल 88 अंतरराष्ट्रीय पोर्ट्स के माध्यम से भारत में प्रवेश कर सकते हैं।

ई-वीजा सुविधा की शुरुआत 2014 में 43 देशों के नागरिकों के लिए हुई थी। वर्तमान में यह सुविधा 172 देशों के नागरिकों को 17 उप-श्रेणियों में उपलब्ध है। इनमें पर्यटक, बिजनेस, मेडिकल, स्टूडेंट, सम्मेलन, ट्रांजिट और ग्रुप विजिटर वीजा जैसी श्रेणियां शामिल हैं।

बुनियादी ढांचे से आगे: कैसे बदल रहा है भारत के विकास का मॉडल

बुनियादी ढांचे से आगे: कैसे बदल रहा है भारत के विकास का मॉडल

रिपोर्ट: अभिषेक ब्याहुत

नई दिल्ली: भारत के आर्थिक विकास की कहानी को अगर केवल GDP, निवेश या सरकारी योजनाओं के आंकड़ों से समझने की कोशिश की जाए, तो तस्वीर अधूरी रह जाएगी। किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था की असली ताकत इस बात में होती है कि उसके पास लोगों, सामान, ऊर्जा, पूंजी और अवसरों को कितनी तेजी और कुशलता से आगे बढ़ाने की क्षमता है। पिछले करीब बारह वर्षों में भारत में इसी क्षमता को बड़े पैमाने पर मजबूत करने की कोशिश दिखाई देती है। सड़क और रेलवे से लेकर बंदरगाहों, हवाई अड्डों, बिजली, नवीकरणीय ऊर्जा, पानी, स्वास्थ्य, स्टार्टअप और रक्षा उत्पादन तक—कई क्षेत्रों में विस्तार एक साथ हुआ है। इसके साथ ही GST, श्रम सुधार, पुराने कानूनों को हटाने, बैंकिंग क्षेत्र के पुनर्पूंजीकरण और गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों यानी NPAs में कमी जैसे संस्थागत बदलावों ने भी अर्थव्यवस्था के संचालन के ढांचे को प्रभावित किया है। इस बदलाव को केवल नई परियोजनाओं की सूची के रूप में देखना शायद इसकी सबसे बड़ी तस्वीर को नजरअंदाज करना होगा। असली सवाल यह है कि क्या भारत अब उस बुनियादी क्षमता का निर्माण कर रहा है, जिसकी जरूरत एक बड़ी, अधिक औद्योगिक और अधिक वैश्विक अर्थव्यवस्था को होगी।

सड़क और रेल नेटवर्क में बड़ा बदलाव

आंकड़ों के मुताबिक, 2014 से पहले देश में कोई Dedicated Freight Corridor चालू नहीं था। अब 2,843 किलोमीटर का नेटवर्क बताया गया है। एक्सप्रेसवे की लंबाई भी 1,000 किलोमीटर से बढ़कर करीब 7,700 किलोमीटर हो गई है। चार लेन और उससे ज्यादा वाले राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई में भी 45,516 किलोमीटर की बढ़ोतरी बताई गई है।

एयरपोर्ट और मेट्रो का भी विस्तार

आंकड़ों में 2014 में मौजूद 74 एयरपोर्ट के मुकाबले बाद के सालों में 164 नए एयरपोर्ट जुड़ने की बात कही गई है। साथ ही मेट्रो नेटवर्क भी 250 किलोमीटर से बढ़कर करीब 1,250 किलोमीटर बताया गया है। मौजूदा मेट्रो नेटवर्क का 75 प्रतिशत हिस्सा 2014 के बाद तैयार होने का दावा किया गया है।

हाईवे और रेलवे में भी बदली तस्वीर

चार लेन और उससे ज्यादा क्षमता वाले नेशनल हाईवे को लेकर सामने आए आंकड़ों में भी बड़ा अंतर दिखाया गया है. 2014 में ऐसे राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई करीब 18,371 किलोमीटर बताई गई थी. इसके बाद इसमें करीब 45,516 किलोमीटर की वृद्धि का दावा किया गया है. आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा हाई-कैपेसिटी हाईवे नेटवर्क का करीब 60 फीसदी हिस्सा 2014 के बाद जोड़ा गया. रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन में भी तेजी का दावा है. आंकड़ों के अनुसार, 2014 में करीब 21,800 किलोमीटर रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण हुआ था. इसके बाद इलेक्ट्रिफाइड नेटवर्क में करीब 69,800 किलोमीटर की वृद्धि बताई गई है. दावा है कि भारतीय रेलवे के इतिहास में हुए कुल विद्युतीकरण का करीब 69 फीसदी हिस्सा पिछले 12 सालों में पूरा हुआ.

उद्योग और आत्मनिर्भरता का नया चरण

इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार औद्योगिक क्षमता के साथ मिलकर अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। स्टील, कोयला और गैस पाइपलाइन नेटवर्क में वृद्धि इस दिशा में महत्वपूर्ण है। स्टील की जरूरत सड़क, पुल, रेलवे, कारखानों और मशीनरी से लेकर रक्षा उत्पादन तक लगभग हर बड़े औद्योगिक क्षेत्र में होती है। इसी तरह ऊर्जा और गैस की उपलब्धता उद्योगों के विस्तार की बुनियादी जरूरत है। रक्षा क्षेत्र में बदलाव इस कहानी का एक अलग लेकिन महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत के रक्षा निर्यात में पिछले वर्षों में तेज वृद्धि हुई है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, रक्षा निर्यात 2013-14 के करीब ₹686 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। यह केवल निर्यात का आंकड़ा नहीं है। इसका अर्थ यह भी है कि भारत घरेलू रक्षा उत्पादन की क्षमता बढ़ाने और वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। यदि यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो इसके परिणाम रक्षा क्षेत्र से बाहर भी दिखाई दे सकते हैं—निजी उद्योग, MSMEs, स्टार्टअप, अनुसंधान और उच्च-कौशल रोजगार के रूप में।

नौकरी खोजने वाली पीढ़ी से नौकरी पैदा करने वाली पीढ़ी तक?

भारत के आर्थिक बदलाव की सबसे दिलचस्प कहानियों में से एक स्टार्टअप इकोसिस्टम की है। 2014 में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या लगभग 500 थी। आज यह संख्या 2 लाख से अधिक हो चुकी है। यह वृद्धि केवल एक सरकारी योजना की सफलता का आंकड़ा नहीं है। यह भारत की बदलती उद्यमशील मानसिकता का संकेत भी है। आज का युवा केवल सरकारी नौकरी या पारंपरिक कॉरपोरेट रोजगार को ही सफलता का रास्ता नहीं मानता। टेक्नोलॉजी, फिनटेक, हेल्थटेक, ई-कॉमर्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में नई कंपनियां उभर रही हैं। हालांकि, स्टार्टअप की संख्या बढ़ना और सफल व्यवसायों की संख्या बढ़ना एक ही बात नहीं है। असली चुनौती इन कंपनियों को टिकाऊ, रोजगार पैदा करने वाले और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी व्यवसायों में बदलने की होगी।

 

 

 

Uttar Pradesh : हापुड़ में जर्जर मकान का लिंटर गिरा, मलबे में दबा युवक

Hapur News : हापुड़ के मोहल्ला संभुपुरा में शनिवार देर रात एक जर्जर मकान का लिंटर अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे में मकान के अंदर सो रहा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद पूरे घर में चीख-पुकार मच गई।

मिली जानकारी के अनुसार, शंभूपुरा निवासी नंदकिशोर रात के समय अपने घर में सो रहे थे। बताया जा रहा है कि मकान का लिंटर काफी समय से जर्जर हालत में था। रात में अचानक लिंटर के एक हिस्से का भारी प्लास्टर कमजोर होकर नीचे आ गिरा। जिस समय मलबा गिरा उस वक्त नंदकिशोर उसी स्थान पर सो रहे थे, जिसके कारण वह मलबे की चपेट में आकर दब गए।

लिंटर गिरने की तेज आवाज सुनकर परिवार के लोग और आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। परिजनों और पड़ोसियों ने तुरंत मलबा हटाना शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद घायल नंदकिशोर को मलबे से बाहर निकाला गया। हादसे में उनके पैर में गंभीर चोट आई थी। इसके बाद परिजन उन्हें तुरंत उपचार के लिए अस्पताल ले गए।

अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच के बाद नंदकिशोर के पैर में फ्रैक्चर की पुष्टि की। इसके बाद उनका उपचार शुरू कर दिया गया। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

इस हादसे के बाद परिवार में दहशत का माहौल है। गनीमत रही कि मलबे की चपेट में केवल नंदकिशोर ही आए। यदि उस समय कोई अन्य सदस्य वहां होता तो हादसा और गंभीर हो सकता था।

Uttar Pradesh : क्रांतिकारियों को भुलाने के कारण हुआ कांग्रेस का पतन- सीएम योगी

Siddharthnagar/Lucknow : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि आजादी के बाद सत्ता में आए लोगों ने संस्थानों का नाम अपने खानदान के नाम पर रखा, लेकिन देश के क्रांतिकारियों और महापुरुषों के स्मारकों की सुध नहीं ली। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाकउल्लाह खान, चंद्रशेखर आजाद, वीर सावरकर, महाराज सुहेलदेव समेत अनेक महापुरुषों को भुला दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्ता का मद कितना खतरनाक होता है, इसे कांग्रेस के पतन से समझा जा सकता है। कांग्रेस ने क्रांतिकारियों को भुलाया तो आज देश के युवाओं ने कांग्रेस को पूरी तरह दफन कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब पूरी तरह नकारात्मक राजनीति की राह पर चल रही है।

Uttar Pradesh : एसआरएन अस्पताल का नाम ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर करने की मांग, चौथे दिन भी अनिश्चितकालीन धरना जारी

Prayagraj/Lucknow : काकोरी केस के महानायक अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान स्थल को राष्ट्रीय गौरव दिलाने और स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) का नाम उनके नाम पर करने की मांग को लेकर महुआ डाबर संग्रहालय के नेतृत्व में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को चौथे दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों ने कहा कि काकोरी ट्रेन एक्शन की शताब्दी के अवसर पर ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान स्थल को उसकी ऐतिहासिक पहचान और राष्ट्रीय सम्मान मिलना चाहिए। साथ ही आम लोगों से 9 अगस्त को काकोरी ट्रेन एक्शन दिवस पर मलाका जेल पहुंचकर अमर शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित करने की अपील की गई।

छात्र-युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दिया समर्थन
एसआरएन अस्पताल परिसर में चल रहे धरने में शनिवार को दिनभर छात्र-युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक पहुंचते रहे। लोगों ने आंदोलन को समर्थन देते हुए अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान अस्पताल का नाम उनके नाम पर करने की मांग के समर्थन में नारे भी लगाए गए।

धरने में वक्ताओं ने कहा कि देश आजादी का अमृत काल मना रहा है और वर्ष 2026 ऐतिहासिक काकोरी ट्रेन एक्शन की शताब्दी का वर्ष है। ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर काकोरी केस के महानायक ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान स्थल और उनसे जुड़ी क्रांतिकारी विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलनी चाहिए।

मलाका जेल में हुआ था ठाकुर रोशन सिंह का बलिदान
महुआ डाबर संग्रहालय के महानिदेशक एवं क्रांतिकारी-शहीद वंशज डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष करते हुए महान क्रांतिकारी ठाकुर रोशन सिंह का बलिदान प्रयागराज की मलाका जेल में हुआ था। उस दौर में मलाका जेल की गिनती संयुक्त प्रांत की कुख्यात जेलों में होती थी। उन्होंने कहा कि आज उसी ऐतिहासिक बलिदान स्थल पर स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय स्थापित है, लेकिन इस स्थान से जुड़ी क्रांतिकारी विरासत की पहचान धीरे-धीरे धूमिल होती जा रही है। ऐसे में इस ऐतिहासिक स्थल को ठाकुर रोशन सिंह के नाम से पहचान दिलाना उनके बलिदान के प्रति सच्चा सम्मान होगा।

‘एसआरएन का नाम तत्काल ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर हो’
डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि महुआ डाबर संग्रहालय की स्पष्ट मांग है कि एसआरएन अस्पताल का नाम तत्काल अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर किया जाए। काकोरी ट्रेन एक्शन की शताब्दी के वर्ष में भी यदि क्रांतिकारियों के सम्मान और उनकी स्मृतियों के संरक्षण को लेकर सरकारें गंभीर कदम नहीं उठाती हैं तो स्वतंत्रता आंदोलन के शहीदों के प्रति दी जाने वाली श्रद्धांजलि महज औपचारिकता बनकर रह जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए देश की आजादी का मार्ग प्रशस्त किया, आज उनकी स्मृतियों और विरासत को सम्मान दिलाने के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।

बलिदान स्थल की ऐतिहासिक पहचान कायम रखना जरूरी
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता दुबे ने कहा कि अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के पवित्र बलिदान स्थल का संरक्षण और उसकी ऐतिहासिक पहचान को कायम रखना बेहद जरूरी है। महान क्रांतिकारी की विरासत और धरोहर को संरक्षित करने का संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक उन्हें उनके योगदान के अनुरूप गौरवशाली सम्मान नहीं मिल जाता।

9 अगस्त को मलाका जेल पहुंचने की अपील
महुआ डाबर संग्रहालय के प्रतिनिधि डॉ. अवनीश सिंह ने आम नागरिकों से 9 अगस्त को काकोरी ट्रेन एक्शन दिवस के अवसर पर मलाका जेल पहुंचकर काकोरी केस के क्रांतिवीर अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि 9 अगस्त भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की वह ऐतिहासिक तारीख है, जिसने ब्रिटिश शासन की नींव हिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने युवाओं, नागरिकों और सामाजिक संगठनों से ठाकुर रोशन सिंह के सम्मान और उनके बलिदान स्थल की ऐतिहासिक पहचान कायम रखने की मांग को समर्थन देने का आह्वान किया।

धरने में प्रमुख रूप से राजन तिवारी, हिमांशु सिंह, विक्की यादव, सात्विक सिंह, अमित गिरी, चंदन पासी, आइश पटेल, सम्राट राय, अनुराग सिंह, अमन तिवारी और प्रत्यूष सिंह समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

New Delhi : देश में सबसे ज्यादा अन्याय आदिवासी समाज के साथ हुआ, सिर्फ ‘‘आप’’ लड़ रही आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई- केजरीवाल

New Delhi : आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने विश्व आदिवासी दिवस पर देश भर के आदिवासी समाज को बधाई देते हुए कहा कि आजाद भारत में सबसे ज्यादा अन्याय आदिवासी समाज के साथ हुआ है। दूसरी सभी पार्टियों ने आदिवासी समाज के जल, जंगल और ज़मीन पर डाका डाला और उनसे छीन कर बड़ी-बड़ी कंपनियों को दे दिया। केवल आम आदमी पार्टी ही आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए लड़ रही है। आज आदिवासी नेता चैतर वसावा एक झूठे केस में जेल में हैं, क्योंकि वे आदिवासी समाज की आवाज़ उठा रहे थे। हम सभी उनके जल्द बाहर आने के लिए प्रार्थना करते हैं।

अरविंद केजरीवाल ने एक वीडियो संदेश जारी कर आदिवासी समाज के लोगों से कहा कि पिछले 75 साल में आदिवासी समाज के साथ सबसे ज्यादा अन्याय हुआ है। 75 साल में देश ने तरक्की की, बाकी सभी समाज के लोगों ने तरक्की की, लेकिन आदिवासी समाज पीछे रह गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आदिवासी समाज को जानबूझकर पीछे रखा गया। उनके जितने भी संसाधन थे, उन पर डाका डाला गया। जल, जंगल और जमीन आदिवासी समाज का पैदाइशी अधिकार है, लेकिन इन्हें समाज से छीनकर बड़ी-बड़ी कंपनियों को दे दिया गया क्योंकि बाकी पार्टियों के नेता चोर और भ्रष्टाचारी थे।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी आपके अधिकारों के लिए लड़ रही है और इसके लिए कितनी ही बार हमारे नेता जेल गए हैं। चैतर वसावा आदिवासी समाज का बेटा और भाई है। वह आदिवासी समाज को हक दिलवाने के लिए न जाने कितनी बार जेल गए हैं। ये लोग पेसा कानून तो ले आए, लेकिन उसे लागू नहीं किया। समाज और ग्राम सभा से पूछे बिना ही ये सारे निर्णय ले लेते हैं। आज चैतर वसावा जेल में है क्योंकि वह आदिवासी समाज के लिए लड़ रहा है। वह जल्दी बाहर आए, इसके लिए प्रार्थना करना।

Uttar Pradesh : हापुड़ में छत से गिरकर 11 वर्षीय बच्चे की मौत, मोहल्ले में शोक की लहर

Hapur News : हापुड़ में नगर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला चांद खां सराय में शनिवार शाम छत से गिरकर 11 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। बच्चा घर की छत पर पतंग उड़ा रहा था। इसी दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई।

चांद खां सराय निवासी शेरू का 11 वर्षीय बेटा अरमान शनिवार शाम करीब 7 बजे घर की छत पर पतंग उड़ा रहा था। इसी दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह छत से नीचे जा गिरा। गंभीर चोट लगने के बाद परिजन उसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके।

अरमान की मौत की खबर मिलते ही परिवार में गहरा दुख छा गया। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। मोहल्ले में शोक का माहौल रहा। परिजनों और पड़ोसियों के लिए बच्चे की अचानक हुई मौत गहरा सदमा बन गई।

रविवार सुबह करीब 10 बजे अरमान को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में मोहल्ले के लोग शामिल हुए। इस दौरान पूरे इलाके में मातम का माहौल रहा और परिवार को सांत्वना देने के लिए लोग पहुंचते रहे।

Punjab : आप’ आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार, 117 सीटों पर बूथ स्तर की तैयारियां शुरू

Chandigarh : आम आदमी पार्टी (आप) ने पूरे राज्य में अपनी संगठनात्मक गतिविधियों को तेज़ करते हुए आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है, जिसमें पार्टी के बूथ स्तर नेटवर्क को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं और वॉलंटियर्स को चुनाव मैदान के लिए तैयार करने पर खास ध्यान दिया जा रहा है। इसी कड़ी में, आप के सीनियर नेता और पंजाब इंचार्ज मनीष सिसोदिया ने पार्टी कार्यकर्ताओं और वॉलंटियर्स के साथ जिलेवार मीटिंग करना शुरू कर दिया है।

ये मीटिंग ज़मीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने और पंजाब सरकार के काम को घर-घर तक पहुंचाने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को तैयार करने पर फोकस हैं। इस संगठनात्मक कवायद के तहत, पंजाब के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों में बूथ इंचार्ज की मीटिंग होंगी।

पटियाला ग्रामीण के अपने दौरे के दौरान मनीष सिसोदिया ने संगठन के साथियों और कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग की, जिसमें आने वाली तैयारियों पर खुलकर चर्चा हुई। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ अपनी बातचीत को याद करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा, “अपने साथियों के बीच बैठना एक अनोखा अनुभव था, जिससे पुरानी यादें ताज़ा हो गईं और आगे के सफर के लिए जोश दोगुना हो गया।”

पार्टी की संगठन टीमों को भगवंत मान सरकार द्वारा पिछले 4.5 सालों में किए गए कामों को सीधे लोगों तक पहुंचाने के लिए तैयार किया जा रहा है। कैंपेन का मुख्य फोकस सरकार की ज़रूरी पहलों को घर-घर तक पहुंचाना होगा, जिसमें मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना, 300 यूनिट मुफ़्त बिजली योजना, खेती के लिए नहर का पानी और ‘मावां धियां सत्कार योजना’ के तहत महिलाओं को दी जा रही आर्थिक मदद शामिल है।

चल रहे अभ्यास के तहत पटियाला में बूथ इंचार्जों की एक मीटिंग भी हुई, जिसमें कैबिनेट मंत्री डॉ. बलबीर सिंह और पार्टी के सीनियर नेता शामिल हुए। इसी तरह, भदौर में भी बूथ इंचार्जों की मीटिंग हुई, जिसमें विधायक लाभ सिंह उगोके और पार्टी के सीनियर नेता शामिल हुए।

इन मीटिंग के ज़रिए आप अपने बूथ स्तर के संगठन को मज़बूत कर रही है और अपने वर्करों और वॉलंटियर्स को आने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिए सभी 117 विधानसभा सीटों पर लोगों से जुड़े रहने और पंजाब सरकार के काम को घर-घर तक पहुंचाने के लिए तैयार कर रही है।

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Punjab : युद्ध नशेआं विरुद्ध’ को मज़बूत करने के लिए आप पंजाब यूथ विंग ने मोहाली में ‘पंजाब यूथ रन 2026’ का किया आयोजन

Mohali/Chandigarh : पंजाब के युवाओं को नशों से दूर रखने की एक बड़े प्रयास के तहत आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब यूथ विंग ने युद्ध नशेआं विरुद्ध मुहिम के तहत मोहाली में 5.5 किलोमीटर की ‘पंजाब यूथ रन 2026’ का आयोजन किया, जिसमें हज़ारों युवाओं और खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और स्पोर्ट्स, फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल के पक्ष में एक मज़बूत मैसेज दिया गया।

इस समारोह को हेल्दी और नशा मुक्त पंजाब को बढ़ावा देने की एक बड़ी पहल बताते हुए, आप पंजाब यूथ विंग के प्रधान और विधायक मनजिंदर सिंह लालपुरा ने कहा, “मैराथन सुबह गुरुद्वारा श्री अंब साहिब से शुरू हुई और पंजाब के अलग-अलग हिस्सों से हज़ारों युवाओं, खिलाड़ियों, महिलाओं, सीनियर सिटिजन और लोगों ने जोश के साथ हिस्सा लिया। प्रतिभागियों को टी-शर्ट और पार्टिसिपेशन मेडल दिए गए, जबकि विजेताओं को ₹11,000 तक के कैश प्राइज़ दिए गए।”

इतनी बड़ी संख्या में आने के लिए प्रतिभागियों का धन्यवाद करते हुए, मनजिंदर सिंह लालपुरा ने कहा, “इस रिस्पॉन्स से पता चला है कि पंजाब के लोग एक हेल्दी, रंगीन और ड्रग-फ्री पंजाब देखना चाहते हैं। यह समारोह सिर्फ़ एक राजनीतिक समारोह नहीं था बल्कि पंजाब और उसके लोगों के लिए एक पहल थी।”

यूथ विंग की योजनाओं के बारे में बताते हुए मनजिंदर सिंह लालपुरा ने कहा, “यूथ विंग पंजाब के दूसरे हिस्सों जैसे अमृतसर, पटियाला, बठिंडा और लुधियाना में भी ऐसे मैराथन समारोहों का आयोजन करेगा, ताकि फिटनेस, स्पोर्ट्स और नशा मुक्त पंजाब का संदेश राज्य के कोने-कोने तक पहुंच सके। लोगों के लगातार सपोर्ट से पंजाब के लिए एक नई पॉजिटिव लहर बनेगी।”

यूथ विंग टीम और प्रबंधकों को बधाई देते हुए आप सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर ने कहा, “मैं यूथ विंग टीम, प्रधान मनजिंदर सिंह लालपुरा, वाइस प्रधान वीर दविंदर सिंह और ऑर्गनाइज़र को बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को एक प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए बधाई देता हूं। युवाओं को खेल के मैदानों से जोड़ना और फिटनेस को बढ़ावा देना ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में सबसे ज़रूरी कदमों में से एक है।

आप सरकार के स्पोर्ट्स पर खास फोकस के बारे में बताते हुए, मीत हेयर ने कहा, “जब मैंने खेल विभाग का पद संभाला था, तब राज्य का स्पोर्ट्स बजट करीब ₹150 करोड़ था, जो आज बढ़कर करीब ₹1,800 करोड़ हो गया है। यह बड़ी बढ़ोतरी सरकार के इस प्रतिबद्धता को दिखाती है कि वह पंजाब के युवाओं को स्पोर्ट्स में हिस्सा लेने के ज़्यादा से ज़्यादा मौके देना चाहती है।”

प्रतिभागियों से फिटनेस को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनाने की अपील करते हुए, मीत हेयर ने कहा, “मैराथन को सिर्फ़ एक दिन की एक्टिविटी न समझें। चलना, दौड़ना और एक्सरसाइज़ को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का रेगुलर हिस्सा बनाएं। एक मज़बूत पंजाब और एक हेल्दी इंडिया बनाने के लिए एक हेल्दी समाज बहुत ज़रूरी है।”

यूथ विंग और पूरी प्रशासनिक टीम को बधाई देते हुए, आप सांसद मालविंदर सिंह कंग ने कहा, “फिटनेस और फिजिकल एक्टिविटीज़ हर किसी की ज़िंदगी का ज़रूरी हिस्सा बननी चाहिए। मैं इस मैराथन में शामिल होने वाले हज़ारों हिस्सा लेने वालों की तारीफ़ करता हूँ।”

ऐसी पहलों की अहमियत पर ज़ोर देते हुए, मालविंदर सिंह ने कहा, “युवाओं को स्पोर्ट्स और हेल्दी लाइफस्टाइल की ओर लाने वाली पहल एक मज़बूत और ड्रग-फ्री पंजाब बनाने में खास तौर पर ज़रूरी हैं। मैं यूथ विंग की लीडरशिप, ऑर्गनाइज़र और प्रतिभागियों को उनके जोश के साथ हिस्सा लेने के लिए धन्यवाद देता हूँ।”

इस मुहिम को पूरे पंजाब में ले जाने का अपना वादा दोहराते हुए, आप नेताओं ने कहा, “स्पोर्ट्स, फिटनेस, हेल्दी लाइफस्टाइल और पंजाब को ड्रग-फ्री बनाने के आम इरादे को बढ़ावा देने के लिए पूरे पंजाब में ऐसे समारोह आयोजित किए जाएँगे।”

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Punjab : ’मुख्यमंत्री सेहत योजना’ ने 10 प्रमुख प्रक्रियाओं के तहत 2.44 लाख मरीज़ों को दिया कैशलेस उपचार, ₹316.50 करोड़ से अधिक ख़र्च

Chandigarh : गंभीर बीमारी केवल मरीज़ के स्वास्थ्य की परीक्षा नहीं लेती, बल्कि अक्सर पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति को भी झकझोर देती है। भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना पंजाब में इस स्थिति को लगातार बदल रही है और महँगे चिकित्सा उपचार की लागत को परिवारों की चिंता से बाहर करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

आंकड़े खुद पूरी कहानी बयाँ करते हैं। योजना के तहत सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली प्रमुख 10 चिकित्सा प्रक्रियाओं में ही अब तक 2,44,468 कैशलेस उपचार उपलब्ध करवाए जा चुके हैं, जिन पर ₹316.50 करोड़ से अधिक का ख़र्च किया गया है। सप्ताह में कई बार डायलिसिस की आवश्यकता वाले मरीज़ों से लेकर हृदय की सर्जरी, घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) या आपातकालीन सीज़ेरियन डिलीवरी करवाने वाली महिलाओं तक—योजना ऐसे उपचारों को कवर कर रही है, जिनका ख़र्च कई परिवारों के लिए वहन करना मुश्किल हो सकता था।

यह पैटर्न कोई संयोग नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनियाभर में स्वास्थ्य प्रणालियाँ हृदय रोग, डायबिटीज़ और किडनी संबंधी विकारों जैसी दीर्घकालिक बीमारियों में तेज़ वृद्धि देख रही हैं। पंजाब भी इससे अलग नहीं है। योजना के तहत डायलिसिस, हृदय उपचार और जोड़ प्रत्यारोपण (जॉइंट रिप्लेसमेंट)की बढ़ती माँग ऐसे स्वास्थ्य तंत्र को दर्शाती है, जो ऐसी बीमारियों की बढ़ती चुनौती का सामना कर रहा है, जो एक बार अस्पताल जाने से समाप्त नहीं होतीं; बल्कि इनके लिए निरंतर, विशेषज्ञ और अक्सर महँगे उपचार की आवश्यकता होती है।

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA), पंजाब, के आंकड़ों के अनुसार, क्रॉनिक हीमोडायलिसिस, योजना के तहत सबसे अधिक ली जाने वाली प्रक्रिया बनी हुई है। कुल 1,87,656 डायलिसिस सत्र, जिनकी लागत ₹30.65 करोड़ से अधिक है, उपलब्ध करवाए जा चुके हैं, जिससे यह सुनिश्चित किया गया है कि क्रॉनिक किडनी रोग से जूझ रहे मरीज़ हर बार अस्पताल जाने के लिए पैसे जुटाने की लगातार चिंता किए बिना अपना उपचार जारी रख सकें।

योजना के तहत 17,698 लैप्रोस्कोपिक गॉल ब्लैडर सर्जरी भी की गई हैं, जो दूसरी सबसे अधिक करवाई जाने वाली प्रक्रिया है। इसके बाद 10,751 टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी हुई हैं, जिससे हज़ारों बुज़ुर्ग मरीज़ों को दोबारा चलने-फिरने और आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिली है। इसके अलावा, 9,317 महिलाओं को कैशलेस सीज़ेरियन डिलीवरी की सुविधा मिली, जिससे परिवारों पर उस महत्त्वपूर्ण समय में पड़ने वाला आर्थिक दबाव कम हुआ, जब उन्हें सबसे अधिक सुरक्षा और सहायता की आवश्यकता होती है।

हृदय उपचार भी योजना का एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है। कुल 8,734 मरीज़ों की पर्क्यूटेनियस ट्रांसल्यूमिनल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी (PTCA) के साथ डायग्नोस्टिक एंजियोग्राफी की गई, जबकि 554 मरीज़ों की कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग (CABG) की गई, जिससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिली कि लागत के कारण जीवनरक्षक हृदय उपचार में देरी न हो।

योजना के तहत किडनी स्टोन के उपचार के लिए 5,770 पर्क्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी (PCNL) प्रक्रियाएँ, 2,247 लोअर यूरेटर सर्जरी, 911 सीमेंटलेस टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी और 830 रेडिकल सर्जिकल प्रक्रियाएँ भी कवर की गई हैं। यह विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं में उन्नत और महँगे उपचार उपलब्ध करवाने की योजना की क्षमता को दर्शाता है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “किसी भी स्वास्थ्य कार्यक्रम की वास्तविक सफलता का पैमाना कागज़ों पर दर्ज लाभार्थियों की संख्या नहीं, बल्कि उन परिवारों की संख्या है, जिन्हें आर्थिक संकट में पड़े बिना समय पर इलाज मिलता है। किसी स्वास्थ्य योजना की सफलता इसके द्वारा बदली गई ज़िंदगियों में दिखाई देती है।ये आंकड़े उन हज़ारों परिवारों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिन्हें अस्पताल के बिलों की चिंता किए बिना गुणवत्तापूर्ण उपचार मिला। चाहे आजीवन डायलिसिस की आवश्यकता वाला मरीज़ हो, नी रिप्लेसमेंट करवाने वाला बुज़ुर्ग व्यक्ति हो , सुरक्षित सीज़ेरियन डिलीवरी की आवश्यकता वाली महिला हो या आपातकालीन हृदय उपचार की ज़रूरत वाला मरीज़ हो —मुख्यमंत्री सेहत योजना यह सुनिश्चित कर रही है कि आर्थिक बाधाएँ स्वास्थ्य सेवा हासिल करने में कभी रुकावट न बनें।”

उन्होंने कहा कि योजना के तहत कवर की जाने वाली विभिन्न चिकित्सा प्रक्रियाएँ पंजाब में ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने के प्रयासों को दर्शाती हैं जो केवल सामान्य उपचार तक सीमित नहीं है बल्कि गंभीर और जटिल बीमारियों के महँगे इलाज में भी मरीज़ों को सहायता प्रदान करने में सक्षम है।

आंकड़ों से परे, यह डेटा एक बड़े बदलाव की ओर भी संकेत करता है। अधिक लोग आर्थिक रूप से सुलभ उपचार के कारण दीर्घकालिक बीमारियों से उबर रहे हैं। अधिक बुज़ुर्ग मरीज़ दोबारा चलने-फिरने में सक्षम हो रहे हैं। अधिक महिलाओं को अस्पतालों में मातृ स्वास्थ्य सेवाएँ मिल रही हैं और अधिक परिवार अस्पताल के बिलों के लिए पैसे जुटाने के बजाय मरीज़ के स्वस्थ होने पर ध्यान केंद्रित कर पा रहे हैं।

योजना के विस्तार के साथ यह पंजाब के सबसे मज़बूत सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में से एक के रूप में उभर रही है, जो केवल स्वास्थ्य उपचार के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं करवाती, बल्कि गंभीर बीमारी के कारण परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक झटके से भी उन्हें बचाने का काम कर रही है।