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Bihar : प्रजातंत्र चौक पर महिला सिपाही से अभद्रता, दो युवक हिरासत में, शराबबंदी पर उठे सवाल

Nawada (मृत्युंजय) : शहर के प्रजातंत्र चौक के पास महिला सिपाही के साथ अभद्रता का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में वर्दी में मौजूद महिला सिपाही के साथ दो युवक कथित रूप से बदसलूकी और हंगामा करते दिखाई दे रहे हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों युवक नशे की हालत में थे और महिला सिपाही से उलझ गए। वीडियो में महिला सिपाही युवकों को डांटते हुए कहती सुनाई दे रही है कि तुम मर्दों से जाकर लड़ो, महिला पर क्यों आ रहे हो। इसके बावजूद दोनों युवक मौके पर हंगामा करते रहे।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों युवकों को हिरासत में लेकर थाने ले गई। पुलिस ने बताया कि दोनों की शराब के नशे में होने की जांच कराई जा रही है। आरोप है कि नशे में धुत होकर युवकों ने सरकारी काम में बाधा डालते हुए महिला सिपाही के साथ अभद्र व्यवहार किया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित महिला सिपाही नवादा में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जानी जाती हैं और उन्हें जिला प्रशासन की ओर से कई बार सम्मानित किया जा चुका है।

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बिहार में लागू शराबबंदी कानून को लेकर बहस छिड़ गई है। यूजर्स ने सवाल उठाया है कि अगर शराबबंदी प्रभावी है तो सार्वजनिक स्थानों पर नशे की हालत में लोग कैसे पहुंच रहे हैं। लोगों ने महिला सिपाही के साथ हुई घटना की निंदा करते हुए आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

Bihar : गंडक और पहाड़ी नदियों के उफान से दर्जनों गांव जलमग्न, जनजीवन अस्त-व्यस्त

West Champaran (मृत्युंजय) : जिले के कई प्रखंडों में पहाड़ी नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। गंडक नदी में पानी बढ़ने से बगहा के लक्ष्मीपुर पंचायत के चकदहवा गांव में घरों में पानी घुस गया है। लोग अपना सामान लेकर ऊंची जगहों की ओर पलायन कर रहे हैं।

योगापट्टी और नौतन प्रखंड में गंडक के बढ़े पानी से कई जगह सड़कें धंस गई हैं और बांध टूटने से दर्जनों गांवों का संपर्क टूट गया है। योगापट्टी के चौमुख पंचायत में कच्ची सड़कों पर पानी भर जाने के बाद ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से चंदा इकट्ठा कर एक लंबा चचरी पुल बनाया है।

रामनगर प्रखंड की स्थिति सबसे गंभीर है। यहां बनकटवा, करमइया और नौरंगिया पंचायतों के 22 गांव हर बारिश के बाद आधा दर्जन नदियों के उफान के बीच फंस जाते हैं। मजबूरी यह है कि आज तक इन नदियों पर पुल नहीं बना है। बरसात से पहले लोग घर का जरूरी सामान पहले से खरीदकर रख लेते हैं, लेकिन आपात स्थिति में नदी पार करना उनके लिए जीवन और मौत के बीच का संघर्ष बन जाता है। रामनगर के पथरी और चुड़ीहरवा के बीच नदी में उफान के दौरान लोगों को चार-चार घंटे किनारे बैठकर अन्य राहगीरों के इकट्ठा होने का इंतजार करना पड़ता है, ताकि एक-दूसरे के सहारे नदी पार की जा सके।

नौतन के बैरिया क्षेत्र में गंडक के पानी से सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो गई है। रामनगर में कापन, हारहा, खुर्द और मसान नदी भी उफान पर हैं। जिला प्रशासन ने प्राकृतिक आपदा से संबंधित जानकारी के लिए सहायता नंबर जारी किया है। अधिकारियों के अनुसार रामरेखा और हारहा नदी में डूबने से अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है।

नदियों के रौद्र रूप से रामनगर, बगहा, योगापट्टी और नौतन प्रखंड के गांवों में सड़कें टूटी हैं, संपर्क मार्ग जलमग्न हैं और खेत पानी में डूबे हैं। ग्रामीणों ने पुल और पक्के संपर्क मार्ग की मांग की है ताकि हर साल आने वाली इस मुसीबत से राहत मिल सके।

Bihar : मुजफ्फरपुर में बागमती का जलस्तर बढ़ने से कटरा के निचले इलाकों में बाढ़, स्कूल और घरों में घुसा पानी

Muzaffarpur (मृत्युंजय) : बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में बागमती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से कटरा प्रखंड के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया है। बकुची गांव में एक दर्जन से अधिक घर जलमग्न हो गए हैं। बकुची प्राथमिक विद्यालय और नवादा माध्यमिक विद्यालय के परिसर में भी पानी भर जाने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

बढ़ते जलस्तर के कारण बकुची घाट पर बना पीपा पुल दूसरे दिन भी बंद रहा। इसके बावजूद कई लोग जान जोखिम में डालकर उसी रास्ते से आवाजाही करते दिखे। नदी किनारे सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि भी पानी में डूब गई है।

नवादा के पास बागमती नदी के मोड़ पर कटाव जारी है। कटाव के चलते बेनीबाद-औराई मुख्य सड़क पर खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन ने बचाव के लिए मिट्टी से भरी बोरियां तो रखवाई हैं, लेकिन यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।

कुछ दिन पहले डीएम कुमार गौरव ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए थे। इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने के साथ स्थिति लगातार बिगड़ रही है।

बाढ़ प्रभावित ग्रामीण शांति देवी और देवकली देवी ने बताया कि गुरुवार देर रात से पानी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। घरों में पानी घुस गया है और खाना बनाने तक में दिक्कत हो रही है। उन्होंने प्रशासन से जल्द राहत उपलब्ध कराने की मांग की है।

Uttar Pradesh : हापुड़ में नाबालिग से छेड़छाड़ के मामले में दोषी को 5 साल की सजा और 15 हजार रुपये का जुर्माना

Hapur News : हापुड़ में एडीजे पॉक्सो एक्ट द्वितीय न्यायालय ने गढ़मुक्तेश्वर कोतवाली क्षेत्र में नाबालिग से छेड़छाड़ के मामले में आरोपी को पांच वर्ष के कठोर कारावास और 15 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

अभियोजन के अनुसार वर्ष 2023 में गढ़मुक्तेश्वर थाना क्षेत्र की एक महिला ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि उनके मोहल्ले में विकास नाम का युवक किराए पर रहता था। उनकी नाबालिग बेटी जब किसी काम से घर से बाहर निकली तो आरोपी ने उसे रोक लिया और उसके साथ छेड़छाड़ की। आरोप है कि आरोपी लड़की से अश्लील बातें भी करता था, जिससे वह घर से बाहर निकलने में डरने लगी थी। पीड़िता ने घर पहुंचकर परिजनों को पूरी बात बताई। इसके बाद महिला अपनी बेटी के साथ थाने पहुंची और पुलिस से शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी विकास को गिरफ्तार कर लिया। विवेचना पूरी कर पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।

बृहस्पतिवार को मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट द्वितीय अवनीश कुमार राय ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर आरोपी को दोषी पाया। न्यायालय ने उसे पांच वर्ष की सजा के साथ 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

Bihar : राज्यपाल ने पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद सदस्य मनोनीत किया, मंत्री पद की संवैधानिक उलझन समाप्त

Patna (मृत्युंजय) : बिहार की राजनीति में गुरुवार को एक अहम घटनाक्रम हुआ। राज्यपाल ने अधिसूचना जारी कर पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को बिहार विधान परिषद का सदस्य मनोनीत कर दिया है। इसके साथ ही उनके मंत्री पद को लेकर बनी संवैधानिक उलझन भी समाप्त हो गई है।

दीपक प्रकाश उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं और भाजपा कोटे से बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। मंत्री बनने के बावजूद वे किसी सदन के सदस्य नहीं थे। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से सवाल किया था कि बिना सदन का सदस्य बने कोई व्यक्ति मंत्री पद पर कैसे बना रह सकता है। अब राज्यपाल के मनोनयन के बाद उनके मंत्री पद पर बने रहने का मार्ग साफ हो गया है और वे अगले छह वर्ष तक विधान परिषद सदस्य के रूप में कार्य करेंगे।

यह मनोनयन ऐसे समय में हुआ है जब कुछ दिन पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उसी रिक्त सीट पर दीपक प्रकाश को नामित किया गया है। राजनीतिक गलियारों में इसे सरकार की रणनीति और संगठनात्मक संतुलन दोनों से जोड़कर देखा जा रहा है। पंचायती राज विभाग को बिहार में ग्रामीण विकास की रीढ़ माना जाता है। इस विभाग के मंत्री के रूप में दीपक प्रकाश पर पंचायतों को सशक्त बनाने, मनरेगा, आवास योजना और ग्रामीण सड़कों जैसी योजनाओं को जमीन पर उतारने की बड़ी जिम्मेदारी है।

मनोनयन के बाद दीपक प्रकाश ने कहा कि वे राज्यपाल और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने उन पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें विधान परिषद में जनता की आवाज बनने का अवसर मिला है और वे इसे मेहनत और समर्पण से सिद्ध करेंगे। बिहार के गांवों का विकास उनकी प्राथमिकता है और पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करके ही सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर जो चर्चा चल रही थी वह अब समाप्त हो गई है। अब पूरा ध्यान बिहार के विकास और गरीब कल्याण पर होगा। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने, डिजिटल पंचायत और पारदर्शी शासन की दिशा में तेजी से काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब अब काम से दिया जाएगा।

राज्यपाल के इस मनोनयन को भाजपा और एनडीए के भीतर संतुलित कदम माना जा रहा है। इससे सरकार को राहत मिली है और पंचायती राज विभाग की योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद बढ़ी है। अब देखना होगा कि नए सदस्य के रूप में दीपक प्रकाश विधान परिषद में किस तरह भूमिका निभाते हैं और ग्रामीण बिहार के लिए क्या नई पहल करते हैं।

Uttar Pradesh : घुमंतू समाज को दर-दर की ठोकरें नहीं खानी पड़ेंगी, सम्मान के साथ मिलेगा विकास का अवसर- मुख्यमंत्री

Lucknow News : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब घुमंतू समाज को दर दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। डबल इंजन की सरकार उन्हें सम्मानजनक जीवन का अधिकार दिलाने, शासन की प्रत्येक जनकल्याणकारी योजना से जोड़ने और उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगी। घुमंतू विकास बोर्ड केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि वर्षों से उपेक्षित विमुक्त एवं घुमंतू समाज को न्याय, सम्मान और अवसर दिलाने का सशक्त माध्यम बनेगा।

प्रदेश कैबिनेट द्वारा घुमंतू विकास बोर्ड गठन के निर्णय के उपरांत गुरुवार को समाज को ओर से आयोजित आभार एवं अभिनंदन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ का जो मंत्र देश को दिया था, उसी संकल्प का विस्तार आज समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। बिना जाति, क्षेत्र, भाषा अथवा किसी प्रकार के भेदभाव के प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने की इसी सोच की नई कड़ी घुमंतू विकास बोर्ड है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अंग्रेजों ने 1871 के क्रिमिनल ट्राइब एक्ट के माध्यम से उन वीर समुदायों को अपराधी घोषित कर दिया था, जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष में अग्रणी भूमिका निभाई थी। 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के बाद अंग्रेजों ने सुनियोजित षड्यंत्र के तहत इन जातियों पर कलंक लगाया ताकि उनका सामाजिक सम्मान समाप्त हो जाए। स्वतंत्र भारत में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने इस अन्याय को समाप्त करते हुए इन समुदायों को विमुक्त जाति का सम्मान दिलाया, किंतु उनके समुचित विकास के लिए अपेक्षित प्रयास लंबे समय तक नहीं किए गए। पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में इनके लिए राष्ट्रीय स्तर पर आयोग का गठन हुआ और उसी भावना के अनुरूप उत्तर प्रदेश सरकार ने घुमंतू विकास बोर्ड के गठन का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गत वर्ष घुमंतू समाज के सम्मेलन में उनके समक्ष बोर्ड गठन की मांग रखी गई थी और उन्होंने उसी समय इसकी घोषणा की थी। अब बोर्ड के गठन की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि इसका गठन शीघ्र पूरा किया जाएगा तथा इसकी संरचना ऐसी होगी जिसमें विभिन्न घुमंतू एवं विमुक्त जातियों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो, ताकि उनकी आवाज सीधे सरकार तक पहुंचे और उनके विकास की योजनाएं अधिक प्रभावी ढंग से संचालित की जा सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार ने वनटांगिया, मुसहर, थारू, गौड़, चेरो, बुक्सा, कोल, सहरिया सहित अनेक वंचित समुदायों को पहली बार शासन की योजनाओं से व्यापक रूप से जोड़ा है। राशन कार्ड, भूमि के पट्टे, प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री आवास, आयुष्मान भारत कार्ड, निःशुल्क विद्युत एवं गैस कनेक्शन तथा वृद्धावस्था, निराश्रित महिला और दिव्यांगजन पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ इन समुदायों तक पहुंचाया गया है। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक पात्र व्यक्ति को सभी योजनाओं से शत प्रतिशत आच्छादित करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी बार-बार कहते हैं कि जिन्हें कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने कभी नहीं पूछा, उन्हें पूजते हुए सम्मान देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य डबल इंजन सरकार ने किया है। सरकार के लिए जनता केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि जनार्दन है और इसी भावना के साथ प्रत्येक नागरिक तक विकास का लाभ पहुंचाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने उपेक्षित समाज के महापुरुषों और वीरांगनाओं को भी उनका उचित सम्मान दिलाने का कार्य किया है। श्रृंगवेरपुर में भगवान श्रीराम के साथ निषादराज गुह्य की भव्य प्रतिमा, बहराइच में महाराजा सुहेलदेव विजय स्मारक, जनजातीय संग्रहालयों की स्थापना, महाराजा सुहेलदेव के नाम पर विश्वविद्यालय एवं मेडिकल कॉलेज, वीरांगना अवंतीबाई लोधी, ऊदा देवी पासी और झलकारी बाई के नाम पर महिला पुलिस बटालियन तथा महारानी दुर्गावती के नाम पर मेडिकल कॉलेज इसी सम्मान की श्रृंखला के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।

सीएम ने कहा कि इसी तरह अनुसूचित जाति एवं जनजाति के बच्चों के लिए आश्रम पद्धति विद्यालय तथा श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय स्थापित किए गए हैं, जहां आधुनिक शिक्षा के साथ आवास एवं भोजन की निःशुल्क व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार श्रमिकों, स्ट्रीट वेंडरों, विद्यार्थियों, युवाओं तथा विमुक्त एवं घुमंतू समाज सहित प्रत्येक वंचित वर्ग के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब कोई भी इन समुदायों को क्रिमिनल ट्राइब नहीं कह सकता। ये वे वीर समुदाय हैं जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया। डबल इंजन सरकार उन्हें वही सम्मान दिलाने का कार्य कर रही है जिसके वे वास्तविक अधिकारी हैं। घुमंतू विकास बोर्ड इन समुदायों की पहचान कर उन्हें शासन की सभी योजनाओं से जोड़ने का कार्य करेगा।

मुख्यमंत्री ने सपेरा समाज का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यह समुदाय प्राचीन काल से शिवावतारी गुरु श्री गोरखनाथ जी की परंपरा का अनुयायी रहा है। विदेशी आक्रमणों के समय जब संचार के आधुनिक साधन उपलब्ध नहीं थे, तब यही समाज भजन और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के माध्यम से लोगों को सचेत करता था तथा समाज को जागरूक बनाने का महत्वपूर्ण दायित्व निभाता था। आज भी यह समाज घुमंतू जीवन व्यतीत कर रहा है। राज्य सरकार इनके सम्मानजनक पुनर्वास तथा समग्र विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगी।

घुमंतू समाज अब टिकंतू हो रहा: असीम अरुण

इस अवसर पर समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि विमुक्त एवं घुमंतू समाज के कल्याण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा घुमंतू विकास बोर्ड के गठन का निर्णय ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी है। मुख्यमंत्री के इस निर्णय के लिए जितना आभार व्यक्त किया जाए, वह कम है। यह बोर्ड विभिन्न विभागों द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं को विमुक्त एवं घुमंतू समाज तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का सेतु बनेगा और उनके जीवन में व्यापक परिवर्तन लाएगा। लोग कहने लगे हैं कि यह समाज अब घुमंतू नहीं, टिकंतू हो रहा है। अब उनके पास अपना घर है, बिजली है, आजीविका के साधन हैं और सम्मान के साथ आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।

असीम अरुण ने कहा कि घुमंतू विकास बोर्ड के गठन के उपरांत एक विशेष कार्यदल का गठन किया जाएगा, जो विमुक्त एवं घुमंतू समाज के समग्र उत्थान के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेगा। यह कार्ययोजना शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, आजीविका, सामाजिक सुरक्षा तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का आधार बनेगी।

बीन बजाकर सीएम योगी का स्वागत

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के आगमन पर सपेरा समाज ने पारंपरिक बीन वादन सहित अपने पारंपरिक वाद्य यंत्रों के माध्यम से उनका अभिनंदन किया। उपस्थित लोगों ने ‘योगी बाबा जिंदाबाद’ के नारों के साथ घुमंतू विकास बोर्ड के गठन के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

घुमंतू समाज के प्रतिनिधियों ने कहा, सीएम योगी का निर्णय ऐतिहासिक

कार्यक्रम में विमुक्त एवं घुमंतू समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री योगी के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए घुमंतू विकास बोर्ड के गठन को ऐतिहासिक निर्णय बताया। सुभाष जोगी ने कहा कि उनका समाज वर्षों तक उपेक्षा का शिकार रहा। उन्होंने कहा, “हम तो झंडे पकड़कर चलने वाले मजदूर थे। पहले अंग्रेजों की मजदूरी की, फिर देश आजाद हो गया, लेकिन हमारे जीवन में कोई बदलाव नहीं आया। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में पहली बार हमारे समाज की सुध ली गई। पिछले वर्ष विमुक्त जाति दिवस पर मुख्यमंत्री जी ने जिस बोर्ड के गठन की घोषणा की थी, वह आज पूरी हो गई है। इसके लिए हम उनका हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।”

शिवपूजन राम ने कहा कि वर्ष 1967 में हाईस्कूल के दौरान छात्रवृत्ति प्राप्त करने के लिए उन्हें जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी, लेकिन उनकी जाति का अभिलेख उपलब्ध न होने के कारण उन्हें प्रमाण पत्र नहीं मिल सका। तब से वह अपने समाज की पहचान और जातीय अभिलेखों की एकरूपता के लिए निरंतर प्रयासरत रहे। विभिन्न क्षेत्रों में एक ही समाज के लोगों के अलग अलग नामों से प्रमाण पत्र बनाए जाते रहे, जिससे अनेक कठिनाइयां उत्पन्न होती थीं। इस संबंध में उन्होंने वर्षों तक विभिन्न सरकारों को पत्र लिखे, लेकिन समाधान नहीं मिला। आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में घुमंतू विकास बोर्ड का गठन होने से समाज की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है। इसके लिए मुख्यमंत्री का जितना धन्यवाद किया जाए, वह कम है।

वेदपाल ने कहा कि वह पिछले 32 वर्षों से समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में ऐसा संवेदनशील नेतृत्व नहीं देखा, जिसने विमुक्त एवं घुमंतू समाज को इतना सम्मान दिया हो। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि आपने हमें ऐसा मंत्री दिया है, जो हमारे समाज को सम्मान और अपनापन देता है। हमारे लिए आप मसीहा के समान हैं।

राजेश ने कहा कि सावन के पावन माह में सपेरा समाज ने अपनी पारंपरिक बीन बजाकर मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है। यह समाज लंबे समय तक सामाजिक और आर्थिक रूप से सबसे निचले पायदान पर रहा तथा उसके पास कोई स्थायी ठिकाना नहीं था। आज सरकार की योजनाओं के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, शौचालय, आवास और आजीविका जैसी मूलभूत सुविधाएं समाज तक पहुंच रही हैं। सावन के इस पवित्र महीने में हमारे समाज के जीवन में भी खुशियों की वर्षा हो रही है।

दिनेश ने कहा कि जो कार्य स्वतंत्रता के बाद 78 वर्षों में नहीं हो सका, वह आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संभव हुआ है। समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने भी बड़े भाई की तरह समाज की पीड़ा को समझते हुए निरंतर उसके हित में कार्य किया। पहले उनके समाज की समस्याएं सुनने वाला कोई नहीं था और अनेक निर्दोष युवाओं को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ऐसे अनेक युवाओं को न्याय मिला है। घुमंतू विकास बोर्ड का गठन उनके समाज के सम्मान, सुरक्षा और समग्र विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं मील का पत्थर साबित होने वाला निर्णय है।

Uttar Pradesh : मुख्यमंत्री ने प्रतापगढ़ हादसे में हुई जनहानि पर जताया शोक

Lucknow News : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतापगढ़ में देर रात की घटना में हुई जनहानि पर शोक जताया। बारिश की वजह से नगर कोतवाली क्षेत्र के महुली वार्ड में करीब 100 वर्ष पुराना मकान गिर गया। इसके मलबे में दबकर छह लोगों की मौत हो गई, जबकि परिवार का एक सदस्य घायल है। घटना के समय परिवार के सभी सदस्य एक ही कमरे में सो रहे थे। जानकारी मिलते ही प्रशासन और पुलिस के अधिकारी टीम के साथ राहत-बचाव कार्यों में जुट गए।

हादसे में महुली निवासी नितिन श्रीवास्तव (24), माधव (2), रीता श्रीवास्तव (42),प्रमोद श्रीवास्तव (45), माधुरी (24), बाबू (6 माह) का निधन हो गया, जबकि अमन श्रीवास्तव घायल हैं। मुख्यमंत्री ने स्थानीय जिला प्रशासन व मुख्य चिकित्सा अधिकारी को घायल अमन के समुचित इलाज का निर्देश दिया है।

इस दुखद घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर पोस्ट कर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने लिखा कि जनपद प्रतापगढ़ में दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना में हुई जनहानि अत्यंत दुःखद है। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को अपने श्री चरणों में स्थान तथा घायल को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें।

Uttar Pradesh : ‘तिरंगा संगीत समारोह’ में राष्ट्र नायकों को मिलेगा सम्मान, राष्ट्रभक्ति के गीतों पर झूमेगा प्रदेश

Lucknow News : राष्ट्र नायकों को सम्मान देने के साथ ही भावी पीढ़ी में देशभक्ति का संचार करने के लिए डबल इंजन सरकार ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का आयोजन कर रही है। इस अभियान के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के 5 करोड़ घरों में तिरंगा फहराया जाएगा। इसके साथ ही देशभक्ति से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम भी होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी आयोजनों को जनभागीदारी के साथ मनाने का निर्देश दिया है। इस श्रृंखला में राजधानी लखनऊ समेत सभी 75 जनपदों में ‘तिरंगा संगीत समारोह’ (तिरंगा कॉन्सर्ट) का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें राष्ट्रभक्ति के गीतों-नृत्यों पर मनमोहक प्रस्तुतियां दी जाएंगी।

कॉन्सर्ट में स्थानीय कलाकारों को मिलेगा मौका
हर घर तिरंगा अभियान-2026 के तहत भव्य तिरंगा महोत्सव भी होगा। इसके अंतर्गत तिरंगा मेला व भव्य तिरंगा म्यूजिकल कॉन्सर्ट भी आयोजित किया जाएगा। इसमें जनप्रतिनिधियों के साथ ही जनसहभागिता भी सुनिश्चित की जाएगी। तिरंगा कॉन्सर्ट में नामचीन कलाकारों के साथ ही स्थानीय कलाकारों को भी मौका दिया जाएगा। सभी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत रहेंगी।

प्रदेश के सभी 75 जनपदों में होगा तिरंगा कॉन्सर्ट
तिरंगा कॉन्सर्ट का आयोजन राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के सभी 75 जनपदों में होगा। इस मौके पर स्वतंत्रता संग्राम व विभिन्न युद्धों में शहीद हुए सैनिकों के परिजनों को भी सम्मानित किया जाएगा। समारोह में संपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम राष्ट्रभक्ति पर आधारित होगा। कॉन्सर्ट में तिरंगा गान, देशभक्ति गीत-संगीत व वंदे मातरम का सामूहिक गान होगा। इसमें विभिन्न स्कूलों, पुलिस बल व आर्मी बैंड द्वारा देशभक्ति गीतों पर प्रस्तुतियां दी जाएंगी।

लखनऊ में इन स्थानों पर प्रस्तावित है कॉन्सर्ट
राजधानी लखनऊ में भी विभिन्न स्थानों पर तिरंगा कॉन्सर्ट प्रस्तावित किया गया है। संस्कृति विभाग के मुताबिक 1090 चौराहा, हजरतगंज, घंटाघर चौक, जनेश्वर मिश्र पार्क, एमरॉल्ड मॉल, लुलु मॉल समेत कई अन्य स्थानों पर तिरंगा संगीत समारोह प्रस्तावित है।

सिनेमाघरों में भी होगा राष्ट्रगीत-राष्ट्रगान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विगत दिनों बैठक में निर्देश दिया था कि 14 व 15 अगस्त को प्रदेश के सभी सिनेमाघरों में राष्ट्रगीत व राष्ट्रगान का अनिवार्य रूप से प्रसारण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने ‘हर घर तिरंगा’ का उद्देश्य बताते हुए कहा कि भावी पीढ़ी को राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराना, प्रत्येक नागरिक के मन में राष्ट्रप्रेम, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के प्रति सम्मान का भाव उजागर करना और राष्ट्र के प्रति दायित्वबोध उत्पन्न करना है। जनपद, ब्लॉक, तहसील, ग्राम पंचायतों में भी ये आयोजन किए जाएं। इसमें जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ नागरिकों, व्यापार मंडलों, सामाजिक संगठनों, परिवहन क्षेत्र, आरडब्ल्यूए, सरकारी सेवकों, शिक्षण संस्थानों, एनसीसी व एनएसएस आदि की भी सहभागिता रहे।

Uttar Pradesh : यूपी में परिवहन प्रवर्तन को मिलेगी नई ताकत, डंपिंग यार्ड निर्माण को जल्द मिलेगी रफ्तार

Lucknow News : योगी सरकार प्रदेश में परिवहन व्यवस्था को और बेहतर व व्यवस्थित बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। इसी दिशा में मंडलीय मुख्यालयों पर डिटेंशन/डंपिंग यार्ड विकसित किए जा रहे हैं। प्रदेश के पांच जिलों में इन यार्ड के निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था सीएनडीएस को कुल 6.03 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गई है।

परिवहन विभाग के मुताबिक बुलंदशहर, शामली, शाहजहांपुर, पीलीभीत और बाराबंकी में डिटेंशन/डंपिंग यार्ड के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। बाराबंकी, पीलीभीत और शाहजहांपुर के लिए दूसरी और शेष किश्त के रूप में क्रमश: 1.62 करोड़, 1.44 करोड़ और 1.34 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसमें मिट्टी भराई के लिए 16.04 लाख रुपये भी शामिल हैं। स्वीकृत राशि को कार्यदायी संस्था के खाते में भेजने की कार्रवाई की जा रही है।

इसके साथ ही लखनऊ और औरैया में भी डिटेंशन यार्ड बनाने की दिशा में काम आगे बढ़ा है। इन दोनों जिलों में नि:शुल्क भूमि उपलब्ध होने की सूचना मिली है। लखनऊ के लिए 2.55 करोड़ रुपये और औरैया के लिए 4.07 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन दोनों मामलों में प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति जारी होने के साथ धनराशि कार्यदायी संस्था के खाते में भेजी जा चुकी है।

वहीं, उन्नाव और अलीगढ़ में भी डिटेंशन यार्ड के लिए नि:शुल्क भूमि उपलब्ध होने के बाद आगणन (आकलन) तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। आगणन का परीक्षण समिति द्वारा किया जा चुका है और इसे शासन को भेजने की तैयारी है।

अपर परिवहन आयुक्त प्रवर्तन केडी सिंह गौर ने बताया कि प्रदेश के कई जनपदों में पकड़े गए वाहनों को थानों में निरुद्ध करने की समस्या है। थानों में जगह न होने के कारण वाहनों को चालान करके छोड़ना पड़ता है। वाहनों को निरुद्ध करने के लिए सुरक्षित अभिरक्षा के लिए स्थान की अनुपलब्धता, प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई के लिए बड़ी बाधा है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित सड़क सुरक्षा कोष प्रबंधन समिति ने भी प्रथम चरण में प्रदेश के सभी मंडल मुख्यालय वाले जनपदों में डिटेंशन यार्ड बनाने पर बल दिया है और यह कार्य प्रगति पर है।

प्रवर्तन व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
योगी सरकार की इस पहल से परिवहन विभाग की प्रवर्तन कार्रवाई के दौरान रोके जाने वाले वाहनों को रखने के लिए बेहतर और व्यवस्थित जगह उपलब्ध होगी। डंपिंग यार्ड विकसित होने से वाहनों के रख-रखाव और प्रवर्तन व्यवस्था को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

वाहनों की निगरानी व रिकॉर्ड प्रबंधन होगा बेहतर
डिटेंशन/डंपिंग यार्ड बनने से परिवहन विभाग को प्रवर्तन कार्रवाई में सुविधा मिलेगी। जांच के दौरान रोके या जब्त किए गए वाहनों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से रखने के लिए निर्धारित स्थान उपलब्ध होगा। इससे सड़कों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर जब्त वाहनों को खड़ा करने की समस्या कम होगी। वाहनों की निगरानी और रिकॉर्ड प्रबंधन भी बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। मंडलीय मुख्यालयों पर डंपिंग यार्ड विकसित होने से परिवहन विभाग की प्रवर्तन व्यवस्था मजबूत होगी और कार्रवाई को अधिक व्यवस्थित ढंग से संचालित करने में मदद मिलेगी।

Uttar Pradesh : स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब से बदलेगी पढ़ाई की तस्वीर, हर विकासखंड में तैयार होंगे मास्टर ट्रेनर

Lucknow News : योगी सरकार परिषदीय विद्यालयों में स्थापित स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब और डिजिटल शिक्षण संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत अब प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे, जो शिक्षकों को तकनीक आधारित शिक्षण का व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे। इसका उद्देश्य विद्यालयों में उपलब्ध डिजिटल संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित कर कक्षा शिक्षण को अधिक रोचक, सहभागितापूर्ण और गुणवत्तापूर्ण बनाना है।

इस संबंध में महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने सभी जिलों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार प्रत्येक विकासखंड से एक शिक्षक को संदर्भदाता (मास्टर ट्रेनर) के रूप में नामित किया गया। इन संदर्भदाताओं का राज्य स्तरीय प्रशिक्षण दो चरणों में आयोजित किया गया। प्रथम चरण का प्रशिक्षण 27 से 29 जुलाई तथा द्वितीय चरण का प्रशिक्षण 4 से 6 अगस्त तक संपन्न हुआ। अब यही प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर अपने-अपने विकासखंडों में शिक्षकों को दो दिवसीय प्रशिक्षण देंगे। प्रत्येक प्रशिक्षण बैच में अधिकतम 50 प्रतिभागी शामिल होंगे तथा प्रशिक्षण निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार संचालित किया जाएगा।

स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब का होगा प्रभावी उपयोग
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, इंटरैक्टिव डिजिटल बोर्ड, प्रोजेक्टर, कंप्यूटर, ई-कंटेंट तथा अन्य डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्हें तकनीक आधारित कक्षा-शिक्षण, डिजिटल प्रस्तुतीकरण, विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने तथा विषयों को अधिक रोचक और प्रभावी ढंग से पढ़ाने की आधुनिक तकनीकों से भी परिचित कराया जाएगा। साथ ही एनबीडीआईयूपी (NBDIUP) पोर्टल पर उपलब्ध डिजिटल बोर्ड मैनुअल, इंस्टॉलेशन वीडियो, संचालन संबंधी ट्यूटोरियल तथा अन्य डिजिटल सामग्री का भी उपयोग कराया जाएगा।

डिजिटल शिक्षा को मिलेगी नई मजबूती
योगी सरकार का उद्देश्य विद्यालयों में स्थापित डिजिटल संसाधनों को केवल उपकरण तक सीमित न रखकर उन्हें दैनिक शिक्षण प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाना है। प्रशिक्षित शिक्षक स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब का अधिक प्रभावी उपयोग कर विद्यार्थियों के लिए विषयों को अधिक सरल, दृश्यात्मक और सहभागितापूर्ण बना सकेंगे। इससे बच्चों की समझ, सीखने की गति और कक्षा में उनकी सक्रिय भागीदारी को भी नई मजबूती मिलेगी। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप डिजिटल एवं अनुभवात्मक अधिगम को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

ऑनलाइन मॉनिटरिंग और गुणवत्ता पर रहेगा विशेष फोकस
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को एस्केलेशन मैट्रिक्स, प्रेरणा मॉड्यूल तथा विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से डिजिटल संसाधनों में आने वाली तकनीकी समस्याओं के त्वरित निस्तारण की प्रक्रिया की जानकारी भी दी जा रही है। प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक प्रतिभागी का प्री-टेस्ट और पोस्ट-टेस्ट कराया जाएगा। प्रशिक्षण का ऑनलाइन पर्यवेक्षण राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा किया जाएगा। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), खंड शिक्षा अधिकारी तथा जिला समन्वयकों को प्रशिक्षण की नियमित निगरानी और शत-प्रतिशत सहभागिता सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशिक्षण सामग्री ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी तथा प्रत्येक बैच का फीडबैक लेकर गुणवत्ता का सतत मूल्यांकन किया जाएगा।

तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए सुदृढ़ व्यवस्था
महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने निर्देश दिए हैं कि स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब और अन्य डिजिटल शिक्षण संसाधनों के संचालन में किसी प्रकार की तकनीकी बाधा न आने पाए। इसके लिए विभिन्न सेवा प्रदाताओं के जिला, राज्य एवं उच्च स्तर के अधिकारियों के संपर्क विवरण उपलब्ध कराए गए हैं। किसी भी तकनीकी समस्या का समाधान निर्धारित एस्केलेशन मैट्रिक्स के अनुरूप समयबद्ध ढंग से सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही सभी जनपदों को 30 अगस्त 2026 तक ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रत्येक शिक्षक को डिजिटल शिक्षण में दक्ष बनाना है लक्ष्य

योगी सरकार का लक्ष्य केवल विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित करना ही नहीं, बल्कि प्रत्येक शिक्षक को डिजिटल शिक्षण में दक्ष बनाना है। प्रत्येक शिक्षक को डिजिटल शिक्षण में दक्ष बनाते हुए कक्षा शिक्षण में डिजिटल संसाधनों का अधिकतम प्रयोग कराया जाना है। जब शिक्षक तकनीक का प्रभावी उपयोग करेंगे, तभी विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण, रोचक और सहभागितापूर्ण शिक्षा पहुंचेगी। यह प्रशिक्षण अभियान राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप डिजिटल शिक्षा को विद्यालयों की नियमित शिक्षण प्रक्रिया का मजबूत आधार बनाएगा। – संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)