Noida International Airport: 2040 तक 7 करोड़ यात्री क्षमता के साथ देश का सबसे बड़ा हवाई अड्डा

Noida International Airport: 2040 तक 7 करोड़ यात्री क्षमता के साथ देश का सबसे बड़ा हवाई अड्डा
नोएडा। उत्तर प्रदेश में जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का निर्माण तेजी से प्रगति पर है और इसका पहला चरण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लोकार्पण के लिए तैयार है। एयरपोर्ट के प्रथम चरण में एक रनवे, टर्मिनल बिल्डिंग, एटीसी टावर और कार्गो हब सहित अन्य आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया है। भविष्य में यह एयरपोर्ट पांच रनवे के साथ देश का सबसे बड़ा हवाई अड्डा बन जाएगा और 2040 तक इसकी वार्षिक यात्री क्षमता सात करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
अधिकारिक जानकारी के अनुसार, पूरे प्रोजेक्ट के लिए कुल 4752 हेक्टेयर भूमि पर पांच रनवे विकसित किए जाएंगे। नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत तीन चरणों में कुल 5428 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जा रही है, जिसमें पहले चरण में 1334 हेक्टेयर जमीन पर एयरपोर्ट का निर्माण पूरा हो चुका है। अन्य चरणों के लिए भूमि अधिग्रहण और विस्थापन प्रक्रिया शांति पूर्ण तरीके से पूरी हो रही है, जिससे परियोजना की समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित हो रही है।
निर्माण कार्य दो स्टेज में किया जा रहा है। प्रथम स्टेज में दो रनवे बनाए जाएंगे और दूसरे स्टेज में कुल पांच रनवे तैयार किए जाएंगे। राज्य सरकार ने प्रथम स्टेज के लिए 4406 करोड़ रुपये खर्च करते हुए 3300 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया है। दो रनवे वाली प्रारंभिक क्षमता के लिए 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा। पूरे एयरपोर्ट के निर्माण के चार चरणों में कुल 36267 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है।
शुरुआत एक रनवे से की गई है, जिसकी यात्री क्षमता एक करोड़ 20 लाख है। वर्ष 2031 में दो रनवे के साथ यह क्षमता तीन करोड़, 2036 में पांच करोड़ और 2040 में सात करोड़ वार्षिक यात्री तक पहुंच जाएगी। पहले और दूसरे रनवे के लिए 1334 हेक्टेयर, तीसरे रनवे के लिए 1365 हेक्टेयर, चौथे के लिए 1318 हेक्टेयर और पांचवे रनवे के लिए 735 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है। पांच रनवे और विस्थापन के लिए कुल 5428 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जाएगी।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को वैश्विक मल्टी-मॉडल इंटरनेशनल एविएशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर बढ़ते दबाव को कम करेगा और देश के एविएशन सेक्टर को संतुलित करेगा। पांच रनवे की प्रस्तावित क्षमता के साथ यह दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे प्रमुख हब के विकल्प के रूप में उभर कर भारत की एविएशन क्षमता को नई ऊंचाई देने की क्षमता रखता है।
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