Election Commission Row: राहुल गांधी के आरोपों पर भाजपा का पलटवार, सुधांशु त्रिवेदी ने रिपोर्ट के आधार पर उठाए सवाल

Election Commission Row: राहुल गांधी के आरोपों पर भाजपा का पलटवार, सुधांशु त्रिवेदी ने रिपोर्ट के आधार पर उठाए सवाल

नई दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर लगाए गए आरोपों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार किया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जिन रिपोर्टों और दस्तावेजों का हवाला दे रहे हैं, उनके स्रोत और आधार को स्पष्ट करना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी मीडिया रिपोर्ट में सामने आई आंतरिक आपत्तियों को सीधे चुनाव आयोग के अंतिम फैसलों में असहमति का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

राहुल गांधी ने इससे पहले चुनावी प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और दावा किया कि मतदाता सूची तथा चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी अनियमितताओं का असर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ सकता है। राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। ये आरोप कांग्रेस नेता की ओर से लगाए गए राजनीतिक दावे हैं, जिनका भाजपा और चुनाव आयोग दोनों ने विरोध किया है।

राहुल गांधी के इन आरोपों के जवाब में सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेश की गई जानकारी के स्रोतों को स्पष्ट करना चाहिए। भाजपा नेता ने सवाल उठाया कि जिस रिपोर्ट या दस्तावेज के आधार पर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद होने की बात कही जा रही है, उसमें किसी अंतिम फैसले को असहमति से लिए जाने का स्पष्ट प्रमाण क्या है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से यह स्थिति पहले ही स्पष्ट की जा चुकी है कि उसके अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

दरअसल, विवाद की ताजा पृष्ठभूमि एक मीडिया रिपोर्ट बनी, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों के दौरान चुनावी सूची प्रबंधन और SIR से जुड़े कुछ फैसलों तथा आदेशों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में मतदाता पंजीकरण, नाम जोड़ने और हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा मतदाता डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया था।

चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों की उस व्याख्या पर आपत्ति जताई है जिसमें आंतरिक टिप्पणियों और आपत्तियों को आयोग के भीतर व्यापक मतभेद के रूप में पेश किया गया। आयोग का कहना है कि आंतरिक तकनीकी नोट, प्रश्न, सुझाव और आपत्तियां निर्णय लेने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि SIR से जुड़े फैसले सहित उसके अंतिम निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए।

सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के एंटी-इन्कंबेंसी के तर्क पर भी प्रतिक्रिया दी। राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि भारत की राजनीति में सरकारों के खिलाफ सत्ता विरोधी रुझान एक सामान्य प्रक्रिया रही है और उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा के मामले में कई राज्यों में यह प्रभाव क्यों दिखाई नहीं देता। इसके जवाब में त्रिवेदी ने कांग्रेस के लंबे चुनावी इतिहास और विभिन्न राज्यों में उसके सत्ता से बाहर रहने का उदाहरण दिया।

भाजपा नेता ने तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों में कांग्रेस लंबे समय से सत्ता में नहीं लौट सकी। उन्होंने बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों का भी उल्लेख किया और कहा कि केवल भाजपा के संदर्भ में एंटी-इन्कंबेंसी का तर्क देना भारतीय राजनीति की पूरी तस्वीर को नहीं दर्शाता। यह भाजपा की ओर से राहुल गांधी के राजनीतिक विश्लेषण पर दिया गया जवाब है।

त्रिवेदी ने अपने बयान में चुनावी प्रक्रिया के पुराने दौर का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले कुछ राज्यों में बूथ कैप्चरिंग, मतपेटियों की लूट और चुनावी हिंसा जैसी घटनाओं की खबरें सामने आती थीं। उनके अनुसार समय के साथ चुनावी प्रक्रिया में तकनीक, निगरानी और पारदर्शिता से जुड़े कई बदलाव हुए हैं। उन्होंने इसी आधार पर राहुल गांधी के चुनावी व्यवस्था को लेकर लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाया।

भाजपा की ओर से राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दूसरे पहलुओं पर भी प्रतिक्रिया दी गई है। पार्टी नेताओं ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता मीडिया रिपोर्टों और चुनावी आंकड़ों की ऐसी व्याख्या कर रहे हैं, जिसे भाजपा सही नहीं मानती। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया और उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर आलोचनात्मक प्रतिक्रिया दी।

इस पूरे विवाद का केंद्र फिलहाल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और चुनावी संस्थाओं की पारदर्शिता बना हुआ है। कांग्रेस चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठा रही है, जबकि भाजपा इन आरोपों को खारिज कर रही है। चुनाव आयोग की ओर से भी यह कहा गया है कि आंतरिक स्तर पर उठाई गई टिप्पणियों और अंतिम संस्थागत फैसलों के बीच अंतर किया जाना चाहिए और आयोग के अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

फिलहाल राजनीतिक विवाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में बदलाव और SIR की प्रक्रिया को लेकर जारी है। राहुल गांधी के आरोपों के बाद भाजपा का जवाब सामने आ चुका है, जबकि चुनाव आयोग अपनी निर्णय प्रक्रिया को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट कर चुका है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर सार्वजनिक बहस और बढ़ सकती है।

 

Hot this week

Lucknow : ‘पदक लाओ, पद पाओ’ के तहत खिलाड़ियों की सीधी भर्ती- मुख्यमंत्री

Lucknow : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को शारदीय...

Lucknow : योगी सरकार नवंबर में लाएगी नई आयुष पॉलिसी-26

Lucknow : योगी सरकार देश के आयुष सेक्टर में...

Topics

Lucknow : ‘पदक लाओ, पद पाओ’ के तहत खिलाड़ियों की सीधी भर्ती- मुख्यमंत्री

Lucknow : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को शारदीय...

Lucknow : योगी सरकार नवंबर में लाएगी नई आयुष पॉलिसी-26

Lucknow : योगी सरकार देश के आयुष सेक्टर में...

Ghazibad : शिक्षा की नैया डुबोने वाली पार्टी है सपा- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

Ghazibad : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img