Delhi HC Deepfake Case: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के AI डीपफेक वीडियो पर हाईकोर्ट सख्त, AAP से 6 सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का आदेश
नई दिल्ली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से संबंधित कथित आपत्तिजनक AI वीडियो और तस्वीरों के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अंतरिम राहत दी और सोशल मीडिया से विवादित सामग्री हटाने को कहा। मुख्यमंत्री ने आम आदमी पार्टी (AAP) व अन्य पक्षों के विरुद्ध याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि AI से बनाए गए डीपफेक वीडियो, तस्वीरों और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से उनकी छवि, साख और निजी गरिमा को ठेस पहुंचाई गई। जस्टिस मनोज जैन की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई की। प्रथम दृष्टया मुख्यमंत्री के पक्ष में आधार मिलने पर अदालत ने विवादित सामग्री के फैलाव को रोकने के लिए अंतरिम आदेश पारित किया।
याचिका में आरोप है कि आम आदमी पार्टी के आधिकारिक और सत्यापित सोशल मीडिया अकाउंट्स से AI द्वारा तैयार वीडियो, तस्वीरें और पोस्ट साझा की गईं, जिनमें मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को शराब बेचने वाली, फेरीवाली और डिलीवरी एजेंट के रूप में पेश किया गया। कथित तौर पर इन पोस्ट में उन्हें ‘हर हर रेखा, घर घर ठेका’ नामक एक काल्पनिक योजना से भी जोड़ा गया। मुख्यमंत्री पक्ष ने अदालत के सामने कहा कि ऐसी सामग्री सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही है और इससे उनकी सार्वजनिक छवि व निजी प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है।
मुख्यमंत्री की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता समीर रोहतगी ने तर्क रखा कि AI से बनी तस्वीरें और वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर मौजूद हैं और तेजी से फैलाए जा रहे हैं। उनका कहना था कि अगर तुरंत दखल न दिया गया तो आपत्तिजनक सामग्री बड़े पैमाने पर साझा हो सकती है और प्रतिष्ठा को हुए नुकसान की भरपाई कठिन हो जाएगी। अधिवक्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि ऐसी सामग्री फौरन हटवाई जाए और आगे भी इस प्रकार के कथित मानहानिकारक कंटेंट को बनाने व फैलाने पर रोक लगाई जाए।
सुनवाई में अदालत ने राजनीतिक आलोचना और व्यंग्य की आजादी को मान्यता दी और साफ किया कि सरकार की नीतियों, निर्णयों और प्रशासनिक कामकाज की आलोचना हर राजनीतिक दल का हक है। लोकतंत्र में स्वस्थ आलोचना और व्यंग्य की अहम भूमिका होती है, मगर उसके नाम पर किसी की गरिमा को चोट पहुंचाने वाली सामग्री को जायज नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी और हास्य-व्यंग्य की ओट में किसी व्यक्ति को अपमानित करने या उसकी साख बिगाड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
अंतरिम आदेश में हाईकोर्ट ने विवादित सामग्री वाले छह सोशल मीडिया यूआरएल तुरंत हटाने को कहा। इन यूआरएल की सामग्री हटाने की जिम्मेदारी अदालत ने प्रतिवादी संख्या 3, 4 और 5 को दी है। साथ ही मामले के सभी प्रतिवादियों को समन भेजे गए हैं। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि याचिका में उठाए गए बिंदुओं पर विचार जरूरी है और अंतरिम चरण में विवादित सामग्री का प्रसार रोकने के लिए आदेश देना उचित है। हालांकि, यह आदेश न तो मामले की अंतिम सुनवाई है और न ही आरोपों पर अंतिम फैसला।
मुख्यमंत्री की मांग केवल सोशल मीडिया पोस्ट हटवाने तक सीमित नहीं थी, उन्होंने कथित डीपफेक सामग्री बनाने और फैलाने वालों पर स्थायी रोक की भी गुहार लगाई है। याचिका में पहले से मौजूद वीडियो, तस्वीरों और उनकी प्रतियों को हटाने के साथ अज्ञात लोगों की पहचान कराने की मांग भी है। इसके अतिरिक्त AI कंटेंट बनाने में इस्तेमाल प्रॉम्प्ट, स्रोत फाइलों और मेटाडेटा को सुरक्षित रखने, सार्वजनिक माफी और 2 करोड़ 10 हजार रुपये हर्जाने की मांग भी रखी गई है। इन सभी मांगों पर अंतिम निर्णय आगे की सुनवाई में पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद होगा।
यह मामला ऐसे वक्त में आया है, जब सोशल मीडिया पर AI से बने वीडियो और तस्वीरों के जरिए किसी व्यक्ति को असल घटनाओं से अलग ढंग से दिखाना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अदालत के सामने यह प्रश्न भी है कि राजनीतिक आलोचना और व्यंग्य की आजादी की हद कहां तक है और किन हालात में AI से बनी सामग्री को किसी की प्रतिष्ठा और गरिमा पर असर डालने वाला माना जाए। फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने छह विवादित यूआरएल हटाने का अंतरिम निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 4 दिसंबर 2026 को होगी, जिसमें आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विचार होगा।





