Cyber Crime: एपीके फाइल भेजकर बुजुर्गों से 24 लाख रुपये की ठगी, बैंक कर्मचारी और गैस अधिकारी बनकर बनाया शिकार
नोएडा। साइबर अपराधियों ने अलग-अलग बहाने बनाकर तीन बुजुर्गों को अपने जाल में फंसाकर उनके मोबाइल फोन में एपीके फाइल डाउनलोड करा दी। इसके बाद ठगों ने तीनों के बैंक खातों से कुल 24 लाख रुपये निकाल लिए। आरोपियों ने किसी को बैंक कर्मचारी बनकर क्रेडिट कार्ड दिलाने का झांसा दिया, तो किसी से इनकम टैक्स के फार्म-16 और किसी से गैस बिल के नाम पर संपर्क किया। तीनों मामलों में पीड़ितों की शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सेक्टर-61 निवासी 69 वर्षीय राजेश सरीन कपड़ा कारोबारी हैं। उनके मोबाइल फोन पर 18 मई 2025 को एक व्यक्ति का फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को बैंक कर्मचारी बताया और घर बैठे क्रेडिट कार्ड बनवाने की सुविधा उपलब्ध होने की बात कही। आरोपी ने बातचीत के दौरान राजेश को भरोसे में लिया और ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू कराई।
आरोपी ने आवेदन प्रक्रिया के दौरान राजेश के व्हाट्सऐप पर एक एपीके फाइल भेजी और उसे डाउनलोड करने के लिए कहा। राजेश ने आरोपी की बात पर भरोसा करते हुए अपने मोबाइल में फाइल डाउनलोड कर ली। इसके कुछ समय बाद आरोपी ने उन्हें बताया कि क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो गई है और जल्द ही कार्ड उनके पते पर पहुंच जाएगा।
अगले दिन राजेश के मोबाइल पर बैंक खाते से रुपये निकलने के लगातार संदेश आने लगे। उन्होंने जब बैंक खाते की जांच की तो पता चला कि चार अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए उनके खाते से आठ लाख रुपये निकाले जा चुके हैं। बैंक से संपर्क करने के बाद उन्हें समझ आया कि क्रेडिट कार्ड बनवाने के नाम पर उनके साथ साइबर ठगी की गई है।
इसी तरह सेक्टर-107 निवासी 61 वर्षीय सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी हेमंत शर्मा भी साइबर ठगों के निशाने पर आ गए। तीन जुलाई को वह इंटरनेट पर इनकम टैक्स के फार्म-16 से जुड़ी जानकारी तलाश रहे थे। इसी दौरान एक व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और फार्म-16 उपलब्ध कराने में मदद करने का दावा किया।
आरोपी ने हेमंत शर्मा को भरोसे में लेकर उनके मोबाइल फोन पर एक एपीके फाइल डाउनलोड कराई। फाइल डाउनलोड होने के बाद साइबर अपराधियों ने उनके बैंक खाते से संबंधित जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद उनके खाते से नौ लाख रुपये निकाल लिए गए। बैंक से रकम ट्रांसफर होने के संदेश मोबाइल पर पहुंचने के बाद उन्हें अपने साथ हुई ठगी का पता चला। उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस से की।
तीसरा मामला सेक्टर-31 निवासी 67 वर्षीय राजेंद्र सिंह से जुड़ा है। छह फरवरी को उनके पास एक व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को आईजीएल का कर्मचारी बताया और कहा कि उनका गैस बिल बकाया है। राजेंद्र सिंह ने आरोपी को बताया कि वह बिल जमा कर चुके हैं। इस पर आरोपी ने उन्हें कथित बकाया बिल की जानकारी उपलब्ध कराने की बात कही।
इसी बहाने आरोपी ने राजेंद्र सिंह के मोबाइल फोन पर एक एपीके फाइल भेजी और उसे डाउनलोड करने के लिए कहा। फाइल डाउनलोड कराने के बाद ठगों ने उनके बैंक खाते से संबंधित जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद उनके खाते से सात लाख रुपये निकाल लिए गए। बैंक खाते से रकम निकलने का संदेश मिलने के बाद राजेंद्र सिंह को ठगी का पता चला।
तीनों मामलों में पीड़ितों ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के साथ-साथ साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायतों के आधार पर मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अब उन मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और अन्य डिजिटल माध्यमों की जांच कर रही है, जिनका इस्तेमाल ठगी करने और रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया गया। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि तीनों घटनाओं के पीछे एक ही साइबर गिरोह है या अलग-अलग गिरोह बुजुर्गों को निशाना बना रहे हैं।
डीसीपी साइबर सुरक्षा शैव्या गोयल ने बताया कि तीनों मामलों में शिकायत के आधार पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं। जिन बैंक खातों में ठगी की रकम गई है, उनके संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल लेनदेन की जांच के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
जांच में पुलिस मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल, बैंक खातों में हुए लेनदेन और एपीके फाइल से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही है। पुलिस का प्रयास है कि रकम के ट्रांसफर की कड़ियों का पता लगाकर ठगी करने वाले साइबर अपराधियों तक पहुंचा जा सके।
साइबर अपराधी बुजुर्गों की जरूरत और भरोसे को ही ठगी का हथियार बना रहे हैं। बैंक कर्मचारी बनकर क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने, आयकर दस्तावेज मुहैया कराने और गैस बिल बकाया होने जैसे अलग-अलग बहाने बनाए जा रहे हैं। बातचीत के दौरान आरोपी पहले पीड़ित को भरोसे में लेते हैं और फिर मोबाइल फोन पर कोई फाइल या एप डाउनलोड करने के लिए कहते हैं।
एपीके फाइल एंड्रॉयड एप्लीकेशन की इंस्टॉलेशन फाइल होती है। अनजान स्रोत से ऐसी फाइल डाउनलोड करना मोबाइल और उसमें मौजूद निजी या वित्तीय जानकारी के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। साइबर अपराधी इसी तरह के लिंक या फाइल के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाने का प्रयास करते हैं।
पुलिस और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल फोन में एपीके फाइल या कोई संदिग्ध एप इंस्टॉल नहीं करना चाहिए। बैंक, आयकर विभाग, बिजली विभाग या गैस कंपनी के नाम पर फोन आने पर संबंधित संस्था से आधिकारिक माध्यम के जरिए जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।
किसी भी व्यक्ति को फोन पर ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन, पासवर्ड या बैंक खाते से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। यदि गलती से कोई संदिग्ध एप या एपीके फाइल डाउनलोड हो जाए तो तुरंत इंटरनेट कनेक्शन बंद कर बैंक को सूचना देनी चाहिए और साइबर पुलिस से संपर्क करना चाहिए।
खाते से रकम निकलने की स्थिति में शिकायत करने में देरी नहीं करनी चाहिए। साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 पर संपर्क करने और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी जाती है। समय पर सूचना मिलने से ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने या उसे फ्रीज कराने की संभावना बढ़ सकती है।


