Bike Theft Gang: लग्जरी कार से रेकी कर बाइक चुराने वाले गिरोह का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार; छह मोटरसाइकिल बरामद
नोएडा। दिल्ली-एनसीआर में कार से घूमकर पहले मोटरसाइकिलों की रेकी और फिर मौका मिलते ही उन्हें चोरी करने वाले गिरोह का थाना एक्सप्रेस-वे पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने सेक्टर-168 स्थित छपरौली टी-प्वाइंट के पास से गिरोह के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे और उनकी निशानदेही पर चोरी की छह मोटरसाइकिलें बरामद की गई हैं। इसके अलावा वारदात में इस्तेमाल की जाने वाली आई-10 कार, आईफोन, नकदी और अवैध हथियार भी पुलिस ने बरामद किए हैं।
एडीसीपी नोएडा मनीषा सिंह के मुताबिक, 16 सितंबर को थाना एक्सप्रेस-वे पुलिस को वाहन चोरी में शामिल आरोपियों के संबंध में सूचना मिली थी। इसके बाद मैनुअल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने सेक्टर-168 के छपरौली टी-प्वाइंट के आसपास घेराबंदी की। कार्रवाई के दौरान दो संदिग्धों को पकड़ लिया गया।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सागर यादव और सोनू कुमार के रूप में हुई है। सागर यादव के पिता का नाम हरी बाबू, जबकि सोनू कुमार के पिता का नाम सोनपाल सिंह बताया गया है। दोनों से पूछताछ और तलाशी के बाद पुलिस को वाहन चोरी से जुड़े कई सामान बरामद हुए।
पुलिस के मुताबिक सागर यादव के कब्जे से आईफोन-13 प्रो, 1,300 रुपये नकद, .315 बोर का एक तमंचा, एक जिंदा कारतूस और एक खोखा कारतूस बरामद किया गया। वहीं सोनू कुमार के पास से एक अवैध चाकू मिला। आरोपियों के पास मौजूद आई-10 कार को भी पुलिस ने कब्जे में ले लिया। पुलिस का कहना है कि इसी कार का इस्तेमाल बाइक चोरी से पहले रेकी करने में किया जाता था।
आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस ने उनकी निशानदेही पर चोरी की छह मोटरसाइकिलें भी बरामद कीं। पुलिस अब इन सभी मोटरसाइकिलों के संबंध में दर्ज चोरी के मुकदमों और उनके वास्तविक मालिकों की जानकारी जुटा रही है।
पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे आई-10 कार से दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग इलाकों में घूमते थे। इस दौरान उनका निशाना ऐसी मोटरसाइकिलें होती थीं, जो सुनसान स्थानों या कम निगरानी वाली जगहों पर खड़ी होती थीं। रेकी के दौरान बाइक चुनने के बाद वे मौका देखकर उसका लॉक तोड़कर चोरी कर लेते थे।
चोरी के बाद आरोपी मोटरसाइकिल को सीधे बेचने के बजाय कुछ समय के लिए सुनसान स्थान पर झाड़ियों के बीच छिपा देते थे। इसके पीछे मकसद चोरी के तुरंत बाद पुलिस की चेकिंग या तलाश के दौरान पकड़े जाने से बचना था। बाद में मौका मिलने पर आरोपी चोरी की मोटरसाइकिलों को निकालकर कम कीमत पर बेच देते थे और उससे मिलने वाली रकम का इस्तेमाल करते थे।
पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों ने दिल्ली-एनसीआर में इससे पहले कितनी वाहन चोरी की वारदातों को अंजाम दिया है। बरामद छह मोटरसाइकिलों का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है। इसके साथ ही दोनों आरोपियों के पुराने आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटाई जा रही है।
जांच का एक अहम हिस्सा चोरी के वाहनों की खरीद-बिक्री से जुड़े संभावित नेटवर्क का पता लगाना भी है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि चोरी की मोटरसाइकिलें किन लोगों को बेची जाती थीं और क्या इस गिरोह के साथ अन्य लोग भी जुड़े हुए हैं। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


