Sleeper Bus Safety Study: यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस हादसे रोकने के लिए कमेटी करेगी डिजाइन और सुरक्षा का अध्ययन
यमुना एक्सप्रेसवे समेत अन्य राजमार्गों पर स्लीपर बसों से जुड़े हादसों को रोकने के लिए शासन स्तर पर अध्ययन कराया जाएगा। इसके लिए गठित कमेटी में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) को भी सदस्य बनाया गया है। कमेटी हादसों के समय, कारणों और स्लीपर बसों के डिजाइन का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करेगी।
प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार यह पहल पिछले दिनों एक्सप्रेसवे पर एक बस में आग लगने से नौ लोगों की मौत की घटना के बाद की गई है। अधिकारियों का कहना है कि कई स्लीपर बसों में आपात स्थिति के दौरान यात्रियों के सुरक्षित बाहर निकलने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं होती। कुछ बसों में केवल एक प्रवेश-द्वार होने और आपातकालीन निकास के सामने सीट लगाए जाने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। बसों की विद्युत वायरिंग को लेकर भी सवाल उठे हैं।
अधिकारियों के अनुसार एक्सप्रेसवे पर कई बड़े हादसे रात 12 बजे से सुबह छह बजे के बीच होते हैं। इन घटनाओं के संभावित कारणों में चालक को नींद की झपकी आना और तेज रफ्तार शामिल बताए गए हैं। कमेटी इन परिस्थितियों तथा बसों के डिजाइन में आवश्यक बदलावों पर विचार करेगी।
सड़क सुरक्षा के लिए इंजीनियरिंग, एजुकेशन, इमरजेंसी और इंफोर्समेंट के चार पहलुओं पर काम करने की बात कही गई है। अधिकारियों के मुताबिक किसी मोड़ या स्थान पर चार से अधिक दुर्घटनाएं होने पर, भले उनमें जान न गई हो, उसे ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित करने पर विचार होगा। स्कूल स्तर से सड़क सुरक्षा जागरूकता, आपात चिकित्सा और बचाव दल की उपलब्धता तथा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की व्यवस्था पर भी मंथन किया जाएगा।
यीडा के महाप्रबंधक परियोजना राजेंद्र भाटी ने बताया कि शासन स्तर की कमेटी बसों के डिजाइन, दुर्घटनाओं के समय और कारणों पर रिपोर्ट देगी। उनके अनुसार एक्सप्रेसवे पर होने वाले कई बड़े हादसों का समय लगभग एक जैसा पाया जाता है।





