Tuesday, 3 November 2026निष्पक्ष खबरें • बेबाक नज़रिया
TOP STORY
THE COMPLETE NEWSROOMखबर पूरी। नज़रिया साफ़।भारत से आपके शहर तक
▤ ई-पेपर पढ़ें ↗
BREAKING NEWS
Lucknow : जेलों की सुरक्षा को मिलेगी इंसास की ताकत, योगी सरकार खरीदेगी 676 राइफलGonda : 2017 से पहले की सरकारें करती थीं वसूली, अब हो रहा विकास, लोग हैं भयमुक्त- कीर्तिवर्धन सिंहHapur News : गुलावठी रोड पर दर्दनाक सड़क हादसा, ऑटो चालक की जान गईDrug Bust Ghaziabad: ऑपरेशन प्रहार के तहत एक करोड़ की स्मैक के साथ चार आरोपी गिरफ्तार, कथित महिला सरगना भी शामिलGreater Noida PNB Protest: ऐच्छर पीएनबी शाखा के बाहर किसानों का प्रदर्शन, 16 खाताधारकों को रकम वापसNew Noida Master Plan: 80 गांवों में जमीन की मैपिंग शुरू, 361 किसानों की सहमतिParthala Mobile Snatching: बाइक टैक्सी से जा रही महिला अधिवक्ता का मोबाइल छीना, जांच शुरूNoida Industrial Lease Dispute: लीज पर दी औद्योगिक संपत्ति को नुकसान और 91 लाख किराया बकाया होने का आरोप

Clean Energy Investment: वैश्विक चुनौतियों के बीच स्वच्छ ऊर्जा बनी भारत की ताकत, पीएम मोदी ने निवेश और ऊर्जा सुरक्षा पर दिया जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार, 2 नवंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत द्वारा किए गए निवेश ने देश को वैश्विक संकटों के बीच मजबूती से खड़े रहने में मदद की है। कोरोना महामारी से लेकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट तक, दुनिया ने कई बड़ी चुनौतियों का सामना किया है। इन परिस्थितियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा का सीधा संबंध आर्थिक सुरक्षा से है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि भारत ने पिछले दस वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा की क्षमता विकसित करने और इसके लिए जरूरी व्यवस्थाओं तथा बुनियादी ढांचे में निवेश नहीं किया होता, तो मौजूदा वैश्विक संकट का असर देश की अर्थव्यवस्था पर कहीं अधिक गंभीर हो सकता था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया ऊर्जा सुरक्षा के महत्व को समझ रही है और यह भी महसूस कर रही है कि भविष्य की ऊर्जा जरूरतों का स्थायी समाधान स्वच्छ ऊर्जा में ही छिपा है। जीवाश्म ईंधन यानी फॉसिल फ्यूल पर अत्यधिक निर्भरता के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को बार-बार संकटों का सामना करना पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, तेल और गैस की आपूर्ति में बाधाएं तथा ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं है, बल्कि यह आर्थिक आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।

मोदी ने कहा कि भारत ने बीते वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी क्षमताओं का निरंतर विस्तार किया है। देश की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। भारत लगभग 300 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल कर चुका है और 500 गीगावाट के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन की रफ्तार और तेज करनी होगी। उन्होंने आने वाले वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में बड़े स्तर पर क्षमता निर्माण की जरूरत पर भी जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने निवेशकों को भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि भारत में नीतिगत स्थिरता, बड़े बाजार और तकनीकी विकास की संभावनाएं मौजूद हैं। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सौर पैनल, पवन ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज, बिजली वितरण और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में निवेश के व्यापक अवसर बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस दशक के अंत तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे देश में नई परियोजनाओं के साथ-साथ रोजगार, विनिर्माण और तकनीकी नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा।

मोदी ने कहा कि भारत सौर और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसके प्रभावी भंडारण और वितरण की व्यवस्था भी विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन कुछ विशेष क्षेत्रों में अधिक होता है, जबकि बिजली की मांग देश के अलग-अलग हिस्सों में रहती है। इसलिए ऐसे मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क की आवश्यकता है, जो एक क्षेत्र में पैदा होने वाली स्वच्छ बिजली को दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचा सके। इसी उद्देश्य से ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और अंतरराज्यीय बिजली ट्रांसमिशन व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने बैटरी स्टोरेज तकनीक को भी भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। ऐसे में बिजली को बड़े स्तर पर स्टोर करने की क्षमता विकसित करना जरूरी है, ताकि जरूरत के समय इसकी उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने स्वदेशी बैटरी तकनीक और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के विकास पर जोर देते हुए कहा कि भारत को इस क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ानी होगी। इसके लिए उद्योगों, शोध संस्थानों, स्टार्टअप और निवेशकों को मिलकर काम करना चाहिए।

पीएम मोदी ने स्टार्टअप्स, आईआईटी, शोधकर्ताओं और नवाचार से जुड़े युवाओं से स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नए प्रयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा की क्रांति केवल सोलर पैनल लगाने और बिजली उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। ऐसे नए मॉडल और तकनीक विकसित करने की जरूरत है, जिनसे आम परिवार अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा कर सकें। उन्होंने कहा कि भारत के युवा और स्टार्टअप इस क्षेत्र में दुनिया के लिए उपयोगी समाधान तैयार कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने निवेशकों और उद्यमियों से इस अवसर को पहचानकर नई तकनीकों और व्यावसायिक मॉडलों पर काम करने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भारत की योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत इस क्षेत्र में मिशन मोड में आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत दशक के अंत तक सालाना 50 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रीन हाइड्रोजन का इस्तेमाल उद्योग, परिवहन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। इससे उन क्षेत्रों में भी कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सकती है, जहां पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता अधिक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन के साथ-साथ इसके परिवहन, भंडारण और उपयोग से जुड़ी तकनीक भी विकसित करनी होगी।

मोदी ने किसानों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान यानी पीएम-कुसुम योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। सरकार का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में बिजली और डीजल पर निर्भरता कम करना तथा किसानों को स्वच्छ ऊर्जा के विकल्प उपलब्ध कराना है। प्रधानमंत्री के अनुसार, अब तक 30 लाख से अधिक किसानों को सौर ऊर्जा से संचालित सिंचाई सुविधाओं तक पहुंच मिली है। इससे खेती की लागत घटाने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने की संभावनाएं बन रही हैं।

प्रधानमंत्री ने सरकारी भवनों को भी सौर ऊर्जा से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और स्ट्रीट लाइटिंग व्यवस्था में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाया जाना चाहिए। इससे बिजली की पारंपरिक आपूर्ति पर दबाव कम होगा और सरकारी संस्थानों के बिजली खर्च में भी बचत हो सकती है। उन्होंने बताया कि 44 हजार से अधिक सरकारी भवनों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा चुका है, जिससे हर साल लगभग 700 करोड़ रुपये की बचत हो रही है। उन्होंने इस मॉडल को आगे बढ़ाने और देशभर में अधिक से अधिक सार्वजनिक संस्थानों को स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ने की जरूरत बताई।

भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 का आयोजन 2 से 5 नवंबर तक किया जा रहा है। इस वर्ष सम्मेलन की थीम ‘इन्वेस्ट, इनोवेट, इंस्पायर’ रखी गई है। इसमें 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। सम्मेलन में 40 से अधिक मंत्री, नीति निर्माता, निवेशक, वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि और उद्योग जगत के प्रमुख हिस्सा ले रहे हैं। साथ ही 400 से अधिक प्रदर्शक सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण और अन्य स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों से जुड़े उत्पादों और समाधानों का प्रदर्शन कर रहे हैं। सम्मेलन का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ाना, अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत करना और नई तकनीकों के विकास को गति देना है।

इस आयोजन के साथ अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की नौवीं बैठक और ग्रीन हाइड्रोजन पर चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया जा रहा है। इन मंचों के जरिए सौर ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग, निवेश और तकनीकी साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी। भारत सरकार का मानना है कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग से नई परियोजनाओं को गति मिलेगी और विकासशील देशों को भी आधुनिक तकनीक तथा निवेश के अवसर मिल सकेंगे।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि भारत के लिए स्वच्छ ऊर्जा केवल भविष्य की जरूरत नहीं, बल्कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में मजबूती बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार का लक्ष्य नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन, भंडारण, वितरण और तकनीकी नवाचार को एक साथ आगे बढ़ाना है, ताकि देश की ऊर्जा जरूरतें अधिक सुरक्षित और टिकाऊ तरीके से पूरी की जा सकें। पीएम मोदी ने स्टार्टअप्स, उद्योगों, निवेशकों और युवाओं से इस बदलाव में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।

इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया

Avatar photo
संवाददाता

Priyanka Singh

संबंधित खबरें

पाठकों की राय

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *