Noida Diwali Celebration: रोशनी से जगमगाया शहर, लक्ष्मी-गणेश पूजन के साथ धूमधाम से मनेगी दीपावली
रोशनी, खुशियों और समृद्धि का त्योहार दीपावली रविवार को देशभर में धूमधाम से मनाया जाएगा। भगवान श्रीराम के 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटने की खुशी से जुड़ा यह पर्व अब घरों में सुख-समृद्धि और माता लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक बन चुका है। नोएडा में कई दिनों से चल रही दीपावली की तैयारियां शनिवार को छोटी दीवाली पर अंतिम चरण में पहुंच गईं। शहर के बाजारों में सुबह से देर शाम तक खरीदारी का सिलसिला जारी रहा। लोगों ने लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, फूलों की मालाएं, मिठाइयां, खील-बताशे, दीये, शक्कर के हाथी-घोड़े, झालर, इलेक्ट्रॉनिक लाइटें और सजावटी सामान खरीदा। कई दिन पहले से ही लोगों ने अपने घरों, दुकानों और दफ्तरों को रोशनी और फूलों से सजा दिया था।
सेक्टर-18 स्थित अट्टा, सेक्टर-27 की इंदिरा मार्केट, सेक्टर-29, सेक्टर-59 मामूरा और भंगेल समेत शहर के प्रमुख बाजारों में शनिवार को काफी भीड़ रही। छोटी दीवाली पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों और फूलों की खरीदारी ज्यादा देखने को मिली। लोग पूजा के लिए असली फूलों की मालाएं खरीद रहे थे, जबकि घरों की सजावट के लिए आर्टिफिशियल फूलों को अधिक पसंद किया गया। दुकानदारों के अनुसार आर्टिफिशियल फूल कम कीमत में मिल जाते हैं, कई दिनों तक खराब नहीं होते और दोबारा इस्तेमाल किए जा सकते हैं। फूल विक्रेता सुधीर ने बताया कि अधिकतर ग्राहक असली फूल केवल लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों को पहनाने के लिए खरीद रहे हैं। लगभग एक हफ्ते पहले असली फूलों की माला करीब 30 से 40 रुपये में मिल रही थी, जो शनिवार को 50 रुपये तक पहुंच गई।
बाजारों में दीवाली से जुड़े पारंपरिक सामान की भी खूब मांग रही। खील, बताशे और शक्कर से बने हाथी, घोड़े, गुड़िया और दूसरे खिलौने खरीदने के लिए लोग दुकानों पर पहुंचे। दुकानदार सुरेश ने बताया कि सामान्य दिनों में ये सामान करीब 50 से 70 रुपये किलो तक मिल जाते हैं, लेकिन दीवाली पर मांग बढ़ने से इनकी कीमत 100 से 150 रुपये किलो तक पहुंच जाती है। लोगों ने मिठाइयां, पूजा की थालियां, रोली, चावल, कलश, धूप-अगरबत्ती, कपूर और अन्य पूजा सामग्री भी खरीदी।
सजावट के सामान में इस बार भी झालर, रंग-बिरंगी एलईडी लाइटें, इलेक्ट्रॉनिक दीये, मोमबत्तियां, रंगोली, बंदनवार, तोरण, सजावटी लड़ियां, आर्टिफिशियल फूल और लटकन की मांग रही। लोगों ने घरों की छत, बालकनी, मुख्य दरवाजे और मंदिरों को रोशनी से सजाया। कई परिवारों ने टीवी, फ्रिज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान के साथ कार और दोपहिया वाहन भी खरीदे। शहर के सुनारों के अनुसार इस बार सोने की तुलना में चांदी की खरीदारी अधिक रही। सोने की कीमत अधिक होने के कारण लोगों ने चांदी के सिक्के, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, पाजेब, बिछिया और अन्य आभूषण ज्यादा खरीदे।
दीपावली को लेकर शहर के प्रमुख मंदिरों में साफ-सफाई और सजावट की गई है। सेक्टर-19 स्थित सनातन धर्म मंदिर, सेक्टर-2 स्थित लाल मंदिर और सेक्टर-20 स्थित हनुमान मंदिर समेत अन्य मंदिरों को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। रविवार सुबह से मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है और प्रसाद वितरण भी किया जाएगा। शाम को परिवार के लोग एक साथ माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करेंगे। आचार्य आदित्य द्विवेदी ने कहा कि दीपावली पर प्रदोष काल में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। शहर में रविवार को लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 5:54 से 7:49 बजे तक रहेगा।
जैन समुदाय के लिए भी दीपावली का विशेष धार्मिक महत्व है। जैन धर्म में यह दिन भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि भगवान महावीर को कार्तिक अमावस्या के दिन निर्वाण प्राप्त हुआ था, इसलिए जैन मंदिरों में निर्वाण लड्डू चढ़ाने की परंपरा है। सेक्टर-27 और सेक्टर-50 समेत शहर के जैन मंदिरों में रविवार और सोमवार को यह परंपरा निभाई जाएगी, जिसमें श्रद्धालु भगवान महावीर को 11, 21, 31 और 41 किलो के चीनी के लड्डू अर्पित करेंगे।
सिख समुदाय के लोग दीपावली के अवसर पर बंदी छोड़ दिवस मनाएंगे, जो छठे सिख गुरु हरगोबिंद साहिब की ग्वालियर किले से रिहाई की स्मृति से जुड़ा है। शहर के गुरुद्वारों में अरदास, गुरबानी कीर्तन और लंगर सेवा होगी। सेक्टर-33 स्थित इस्कॉन मंदिर में कार्तिक मास के उपलक्ष्य में चल रहे दीपदान महोत्सव में भक्त भगवान दामोदर के समक्ष दीपदान करेंगे और भजन-कीर्तन में शामिल होंगे।
सेक्टर-62 स्थित विनायक मंदिर में दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार भगवान कार्तिक और गणेश की विशेष पूजा होगी। श्रद्धालु भगवान को तेल से स्नान कराकर पाउडर लगाएंगे, नए वस्त्र पहनाएंगे और पारंपरिक मिठाइयों व नमकीन व्यंजनों का भोग लगाएंगे। मंदिर के सेवादार एस. वेंकटेश ने बताया कि परिसर को साफ-सफाई के बाद रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। दीपावली केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि नेपाल, श्रीलंका, मलेशिया, मॉरीशस, फिजी, म्यांमार, गुयाना, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो समेत कई देशों में भी मनाई जाती है, और दुनिया भर में बसे भारतीय दीप जलाकर व पूजा-अर्चना के साथ यह पर्व मनाते हैं।






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